कोयला खदानें अब सिर्फ कोयला नहीं, रोजगार और हरियाली भी दे रही हैं

कोयला मंत्रालय का ‘मिशन ग्रीन’ खदानों को बंद होने के बाद भी हरे-भरे जंगल और पर्यटन स्थल में बदलने का वादा कर रहा है।

Share This Article:

नई दिल्ली: झारखंड की मगध-अमरपाली और अरुणाचल की नमचिक-नामफुक खदानें बिजली के लिए कोयला तो दे ही रही हैं, साथ ही हजारों लोगों को नौकरी और इलाके में हरियाली भी ला रही हैं। कोयला मंत्रालय का ‘मिशन ग्रीन’ खदानों को बंद होने के बाद भी हरे-भरे जंगल और पर्यटन स्थल में बदलने का वादा कर रहा है।

झारखंड की दो खदानें: आधी कोयला सप्लाई यहां से

झारखंड के चतरा और रांची जिले में स्थित मगध और आम्रपाली खदानें इस साल सेंट्रल कोलफील्ड्स की कुल कोयला उत्पादन का लगभग 50% दे रही हैं। इनके पास कुल 1,311 मिलियन टन कोयला भंडार है। अगले साल ये दोनों खदानें मिलकर करीब 5,179 करोड़ रुपये की कमाई करेंगी। सबसे खास बात यह है कि इन खदानों ने अब तक 808 + 210 = 1,018 स्थानीय लोगों को सीधे नौकरी दी है। प्रोजेक्ट से प्रभावित परिवारों को पहले प्राथमिकता मिलती है।

अरुणाचल को मिलेगी अपनी कोयला खदान

अरुणाचल प्रदेश के नमचिक-नामफुक कोयला खदान से हर साल 2 लाख टन कोयला मिलेगा। इससे राज्य की बिजली जरूरतें पूरी होंगी और बाहर से कोयला लाने की मजबूरी कम होगी। इस छोटी-सी खदान से 270 लोगों को सीधा रोजगार और राज्य को हर साल 173 करोड़ रुपये राजस्व मिलेगा।

मिशन ग्रीन: खदान के बाद भी रहेगा जंगल

कोयला मंत्रालय ने ‘मिशन ग्रीन’ शुरू किया है जिसका पूरा नाम है प्रकृति को बढ़ाना, पुनर्स्थापित करना, समृद्ध करना और सशक्त बनाना। इसके तहत कोल इंडिया, एनएलसी और सिंगरेनी मिलकर पांच साल में बंद हो चुकी खदानों को फिर से हरा-भरा करेंगी। खदानों के आसपास बड़े स्तर पर पेड़ लगाए जा रहे हैं, सौर ऊर्जा प्लांट लग रहे हैं, खदान का पानी दोबारा इस्तेमाल हो रहा है। खदानें बंद होने के बाद उन्हें इको-टूरिज्म स्पॉट, मछली पालन या सौर पार्क में बदला जाएगा।

गांववालों को जोड़ा जा रहा है काम में

मिशन ग्रीन में गांव की महिलाओं के स्वयं सहायता समूह (SHG) को पौधे लगाने, नर्सरी चलाने और इको-टूरिज्म का काम दिया जा रहा है। इससे गांव की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। कोयला मंत्रालय ने एक खास कमेटी भी बनाई है जो हर महीने इस काम की निगरानी करती है।

आत्मनिर्भर भारत को मिल रहा बल

ये तीनों खदानें आयातित कोयले पर निर्भरता कम कर रही हैं। साथ ही सड़क, रेलवे और लॉजिस्टिक्स में नया निवेश आ रहा है, जिससे और नौकरियां पैदा हो रही हैं। केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने लोकसभा में बताया कि कोयला क्षेत्र अब सिर्फ कोयला निकालने का नहीं, बल्कि इलाके के समग्र और समावेशी विकास का माध्यम बन गया है। कोयला खदानें अब सिर्फ काला सोना नहीं निकाल रहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का सुनहरा मौका और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरा-भरा भविष्य भी तैयार कर रही हैं।

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

https://x.com/DjSanjayrai

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.