नई दिल्ली: सूरज, हमारे सौरमंडल का दिल, अपने रहस्यों से वैज्ञानिकों को हमेशा चकित करता रहा है। हमने इसकी सतह, वायुमंडल और चुंबकीय क्षेत्र के बारे में बहुत कुछ जाना, लेकिन इसके ध्रुवीय क्षेत्र उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव अब तक हमारी नजरों से दूर रहे हैं। ये ध्रुव सूरज के चुंबकीय चक्र और तेज सौर हवाओं का केंद्र हैं, जो अंतरिक्ष मौसम को प्रभावित करती हैं। यह मौसम पृथ्वी पर संचार, उपग्रहों और बिजली ग्रिड को नुकसान पहुंचा सकता है। चायनीज जर्नल ऑफ स्पेस साइंस में प्रकाशित एक ताजा अध्ययन के अनुसार, सूरज के ध्रुवों का गहन अवलोकन इन रहस्यों को सुलझाने की कुंजी हो सकता है।
ध्रुवों का महत्व क्यों?
सूरज के ध्रुवों पर सौर ज्वालाएं या अन्य गतिविधियां कम दिखती हैं, लेकिन इनका प्रभाव बहुत बड़ा है। ये क्षेत्र सूरज के वैश्विक चुंबकीय क्षेत्र को नियंत्रित करते हैं, जो हर 11 साल में ध्रुवों की चुंबकीय दिशा को उलट देता है। ध्रुवों पर मौजूद कोरोनल होल्स तेज सौर हवाओं का स्रोत हैं, जो पूरे सौरमंडल में फैलती हैं। लेकिन वैज्ञानिक अभी तक यह नहीं समझ पाए कि ये हवाएं कैसे बनती हैं क्या चुंबकीय पुनः संयोजन (मैग्नेटिक रीकनेक्शन) इसका कारण है या प्लाज्मा तरंगें? ध्रुवों का अध्ययन तीन बड़े सवालों के जवाब दे सकता है:
सौर चक्र का रहस्य: सूरज का चुंबकीय चक्र, जिसे सौर डायनामो कहते हैं, इसके अंदर के घूर्णन और प्रवाह से चलता है। लेकिन इस प्रक्रिया की गहराई अभी अस्पष्ट है। ध्रुवीय अवलोकन इसे समझने में मदद करेगा।
तेज सौर हवाओं का स्रोत: ये हवाएं ध्रुवीय कोरोनल छिद्रों से निकलती हैं। क्या ये घने प्लूम्स से आती हैं या उनके बीच की जगह से? इसका जवाब ध्रुवों की तस्वीरें दे सकती हैं।
अंतरिक्ष मौसम का प्रभाव: सौर ज्वालाएं और कोरोनल मास इजेक्शन (CME) पृथ्वी पर जीपीएस, संचार और बिजली सिस्टम को बाधित कर सकते हैं। ध्रुवों से अवलोकन इन घटनाओं की भविष्यवाणी को बेहतर बनाएगा।
सौर ध्रुवीय-कक्षा मिशन (SPO): एक नई शुरुआत
2029 में लॉन्च होने वाला सौर ध्रुवीय-कक्षा वेधशाला (SPO) मिशन सूरज के ध्रुवों को पहली बार करीब से देखेगा। यह मिशन जुपिटर की गुरुत्वाकर्षण सहायता (JGA) का उपयोग करेगा ताकि इसकी कक्षा पृथ्वी के सामान्य कक्षीय तल (एक्लिप्टिक प्लेन) से ऊपर ले जाई जा सके।
SPO मिशन की खासियतें
- कक्षा का झुकाव: 75 से 80 डिग्री, जो ध्रुवों का स्पष्ट दृश्य देगा।
- मिशन अवधि: 15 साल (8 साल विस्तारित), जिसमें हर 1.5 साल में सूरज की परिक्रमा।
- अवलोकन समय: 1000+ दिन ध्रुवों पर केंद्रित।
उपकरण
- रिमोट सेंसिंग: चुंबकीय क्षेत्र और प्लाज्मा प्रवाह मापने के लिए।
- चरम पराबैंगनी दूरबीन (EUT) और एक्स-रे इमेजिंग टेलीस्कोप (XIT): सूरज के ऊपरी वायुमंडल की तस्वीरें।
- विस्कोर और व्लाकोर: कोरोना और सौर हवा की निगरानी।
- इन-सीटू उपकरण: सौर हवा और चुंबकीय क्षेत्र का प्रत्यक्ष अध्ययन।
वैश्विक सहयोग से सूरज पर नजर
SPO मिशन अकेला नहीं होगा। यह नासा के SDO, IRIS, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के सोलर ऑर्बिटर, भारत के आदित्य-L1, चीन के ASO-S और आगामी L5 मिशन के साथ मिलकर काम करेगा। ये मिशन मिलकर सूरज का लगभग 360-डिग्री दृश्य (4π कवरेज) प्रदान करेंगे। यह पहली बार होगा जब वैज्ञानिक सूरज को हर कोण से देख पाएंगे।
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मानवता के लिए क्या मायने?
SPO मिशन सूरज के रहस्यों को खोलने के साथ-साथ व्यावहारिक लाभ भी देगा। यह अंतरिक्ष मौसम की सटीक भविष्यवाणी में मदद करेगा, जो उपग्रहों, विमानों, बिजली ग्रिड और अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी है। सौर चक्र को समझने से वैज्ञानिक सौर घटनाओं का पहले से अनुमान लगा सकेंगे, जिससे पृथ्वी पर तकनीकी बुनियादी ढांचे को बचाया जा सकेगा।
आगे की राह
यह मिशन सूरज को एक नए नजरिए से देखने का मौका देगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि ध्रुवीय अवलोकन न केवल सूरज की गतिविधियों को समझने में क्रांति लाएगा, बल्कि अंतरिक्ष अनुसंधान में भी नया अध्याय जोड़ेगा। भारत जैसे देश, जो आदित्य-L1 जैसे मिशनों के साथ सौर अनुसंधान में योगदान दे रहे हैं, इस वैश्विक प्रयास का हिस्सा हैं। सूरज के ध्रुवों को देखना मानवता के लिए एक नई दृष्टि की शुरुआत होगी।



