लाखों श्रद्धालुओं का आस्था का केंद्र है विद्यापतिधाम

मिथिलांचल का देवघर विद्यापतिधाम श्रावणी मेले को लेकर सजकर तैयार है। भगवान भोलेनाथ के जयकारे से पूरा शहर व आस-पास का इलाका भक्तिमय है। यहां पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं।

Share This Article:

समस्तीपुर: समस्तीपुर जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित विद्यापति धाम मिथिलांचल का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है, जिसे ‘मिथिलांचल का देवघर’ भी कहा जाता है. यह स्थान महाकवि विद्यापति से जुड़ा हुआ है। विद्यापति नगर प्रखंड तहत एक माह तक चलने वाली विद्यापतिधाम में श्रावणी मेले को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है।
श्रद्धालुओं की भीड़ को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के मद्देनजर मंदिर में सीसीटीवी कैमरा, श्राद्धलुओं की सुविधा के लिए शुद्ध पेयजल, शौचालय, बैरिकेटिंग, रोशनी के उत्तम प्रबंध, मंदिर के पीछे पार्किंग बनाया गया हैं। यहां पर्याप्त मात्रा में सुरक्षा बल की तैनाती की गई है। वहीं कई जगहों पर मजिस्ट्रेट के साथ शस्त्र बल तैनात रहेंगे। मंदिर परिसर में पूजा के लिए पूजन सामग्री, प्रसाद की दुकानें, झूला, मीना बाजार भी सज गई है।
सावन माह शरू होते ही श्रावणी मेले को लेकर भक्त और भगवान की नगरी विद्यापतिधाम में आस्था का सैलाब प्रतिवर्ष उमड़ता है। निकटवर्ती गंगा के चमथा घाट, झमटिया, सिमरिया, पतसिया, सुल्तानपुर, बुलगानी घाट धमौन, रसलपुर, जौनापुर के घाटों से हजारों कांवरिया जल लेकर पैदल यात्रा करते हुए उगना महादेव पर जलाभिषेक करते है। बालेश्वर स्थान विद्यापतिधाम के सदस्यों ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए जलाभिषेक को लेकर आधी रात से ही श्रद्धलुओं का आना जारी रहेगा। महिला व पुरुषों के लिए अलग- अलग लाइन की व्यवस्था की गई है। भक्तों के लिए लाइन में लग कर जलाभिषेक करने की व्यवस्था की गयी है। अत्यधिक भीड़ के मद्देनजर मंदिर परिसर में कंट्रोल रूम बनाया गया है। प्राथमिक उपचार एवं सुरक्षाबल की व्यवस्था प्रशासनिक स्तर से की गई है। साथ ही दलसिंहसराय से मोहिउद्दीननगर की ओर जाने वाली भाड़ी वाहनों के परिचालन पर पूर्ण रूप से रोक रहेगा।
बजरंगी चौक से मड़वा ढाला कोल्ड स्टोरेज के रास्ते सुभानीपुर होते हुए परिचालन किया जाएगा। मलकलीपुर तीन मोहानी गांव के निकट बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है। मंदिर की ओर जाने वाली सड़कों पर दोनों ओर बैरिकेडिंग रहेगा। भक्तों की सुविधा के लिए सारी तैयारी पूरी कर ली गई है। विद्यापतिधाम के मुख्य पुजारी कामेश्वर गिरि व अमरनाथ गिरि ने बताया कि श्रावण मास सबसे पवित्र व शुद्ध महीना होता है। भगवान शिव का वास रहता है। शिव को श्रद्धा व भक्ति अधिक प्रिय होती है। भगवान शंकर भोले अपने भक्तों व कांवड़ लाने वालों शिवभक्तों को सुख-समृद्धि और धन-धान्य आदि प्रदान करते हैं। कांवड़ यात्रा एक तपस्या है, इसमें भगवान शिव के प्रति प्रेम और श्रद्धा भावना उत्पन्न होती है।

Tags :

NewG Network

contact@newgindia.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.