नई दिल्ली: प्रकृति का एक शानदार नजारा पर्सिड्स उल्का वर्षा (Perseids Meteor Showers) 12 और 13 अगस्त 2025 को अपने चरम पर होगा, जब आकाश में हर घंटे 100 तक उल्कापिंड चमक सकते हैं। नासा के अनुसार, इस दौरान चमकीली रेखाएं और आग के गोले दिखाई देंगे, जो खगोल प्रेमियों के लिए एक अविस्मरणीय दृश्य बनाएंगे। पर्सिड्स उल्का बौछार हर साल जुलाई के मध्य से अगस्त के अंत तक सक्रिय रहती है, लेकिन 12-13 अगस्त की रात को यह अपने पूर्ण वैभव में नजर आती है। गर्मी के मौसम में रात का साफ आकाश इसे देखने के लिए आदर्श समय बनाता है। इस बौछार की खासियत इसके आग के गोले हैं, जो धूमकेतु के बड़े कणों के जलने से बनते हैं और सामान्य उल्काओं की तुलना में अधिक समय तक आकाश में चमकते हैं।
पर्सिड्स उल्का वर्षा का कारण
यह खगोलीय घटना पृथ्वी के स्विफ्ट-टटल धूमकेतु के मलबे से गुजरने के कारण होती है। ये उल्कापिंड, जो ज्यादातर रेत के दाने से बड़े नहीं होते, 36 मील प्रति सेकंड की रफ्तार से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं और जलकर चमकीली रेखाएं बनाते हैं। इनका नाम पर्सियस तारामंडल के आधार पर रखा गया है, क्योंकि ऐसा प्रतीत होता है कि उल्काएं इसी दिशा से आ रही हैं। नासा इसे साल की सबसे रोमांचक और लोकप्रिय उल्का बौछार मानता है। रॉयल ऑब्जर्वेटरी के अनुसार, यह बौछार 17 जुलाई से शुरू होकर 24 अगस्त तक सक्रिय रहेगी। इस साल एक अतिरिक्त आकर्षण यह है कि 11 और 12 अगस्त को बृहस्पति और शुक्र एक डिग्री से भी कम दूरी पर दिखाई देंगे, जो सूर्योदय से पहले चमकते हुए एक शानदार दृश्य प्रस्तुत करेंगे।
चंद्रमा की रोशनी बन सकती है चुनौती
इस बार पर्सिड्स उल्का वर्षा के चरम पर चंद्रमा 84% रोशनी के साथ मौजूद होगा, जो कुछ उल्काओं की चमक को फीका कर सकता है। हालांकि, नासा का कहना है कि सबसे चमकीले उल्कापिंड और आग के गोले फिर भी दिखाई देंगे। खगोल प्रेमी किसी ऊंची इमारत, पेड़, या पहाड़ी के पीछे खड़े होकर चंद्रमा की रोशनी को आंशिक रूप से रोककर इस नजारे का आनंद ले सकते हैं। धैर्य रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि आंखों को अंधेरे के अनुकूल होने में समय लगता है।
उल्का वर्षा देखने के लिए टिप्स
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि उल्का वर्षा का पूरा आनंद लेने के लिए शहर की रोशनी और भीड़-भाड़ वाले इलाकों से दूर रहें। ग्रामीण क्षेत्र, पहाड़ी चोटियां, या समुद्र तट जैसे स्थान आदर्श हैं। साफ और खुले आकाश के नीचे लेटकर, बिना किसी उपकरण के, नंगी आंखों से यह नजारा देखना सबसे अच्छा है। प्रेक्षकों को कम से कम 20-30 मिनट तक अंधेरे में आंखों को ढलने देना चाहिए, ताकि आकाश की गतिविधियां स्पष्ट दिखें।
सबसे बड़े उल्कापिंड का इतिहास
रॉयल ऑब्जर्वेटरी के अनुसार, अब तक का सबसे बड़ा उल्कापिंड होबा लौह उल्कापिंड है, जिसका वजन 60 टन है। सबसे बड़ा पत्थरीला उल्कापिंड लगभग एक टन का है, जबकि अलेंदे कार्बोनेसियस चोंड्राइट का कुल वजन पांच टन था। सबसे प्रसिद्ध उल्का क्रेटरों में से एक अमेरिका का एरिजोना क्रेटर है, जो हजारों साल पहले 70 मीटर व्यास के एक उल्कापिंड के 60,000 किमी प्रति घंटे की गति से टकराने से बना। यह क्रेटर 1,280 मीटर चौड़ा और 180 मीटर गहरा है।
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खगोल प्रेमियों के लिए अवसर
पर्सिड्स उल्का वर्षा न केवल खगोल प्रेमियों के लिए, बल्कि प्रकृति और विज्ञान में रुचि रखने वाले हर व्यक्ति के लिए एक अनूठा अनुभव है। यह आकाशीय शो हमें ब्रह्मांड की विशालता और सुंदरता की याद दिलाता है। तो, 12-13 अगस्त की रात को समय निकालें, किसी शांत और अंधेरे स्थान पर जाएं, और इस चमकते नजारे का आनंद लें।



