नई दिल्ली: सिटिज़न सर्विसेज को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (NeGD) ने विदेश मंत्रालय (MEA) के सहयोग से डिजिलॉकर प्लेटफ़ॉर्म पर पासपोर्ट वेरिफिकेशन रिकॉर्ड (PVR) को उपलब्ध करा दिया है। इस कदम से नागरिकों के लिए दस्तावेज़ प्रबंधन सरल होगा और कागजी रिकॉर्ड पर निर्भरता कम होगी।
क्या है डिजिलॉकर.?
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत संचालित डिजिलॉकर एक सुरक्षित क्लाउड-आधारित प्लेटफ़ॉर्म है, जो डिजिटल डॉक्यूमेंट्स को जारी करने, संग्रहित करने और सत्यापित करने की सुविधा देता है। अब पासपोर्ट सत्यापन रिकॉर्ड भी इसी प्रणाली के माध्यम से आसानी से एक्सेस और साझा किए जा सकेंगे। DigiLocker को भारत सरकार ने पहली बार सार्वजनिक रूप से 1 जुलाई 2015 को लॉन्च किया था। एक आंकड़े के अनुसार जून 2025 तक, DigiLocker के पंजीकृत यूजर की संख्या 53.92 करोड़ पहुंच चुकी थी।

नई सुविधा से नागरिकों को मिलेंगे कई लाभ
नई सुविधा से नागरिकों को कई लाभ होंगे। जैसे किसी भी समय डिजिटल डॉक्यूमेंट की उपलब्धता, तेज़ और कागज़ रहित प्रक्रिया होंगी, जिससे समय की बचत, सुरक्षित, छेड़छाड़-रहित और प्रामाणिक रिकॉर्ड, ऑनलाइन साझा और सत्यापन में आसानी, और हरित और पेपरलेस गवर्नेंस को बढ़ावा मिलेगा आदि।
पासपोर्ट वेरिफिकेशन रिकॉर्ड क्या है.?
पासपोर्ट वेरिफिकेशन रिकॉर्ड (PVR) वह आधिकारिक दस्तावेज़ है, जिसमें पासपोर्ट आवेदन के दौरान पुलिस द्वारा की गई पहचान और पते की जांच का परिणाम दर्ज होता है। यह प्रमाणित करता है कि आवेदक का पुलिस वेरिफिकेशन पूरा हो चुका है और वह पासपोर्ट पाने के योग्य है। इसमें सत्यापन की तिथि, रिपोर्ट की स्थिति और अधिकारी का विवरण शामिल होता है। अब PVR डिजिलॉकर पर उपलब्ध होने से इसे सुरक्षित रूप से किसी भी समय एक्सेस करना और साझा करना आसान हो गया है।



