भागलपुर: पुलिस स्टेशनों के बाहर खड़े वाहन अक्सर आस-पास के लोगों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं। ये वाहन सडक़ों पर आवागमन में बाधा उत्पन्न करते हैं साथ ही पार्किंग की समस्या पैदा करते हैं। ऐसा देखा गया है कि, जब्त वाहनों की देखभाल के लिए कोई जिम्मेदार व्यक्ति नियुक्त नहीं होता। जिसके चलते इन जब्त वाहनों का प्रबंधन और रखरखाव एक ऐसी समस्या बन चुका है, जो न केवल पुलिस प्रशासन के लिए सिरदर्द है, बल्कि यह पर्यावरण, संसाधनों और सामाजिक दृष्टिकोण से भी एक गंभीर चुनौती बन गया है। पुलिस स्टेशनों और मालखानों में ये वाहन वर्षों तक सड़ते रहते हैं, जिससे न केवल जगह की कमी होती है, बल्कि यह व्यवस्था की नाकामी को भी उजागर करता है। हालांकि, इन सामानों के प्रबंधन और उनकी वर्तमान स्थिति को लेकर कुछ चिंताएं सामने आई हैं।
जब्त सामान की स्थिति
भागलपुर पुलिस द्वारा हाल के वर्षों में कई बड़ी कार्रवाइयों में चोरी और लूट का सामान बरामद किया गया है। उदाहरण के लिए, मधुसूदनपुर थाना क्षेत्र में एक कबाड़ी के गोदाम से 22 बाइकें बरामद की गई थीं। इसी तरह, नाथनगर थाना क्षेत्र में मंदिर से चोरी हुए पीतल के कलश को भी बरामद किया गया। हाल ही में, बायपास थाना ने 291 लीटर विदेशी शराब जब्त की थी। हालांकि, इन सामानों के रखरखाव को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं।
कई थानों में मालखानों की स्थिति ठीक नहीं है, जहां जब्त सामान को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त स्थान और संसाधनों की कमी है। पटना उच्च न्यायालय ने 2022 में आदेश दिया था कि थानों में जब्त वाहनों को सडक़ों पर अतिक्रमण का कारण नहीं बनना चाहिए। इसके बावजूद, कई थानों में वाहन और अन्य सामान खुले में रखे जाते हैं, जिससे उनकी स्थिति खराब होने का खतरा रहता है। बिहार पुलिस मुख्यालय अब केंद्रीकृत मालखाना प्रणाली लागू करने की योजना बना रहा है ताकि जब्त सामान को बेहतर तरीके से संरक्षित किया जा सके।
चुनौतियां और सुधार की जरूरत
जब्त सामान की सुरक्षा और उनके उचित प्रबंधन में कई समस्याएं सामने आती हैं। मालखानों में जगह की कमी, सामान की रिकॉर्डिंग में पारदर्शिता की कमी, और कुछ मामलों में सामान के गायब होने की शिकायतें दर्ज की गई हैं। इसके अलावा, जब्त सामान को समय पर कोर्ट में पेश करने या उनके निपटारे में देरी भी एक बड़ी समस्या है।
भागलपुर पुलिस ने हाल के समय में चोरी और लूट की घटनाओं के उद्भेदन के लिए कई अभियान चलाए हैं, जिनमें कई अपराधियों को गिरफ्तार किया गया और सामान बरामद किया गया। फिर भी, सामान की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में असंतोष देखा गया है, खासकर जब चोरी का सामान उनके मालिकों को समय पर नहीं लौटाया जाता।
30 अगस्त जब्त सामानों की जानकारी देना जरूरी
भागलपुर के आईजी विवेक कुमार के अनुसार, थाना में जब्त किए सामान की अद्यतन स्थिति क्या है, किस अवस्था में है। इस तरह की तमाम जानकारी प्रत्येक थानाध्यक्ष को देना होगा। दरअसल, इस पहल का मकसद जब्त सामान की पारदर्शिता बढ़ाना और उनकी स्थिति का सही-सही पता लगाना है। इसे लेकर 30 अगस्त समय सीमा रखी गई है। अक्सर देखा जाता है कि थानों के मालखानों में जब्त सामान का रखरखाव ठीक से नहीं हो पाता है। सालों तक पड़े-पड़े वाहन कबाड़ बन जाते हैं और दूसरे कीमती सामान भी खराब हो जाते हैं। इस मामले को लेकर सभी जिले के एसपी को पुलिस मुख्यालय से पत्र लिखा गया है।
थानाध्यक्ष की सूची की होगी जांच
थानाध्यक्ष के द्वारा दिए गए सामान के विवरण का मिलान थाने के फिजिकल रजिस्टर से भी किया जाएगा। इससे किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सकेगा। पूर्व से ही थाना स्तर पर मालखाना प्रभारी की तैनाती है। लेकिन अधिकांश थाना में मालखाना का प्रभार थानाध्यक्ष के पास ही है। अक्सर लोगों की शिकायत रहती है कि जिस अवस्था में सामान जब्त किया गया था वैसा वै अब नहीं है। कई थानों में रखी गाडिय़ों के पार्ट्स चोरी हो जाते हैं। टायर सड़ जाता है। जब्त माल को सुरक्षित रखने की जगह नहीं रहने के कारण सामान सड़ जाता है।
न्यायालय के आदेश से जब्त सामान को छोडऩे का आदेश होता है तो मामला तब फंसता है, जब लोगों को सामान सही सलामत नहीं मिलता है। फिर लोग पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर न्यायालय तक में गुहार लगाते हैं।
जर्जर थाना भवन में जब्त सामान रखना चुनौती
मालखाना में रखे सामान की गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर थानाध्यक्ष पर ही कार्रवाई होगी। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि किसी सामान की स्थिति खराब होती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर थानेदार जिम्मेदार होंगे। पुलिस मुख्यालय से इस तरह का आदेश मिलने के बाद अधिकांश थानाध्यक्ष ने जब्त सामान का क्रॉस चेक करने का काम शुरू कर दिया है।



