नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के वड्डेश्वरम में केएल विश्वविद्यालय परिसर इन दिनों रंगों और संगीत से गूंज रहा है। यहां चल रहा है छठा राष्ट्रीय ईएमआरएस सांस्कृतिक एवं कला उत्सव ‘उद्भव 2025’। उद्घाटन केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम और आंध्र प्रदेश की जनजातीय कल्याण मंत्री गुम्मिडि संध्या रानी ने किया।
2,000 बच्चे, 28 राज्य, एक मंच
देश के कोने-कोने से एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) के 2,000 से ज्यादा आदिवासी बच्चे यहां जुटे हैं। कोई नागालैंड से डांस लेकर आया है, कोई छत्तीसगढ़ से बस्तरिया गीत, कोई राजस्थान से घूमर, तो कोई अंडमान-निकोबार से अपनी जनजातीय वेशभूषा। कुल 48 अलग-अलग मुकाबले हैं, जिसमें गायन, नृत्य, नाटक, चित्रकला, कविता पाठ, वाद्य यंत्र, सब कुछ।
सिर्फ मुकाबला नहीं, आत्मविश्वास की उड़ान
यह उत्सव सिर्फ प्रतियोगिता नहीं है। यहां जीतने वाले बच्चे आगे पुणे में होने वाले राष्ट्रीय कला उत्सव में पूरे देश की 38 टीमों से भिड़ेंगे। लेकिन मंत्री ने कहा कि यहां हर बच्चा विजेता है, क्योंकि वह अपनी भाषा, अपनी संस्कृति को पूरे देश के सामने गर्व से पेश कर रहा है।
प्रधानमंत्री का सपना साकार हो रहा
जुएल ओराम ने बताया कि प्रधानमंत्री का सपना है कि आदिवासी इलाकों के बच्चे भी डॉक्टर, इंजीनियर, कलाकार बनें। एकलव्य स्कूलों में अच्छी पढ़ाई के साथ-साथ खेल और कला को भी उतना ही महत्व दिया जा रहा है। उद्भव ऐसा ही मंच है जो बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ता भी है और मुख्यधारा में लाता भी है।
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नेस्ट्स की मेहनत रंग ला रही
राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति (नेस्ट्स) हर साल यह आयोजन करती है। इस बार आंध्र प्रदेश आदिवासी कल्याण सोसाइटी ने शानदार मेजबानी की। बच्चों के चेहरों पर आत्मविश्वास और मंच पर उनकी प्रस्तुति देखकर साफ लग रहा है कि आने वाले दिनों में भारत की जनजातीय प्रतिभाएं देश-दुनिया में नाम रोशन करेंगी। छोटे-छोटे गांवों से आए ये बच्चे जब स्टेज पर अपनी कला दिखाते हैं तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठता है। उद्भव 2025 सिर्फ एक उत्सव नहीं, आदिवासी बच्चों के सुनहरे भविष्य की शुरुआत है।



