नई दिल्ली: हाल ही में एक छोटा सा क्षुद्रग्रह, जिसे अब ‘2025 TF’ नाम दिया गया है, पृथ्वी के बेहद करीब से गुजरा, लेकिन किसी को इसका पता तक नहीं चला। यह घटना एक अक्टूबर की रात को हुई, जब यह क्षुद्रग्रह अंटार्कटिका के ऊपर से मात्र 428 किलोमीटर की ऊंचाई पर चुपके से निकल गया। यह दूरी इतनी कम थी कि यह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की कक्षा के आसपास थी, जो पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर चक्कर लगाता है। इस क्षुद्रग्रह का आकार छोटा, लगभग 3 से 10 फीट का था, जिसके कारण यह पृथ्वी के लिए कोई खतरा नहीं बना। फिर भी, इसकी खोज न होने ने वैज्ञानिकों को चौंका दिया।
आकार छोटा, घटना बड़ी
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के अनुसार, ‘2025 टीएफ’ का आकार एक छोटी कार जितना था। अगर यह पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करता, तो यह एक चमकदार उल्का की तरह जलकर कुछ ही पलों में नष्ट हो जाता। यह क्षुद्रग्रह कई उपग्रहों की कक्षा से भी नीचे था, जो इसे एक असाधारण खगोलीय घटना बनाता है। सामान्यतः उपग्रह 160 से 2000 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्कर लगाते हैं, लेकिन यह उससे भी करीब था।
क्यों नहीं दिखा पहले?
इस क्षुद्रग्रह की सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इसे गुजरने से पहले कोई नहीं देख पाया। नासा के कैटालिना स्काई सर्वे ने इसके गुजरने के कुछ घंटों बाद इसके निशान पकड़े। यह प्रोजेक्ट पृथ्वी के आसपास के खगोलीय पिंडों पर नजर रखता है ताकि कोई खतरा टाला जा सके। वैज्ञानिकों ने बाद में इसकी दूरी और समय की गणना की, जिससे पता चला कि यह कितना करीब था। ईएसए का कहना है कि इतने छोटे पिंड को अंतरिक्ष की विशालता में ढूंढना बेहद मुश्किल है, खासकर जब तक यह पास न आए।
अगली मुलाकात कब?
वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि ‘2025 टीएफ’ अब 2087 में अप्रैल के महीने में पृथ्वी के करीब लौटेगा। यानी, अगले 62 साल तक यह हमें परेशान नहीं करेगा। लेकिन इस घटना ने यह सवाल जरूर उठाया है कि क्या हमारी निगरानी प्रणाली इतने छोटे पिंडों को पहले से पकड़ने में सक्षम है?
एक और क्षुद्रग्रह का आगमन
मजे की बात यह है कि अगले ही दिन, दो अक्टूबर को एक और छोटा क्षुद्रग्रह ‘2025 टीक्यू2’ पृथ्वी के पास से गुजरा। यह कनाडा के ऊपर से करीब 4,850 किलोमीटर की दूरी पर था। यह भी छोटा था और कोई खतरा नहीं पैदा करता। दो दिनों में दो क्षुद्रग्रहों का इतने करीब से गुजरना खगोलशास्त्रियों के लिए एक रोमांचक अवसर रहा।
क्या है खतरे की सीमा?
नासा के अनुसार, हर साल हजारों छोटे-बड़े पिंड पृथ्वी के पास से गुजरते हैं। लेकिन केवल वही खतरनाक माने जाते हैं, जिनका आकार 500 फीट से ज्यादा हो और जो पृथ्वी से 75 लाख किलोमीटर से कम दूरी पर आएं। इस हिसाब से ‘2025 टीएफ’ और ‘2025 टीक्यू2’ दोनों ही सुरक्षित थे।
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हाल की गतिविधियां
पिछले कुछ समय में, सितंबर 2025 के आखिरी हफ्ते में 10 छोटे क्षुद्रग्रह चंद्रमा की कक्षा से भी कम दूरी पर पृथ्वी के पास से गुजरे। ये सभी छोटे थे और कोई खतरा नहीं पैदा करते। फिर भी ये घटनाएं बताती हैं कि अंतरिक्ष में छोटे पिंडों की चहल-पहल कितनी ज्यादा है।
भविष्य के लिए सबक
यह घटना वैज्ञानिकों के लिए एक चेतावनी भी है। छोटे क्षुद्रग्रहों को पहले से पकड़ने की तकनीक को और बेहतर करने की जरूरत है। ऐसी घटनाएं न केवल खगोल विज्ञान के लिए रोचक हैं, बल्कि भविष्य में पृथ्वी की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण सबक देती हैं।



