शेरघाटी विधानसभा: टिकट की दौड़ में मुखिया से लेकर टीचर-इंजीनियर तक, बढ़ी सियासी सरगर्मी

राजनीतिक दलों के उम्मीदवरों को शेरघाटी सीट पर बंटवारे का इंतजार है, जनसंपर्क अभियानों के जरिए संभावित प्रत्याशी मतदाताओं को लुभाने में जुटे हैं। इस सीट पर जदयू और राजद का दबदा रहा है। जनसुराज के आने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। गया से सैयद खतीबुल्लाह की विशेष रिपोर्ट।

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गया: बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच गया जिले की शेरघाटी सीट पर टिकट के लिए जबरदस्त जोर-आजमाइश शुरू हो गई है। प्रमुख गठबंधनों में सीट बंटवारे का इंतजार बना हुआ है, लेकिन इस अनारक्षित सीट पर मुखिया, ब्लॉक प्रमुख, कारोबारी, टीचर और इंजीनियर तक अपनी किस्मत आजमाने को बेताब हैं। जनसंपर्क अभियानों के जरिए संभावित उम्मीदवार मतदाताओं को लुभाने में जुटे हैं। ऐसे में धुरंधरों के साथ साथ सियासत की पेचीदा चाल सीख रहे नए-नवेले राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए भी पसंदीदा सीट बन गई है। इस सीट पर वर्ष 2010 से अब तक हुए तीन चुनावों में जदयू और राजद का दबदबा रहा है, लेकिन इस बार जनसुराज सहित कई छोटे दल भी मैदान में ताल ठोक रहे हैं।
गया जिले की दस विधानसभा सीटों में शेरघाटी सीट भी दूसरी सात सीटों की तरह अनारक्षित है। जिले के तीन विधानसभाई क्षेत्र अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए रिजर्व हैं। यही वजह है कि बिहार की राजनीति के दो प्रमुख गठबंधनों में शामिल पार्टियों के अलावा गठबंधन से बाहर रहने वाली सियासी जमातों से भी शेरघाटी में संभावित प्रत्याशियों का काफिला जुड़ गया है। दोनों प्रमुख गठबंधनों की सीट शेयरिंग नहीं होने के कारण गठबंधन में शामिल सभी दलों में टिकट की मांग करने वालों की भरमार है। अलग-अलग दलों से टिकट की चाह रखने वालों में पढ़े-लिखे जवानों और कारोबारियों से लेकर मुखिया, प्रमुख और नगर परिषद के प्रतिनिधि तक शामिल हैं। अपने-अपने ढंग से तमाम संभावित प्रत्याशियों द्वारा जनसम्पर्क अभियानों के माध्यम से समीकरण साधने के लिए गोटियां भी बैठायी जाने लगी हैं।

2010 में हुआ था पहला चुनाव

वर्ष 2008 के परिसिमन के बाद अस्तित्व में आई शेरघाटी सीट पर अब तक तीन बार चुनाव हो चुके हैं। पहले दो चुनावों में जदयू के विनोद प्रसाद यादव ने जीत हासिल की थी, जबकि तीसरे चुनाव में राजद की मंजू अग्रवाल ने यह सीट जदयू से छीन ली थी।

पहले चुनाव में तीसरे नम्बर पर रहे थे कद्दावर शकील खान

वर्ष 2010 के पहले चुनाव में जदयू के प्रत्याशी के रूप में शेरघाटी प्रखंड के कलंदरा गांव के रहने वाले विनोद यादव ने राजनीति के धुरंधर समझे जाने वाले पटना हाइकोर्ट के नामी वकील और राजद के उम्मीदवार शकील अहमद खान को करीब सात हजार वोटों से पराजित किया था। तब विनोद यादव की पहचान शेरघाटी के ब्लाक प्रमुख के रूप में थी। हकीकत तो यह है कि तब दिवंगत शकील खान तीसरे नम्बर पर रहे थे। उनसे ज्यादा वोट सुषमा देवी उर्फ मंजू अग्रवाल ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में हासिल किया था। मंजू अग्रवाल को तब 18 हजार 944 वोट मिले थे। चुनाव के कुछ हफ्ते पूर्व तक विनोद यादव भी राजद से जुड़े थे। चुनाव लड़ने की अपनी जिद की वजह से वह जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार के न्योते को स्वीकार कर जदयू में शामिल होने के साथ पार्टी प्रत्याशी बने थे। इस चुनाव में शेरघाटी सीट से 19 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे थे।

नीतीश के पाला बदलने पर भी नहीं बदला परिणाम

2015 के दूसरे विधानसभा चुनाव के पूर्व नीतीश के पाला बदलकर महागठबंधन में शामिल हो जाने के बाद भी जदयू के विधायक विनोद प्रसाद यादव को कोई फर्क नहीं पड़ा। वह पार्टी के प्रत्याशी घोषित होने के साथ चुनाव भी जीते। इस बार इन्होंने पिछले चुनावों की तुलना में 15 हजार वोटों की बढ़त हासिल करते हुए एनडीए (हम) के उम्मीदवार के रूप में कृष्णा यादव को पांच हजार वोटों से हराया। इस चुनाव में विभिन्न दलों के प्रत्याशियों और निर्दलियों सहित 12 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे।

हैट्रिक लगाने से चूक गए जदयू के विनोद यादव

2020 के चुनाव में विनोद यादव हैट्रिक लगाने से चूक गए। पिछले चुनाव की तुलना में 535 वोट ज्यादा हासिल करने के बावजूद राजद की उम्मीदवार मंजू अग्रवाल के हाथों वह अपनी सीट गंवा बैठे। मंजू अग्रवाल को इस चुनाव में 61 हजार 804 वोट मिले थे, जबकि विनोद यादव 45 हजार 114 वोट ही पा सके थे। इस चुनाव में 11 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे।

सीट शेयरिंग के पूर्व बना है असमंजस

अब चुनावों में जहां महागठबंधन की ओर से सीट बंटवारे के बाद राजद के साथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को भी शेरघाटी सीट मिलने की उम्मीद है, वहीं एनडीए की ओर से जदयू, भाजपा और हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के अलावा लोजपा के कार्यकर्ता भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सीट शेयरिंग में यह सीट उनके पाले आ सकती है। वैसे आम समझ है कि महागठबंधन में यह सीट राजद की होगी, जबकि एनडीए की ओर से जदयू के प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे। सीट शेयरिंग को लेकर नेताओं के रोज बदलते बयानों से भी स्थानीय कार्यकर्ता असमंजस में हैं।

जनसुराज में सर्वाधिक संभावित उम्मीदवार

जदयू की ओर से इस सीट को वापस पाने के लिए बतौर संभावित उम्मीदवार विनोद प्रसाद यादव पहले से ही लोगों से जन सम्पर्क कर रहे हैं, वहीं गया के एक प्रमुख कारोबारी और जदयू की गया महानगर इकाई के अध्यक्ष राजू वर्णवाल ने उनकी टेंशन बढ़ा दी है। राजू वर्णवाल ने शेरघाटी में ही अपना ठिकाना बनाकर टिकट की चाह में कुछ हफ्तों से जन सम्पर्क भी शुरु कर दिया है। उधर करमौनी कस्बे के रहने वाले भाजपा से संतोष गुप्ता रेस में हैं। वह भी अपने समर्थकों के साथ गांव-गांव घूम रहे हैं। हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा से भी कई उम्मीदवार टिकट पाने के लिए क्षेत्र से लेकर राजधानी तक की दौड़ लगा रहे हैं। इधर हाल के कुछ महीनों के दौरान अपने राजनीतिक अभियानों से गांव-गांव में पहचान बना चुकी जनसुराज से सर्वाधिक 14 उम्मीदवार टिकट की चाह में संघर्ष कर रहे हैं। पार्टी की स्टेट कमिटी के सदस्य जावेद खान कहते हैं कि शेरघाटी सीट से टिकट के दावेदारों में पूर्व मुखिया सीताराम पासवान, ब्लाक प्रमुख नरेश मांझी और नगर परिषद की अध्यक्षा के प्रतिनिधि पवन किशोर, पूर्व जिला परिषद सदस्य रिजवान खान और रिटायर्ड टीचर शहरयार अंसारी सहित 14 संभावित उम्मीदवार हैं। टिकट की चाह रखने वालों में एक इंजीनियर भी शामिल हैं। मतदाताओं में ऐसे उम्मीदवारों की पहचान और विश्वास के साथ दूसरे और मानकों पर खरा उतरने वाले उम्मीदवार ही पार्टी के प्रत्याशी होंगे।

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

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