पाला बदलने में माहिर जीतन राम मांझी के क्यों हैं तीखे तेवर

बिहार के मगध क्षेत्र में व्यापक प्रभाव रखने वाली राजनीतिक पार्टी हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के नेता जीतन राम मांझी के बगावती सुर से किसका खेल बिगड़ सकता है। गया से सैयद खतीबुल्लाह (गुड्डू) की रिपोर्ट।

Share This Article:

गया: पाला बदलने के खेल में माहिर हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के मुखिया और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने रविवार को गया में एक धमाकेदार बयान देकर एनडीए की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बेबाक बयानों के लिए मशहूर जीतन राम मांझी ने स्पष्ट कर दिया है  कि यदि आगामी विधानसभा चुनाव में उन्हें कम से कम बीस सीटें नहीं मिलीं तो वह 100 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़ें करेंगे। मतलब साफ है, उन्होंने एकला चलो के इरादे जाहिर कर दिए हैं।

जिउतिया के दिन जन्मे पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने अपने जन्मदिन पर आयोजित एक कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में  यह बात कही। उन्होंने कहा कि अब तक पंजीकृत दल के रूप में चिंहित हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा को राज्य दल बनने के लिए कम से कम 8 विधायकों की जरूरत है, या फिर छह प्रतिशत वोट चाहिए। इस अनिवार्यता के लिए उन्हें कम से कम 20 सीटें तो मिलनी ही चाहिए। 

2020 में हम को मिली थी 7 सीटें

वर्ष 2020 के विधानसभा चुनावों के दौरान एनडीए के घटक के रूप में हम को सात सीटें मिली थीं, जिनमें चार पर पार्टी के उम्मीदवार जीते थे। गया जिले के इमामगंज विधानसभा क्षेत्र से स्वंय जीतन राम मांझी चुनाव जीते थे, तो गया के ही बाराचट्टी से समधन ज्योति देवी को चुनावी जीत मिली थी। इसके अलावा जमुई जिले के सिकंदरा से पार्टी के उम्मीदवार प्रफुल्ल कुमार मांझी तो गया के टिकारी से हम के प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार विधानसभा पहुंचे थे। 

बगावती बयान के लिए चुना गया समय महत्वपूर्ण

बिहार की सत्ता में दोबारा वापसी की उम्मीद लेकर एंटी इनकम्बैंसी के प्रभाव कम करने के लिए धड़ाधड़ कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा कर रहे एनडीए के घटक दलों में शामिल पीएम-सीएम पर इसे ज्यादा सीटें हासिल करने के दबाव के रूप में देखा जा रहा है। मांझी के ताजा बयान से जहां एनडीए के घटक दलों में खटर-पटर के संकेत मिल रहे हैं, वहीं राजनीतिक विश्लेषक सीट शेयरिंग के पूर्व का सामान्य दबाव  बता रहे हैं।

खासकर 81 साल के जीतन राम मांझी ने गठबंधन दलों के बीच खलबली मचाने वाले इस बयान के लिए जो समय चुना है, वह भी महत्वपूर्ण है। बिहार में एनडीए गठबंधन के प्रमुख घटक भाजपा के सबसे बड़े नेता और देश के प्रधानमंत्री 15 सितम्बर को बिहार आ रहे हैं। ऐसे में पीएम के आगमन के चंद घंटे पूर्व दिए गए इस बयान का मतलब साफ है। प्रेशर की राजनीति। बिहार के सीमांचल क्षेत्र के प्रमुख जिले पूर्णिया में पीएम का कार्यक्रम है। बिहार में एनडीए के मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में नीतीश कुमार का नाम लेने से बच रही भाजपा और साथी दलों के लिए मांझी ने नई मुसीबतें पैदा कर दी हैं।

मगध में मांझी का क्या है प्रभाव

पूर्व मुख्यमंत्री के बगावती तेवर से मगध क्षेत्र की 26 सीटों पर एनडीए को बड़े पैमाने पर नुकसान झेलना पड़ सकता है। जीतन राम मांझी के कोर वोटर समझे जाने वाले मुसहर-भुइयां समाज की इस इलाके में 5-6 प्रतिशत आबादी है। पहले से ही मगध में मात खा चुके एनडीए के नेता मांझी को नाराज करने का मतलब जरूर समझ रहे होंगे। मगध या मगह क्षेत्र की 26 सीटों में से 19 (राजद-14, कांग्रेस-3 और भाकपा माले-2) पर 2020 के विधानसभा चुनावों के दौरान महागठबंधन दलों ने कब्जा कर लिया था। इस बार भी मगध के अपने चुनावी किले को बचाए रखने के लिए महागठबंधन के नेताओं के राजनीतिक अभियान जारी हैं। हाल ही में 16 दिनों की राहुल-तेजस्वी की वोट अधिकार यात्रा मगध के गया और औरंगाबाद सहित कई जिलों से होकर गुजरी थी।

मांझी आठ बार बदल चुके हैं दल

अब तक कम से कम आठ बार दल बदल चुके जीतन राम मांझी 70 के दशक में कांग्रेस के कार्यकर्ता के रूप में राजनीति में शामिल हुए थे। वह वर्ष 1980 में पहली बार कांग्रेस की टिकट से विधायक बने थे। वर्ष 1990 में जब मंडल आंदोलन उभार पर था तो उन्होंने पाला बदलकर जनता दल की सदस्यता ले ली। वर्ष 1997 में जब राष्ट्रीय जनता दल बना तो वह लालू के साथ राजद में आ गए। लालू यादव का उन्हें नजदीकी समझा जाता था। कांगे्रस के बिंदेश्वरी दुबे, सत्येंद्र नारायण सिंहा और जगन्नाथ मिश्रा के मंत्रिमंडल के अलावा लालू-राबड़ी काल में भी वह मंत्री रहे। 2005 में जदयू के उभार के समय वह नीतीश कुमार के साथ हो गए और मंत्री भी बने। नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद साथी होने के कारण वर्ष 2014 के मई महीने में वह दिन भी आया जब उन्हें मुख्यमंत्री का ताज मिला। हालांकि विश्वास में कमी के कारण वह सिर्फ 9 महीने ही इस पद पर रह सके। फरवरी 2015 में उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान बिहार में जदयू उम्मीदवारों की करारी हार की नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पद छोड़ दिया था। वर्ष 2015 में ही जीतन राम मांझी ने नई पार्टी के रूप में हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा का गठन कर गठबंधन राजनीति की शुरुआत की। 

प्रेशर पॉलिटिक्स या और कुछ

बिहार की चुनावी राजनीति पर गहरी नजर रखने वाले मगध विश्वविद्यालय के एक रिटायर्ड प्रोफेसर मदन मोहन शर्मा कहते हैं कि जीतन राम मांझी का ताजा बयान गठबंधन की राजनीति का प्रमुख हथियार समझा जाने वाला प्रेशर पॉलिटिक्स का नमूना भर है। वह एनडीए छोड़कर कहीं नहीं जाने वाले हैं। पिछली बार की तरह सात सीटें भी यदि उन्हें मिलती हैं तो वह एनडीए के साथ बने रहेंगे। एनडीए के साथ रहकर ही वह पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान संसद तक पहुंच गए।

परिवारवाद के पोषक बने मांझी

राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि मांझी का परिवार बिहार का अकेला ऐसा परिवार है, जहां पिता-पुत्र, समधन और पुत्रवधु सभी सत्ता सुख भोग रहे हों। जीतन राम मांझी खुद केंद्र में मंत्री हैं, पुत्र संतोष कुमार सुमन बगैर चुनाव लड़े एमएलसी बनकर बिहार सरकार में मंत्री हैं। समधन ज्योति देवी बिहार की बाराचट्टी से विधायक हैं, तो बहु दीपा मांझी भी इमामगंज विधानसभा क्षेत्र से उपचुनाव जीतकर विधानसभा पहुंची हैं।

ताजा बयान से कार्यकर्ताओं में उत्साह

हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के शेरघाटी स्थित नेता मनोज मांझी कहते हैं कि जीतन राम मांझी के ताजा बयान से विभिन्न क्षेत्रों में चुनाव की तैयारी कर रहे कार्यकर्ताओं के बीच नई उर्जा का संचार हुआ है। इधर जदयू की प्रदेश राजनीतिक सलाहकार समिति के सदस्य पुष्पेंदु पुष्प कहते हैं कि मांझी जी का बयान सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने वाला है। सीट शेयरिंग के पूर्व ऐसे बयान स्वाभाविक हैं। इसका कोई मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए। वह एनडीए के सम्मानित नेता हैं। एनडीए में बने रहेंगे।

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

https://x.com/DjSanjayrai

One thought on “पाला बदलने में माहिर जीतन राम मांझी के क्यों हैं तीखे तेवर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.