नई दिल्ली: बिहार में हुए SIR से आधार कार्ड की प्रमाणिकता पर छिड़ी बहस के बीच इस बायोमीट्रिक दस्तावेज ने नया मुकाम हासिल किया है। आधार के ज़रिए पहचान साबित करने की प्रक्रिया के तहत 6 महीनों में 100 करोड़ से बढ़कर 200 करोड़ आदान-प्रदान हुए हैं। यूआईडीएआई गांवों से लेकर बड़े शहरों तक आधार के जरिए पहचान साबित करने की प्रक्रिया को कामयाब बनाने के लिए सरकारों, बैंकों और सेवा प्रदाताओं के साथ मिलकर काम कर रहा है।
ऐसे बढ़ा आंकड़ा
2024 के मध्य तक 50 करोड़ आदान-प्रदान दर्ज किए गए। जनवरी 2025 में यह संख्या करीब पांच महीनों में दोगुनी होकर 100 करोड़ हो गई। इसके बाद छह महीने से भी कम वक्त में यह आंकड़ा फिर से दोगुना होकर 200 करोड़ तक पहुंच गया।
विश्वास हुआ मजबूत
यूआईडीएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) भुवनेश कुमार ने कहा, “इतने कम समय में 200 करोड़, आधार पहचान साबित करने की प्रक्रिया के आदान-प्रदान के मुकाम तक पहुंच बदलावों से बनी व्यवस्था में विश्वास को दर्शाता है।
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शासन की रीढ़ मजबूत कर रहा यूआईडीएआई डिजिटल
देश के हर कोने में त्वरित, सुरक्षित और कागज़ रहित पहचान सत्यापन को कामयाब बनाकर यूआईडीएआई डिजिटल शासन की रीढ़ को मजबूत कर रहा है। यह कामयाबी महज संख्याओं को लेकर ही नहीं है बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि तकनीक को कुशलता के साथ इस्तेमाल किया जाता है तो वह दूरियों को खत्म कर सकती है। नागरिकों को और सशक्त बना सकती है और सही मायनों में आत्मविश्वास से भरे डिजिटल भविष्य की ओर जाने की भारत की यात्रा को, रफ्तार दे सकती है। UIDAI के मुताबिक देश में 125 करोड़ से ज्यादा लोगों के पास आधार कार्ड है। आधार को 2009 में पेश किया गया था। यह दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली है। आधार को अपडेट करने को लेकर रोज तीन-चार लाख अनुरोध मिलते हैं।



