नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने MPC की बैठक में लगातार दूसरी बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। रेपो रेट पहले की तरह 5.5% रहेंगे। न आपको लोन महंगे होंगे और न ही EMI बढ़ेगी। इससे पहले अगस्त में मौद्रिक समिति कमेटी की बैठक हुई थी, तो ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया गया था।
जीडीपी ग्रोथ में बढ़ोतरी
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 29 सितंबर को शुरू हुई बैठक में लिए गए फैसलों के बारे में जानकारी दी कि ब्याज दरों को 5.5% पर बरकरार रखा गया है। आपके लोन की EMI पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इसके अलावा GDP ग्रोथ को बढ़ाकर 6.8% कर दिया गया है। RBI गवर्नर ने बताया कि MPC के सभी 6 सदस्यों ने रेपो रेट को जस का तस रखने पर एकमत होकर सहमति जताई। GST में कटौती के बाद महंगाई में कमी आई, इस कारण रेपो रेट स्थिर रखने का फैसला किया गया है।
RBI 3 बार घटा चुका रेपो रेट
गौरतलब है कि पिछली MPC की मीटिंग 4 से 6 अगस्त के बीच हुई थी। हालांकि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया। फिलहाल रेपो रेट 5.5 प्रतिशत पर बरकरार है। जून में इसमें 0.50% कटौती की गई थी। इस साल रेपो रेट को 3 बार घटाया गया है। फरवरी में मीटिंग के दौरान इसे 6.5% से घटाकर 6.25 फीसदी किया गया, फिर अप्रैल में 0.25% कम किया गया। जून में 0.50% कमी की गई। इस तरह से रेपो रेट को 1 प्रतिशत कम किया गया है।
क्या होता है रेपो रेट
भारतीय रिजर्व बैंक आपको जिस दर पर लोन देता है, उसे रेपो रेट कहते हैं। अगर इसमें बदलाव नहीं होता है तो ब्याज दरें स्थिर रहती है। मतलब न घटेगी और न बढ़ेगी। अगर रेपो रेट बढ़ जाता है तो बैंक से मिलने वाला कर्ज महंगा हो जाता है। इसे घटाकर सेंट्रल बैंक से मिलने वाले कर्ज को सस्ता किया जाता है। ताकि ग्राहक बैंक से ज्यादा लोन लें और इकोनॉमी में मनी फ्लो बढ़े।
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मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी के बारे में जानिए
मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी यानी मौद्रिक नीति समिति भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा गठित एक इकाई है। इसका काम रेपो रेट का निर्धारण और मौद्रिक नीति का प्रबंधन करना है। इसमें 6 सदस्य होते हैं, जिसमें 3 RBI से तो 3 की नियुक्ति भारत सरकार करती है। हर 2 महीने पर यह कमेटी मीटिंग करता है। महंगाई को कंट्रोल रखते हुए विकास दर को कैसे संतुलित रखा जाए, इसकी जिम्मेदारी इनको तय करना होता है।




