नई दिल्ली।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने 100 साल पूरे कर लिए हैं। दिल्ली के डॉ. अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर में शताब्दी समारोह हो रहा है। कार्यक्रम में शामिल होते हुए पीएम मोदी ने आरएसएस के योगदान को दर्शाने वाला सिक्का और स्मारक डाक टिकट जारी किया।
RSS की तारीफ
प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के योगदान को रेखांकित किया और समाज निर्माण में संगठन की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि “संघ ने देश में सांस्कृतिक जागरूकता, अनुशासन, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत किया है।”
संघ व्यक्तित्व निर्माण की वेदी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संघ की शाखाएं व्यक्तित्व निर्माण की वेदी हैं। इन शाखाओं में त्याग की भावना पनपती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अहंकार से हम तक की यात्रा शाखाओं में पूरी होती है। शाखाओं की तरह ही सरल जीवन पद्धति ही संघ की सौ साल की यात्रा का आधार रही है। उन्होंने कहा कि समर्पण, सेवा और राष्ट्र निर्माण की साधना के माध्यम से संघ ने अपने रास्ते में आने वाली हर चुनौती का सामना किया है।
पहली बार सिक्के पर भारत माता
सिक्का जारी करते हुए पीएम ने कहा कि इसके एक तरफ राष्ट्रीय चिन्ह है तो दूसरी ओर सिंह पर विराजमान भारत माता। स्वतंत्र भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब भारतीय मुद्रा पर भारत माता की छवि दिखाई दी है। इस पर संघ का बोध वाक्य भी अंकित है।
विदेशों में भी होंगे कार्यक्रम
आरएसएस दशहरा से शताब्दी वर्ष समारोह शुरू करने जा रहा है। 2 अक्टूबर 2025 से 20 अक्टूबर 2026 तक देश भर में कई कड़े कार्यक्रम होंगे। संघ प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका और यूरोप समेत कई देशों में आयोजित कार्यक्रमों में शिरकत कर सकते हैं। पीएम मोदी खुद आरएसएस के प्रचारक रहे हैं। बीजेपी में आने से पहले वो आरएसएस के एक कुशल संगठनकर्ता थे।
39 देशों में संघ का विस्तार
आरएसएस की स्थापना 1925 में हुई थी। 27 सितंबर को दशहरा पर नागपुर में केशवराव बलिराम हेडगेवार ने इसकी स्थापना की थी। संघ भारतीय संस्कृति और नागरिक के मूल्यों को बढ़ावा देने वाला एक हिंदू राष्ट्रवादी- स्वंयसेवक संगठन है। सत्तारूढ़ दल बीजेपी का यह पैतृक संगठन माना जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद से संघ का प्रभाव राष्ट्रीय राजनीती में ज्यादा देखा गया है। संघ परिवार का विस्तार न सिर्फ देश के कोने-कोने तक है बल्कि यह 39 देशों में पहुंच चुका है।



