लखनऊ: सरकार बार-बार दावा कर रही है कि प्रदेश में खाद का स्टाक भरपूर मौजूद है। दूसरी ओर उर्वरक के लिए किसान लम्बी-लम्बी लाइन लगाये खड़े दिखते हैं। कई जगह इसके लिए हाथापाई भी हो चुकी है। अभी पिछले सप्ताह हरदोई के मल्लावां की साधन सहकारी समिति दारूकुइया में यूरिया के लिए किसान भीड़ गये और जमकर मारपीट हो गयी। इस तरह की खबरें अधिकांश जिलों से आये दिन आती रहती है।
दूसरी तरफ सोमवार को ही कृषिमंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि प्रदेश में उर्वरकों में यूरिया 5,72,958 मीट्रिक टन, डीएपी 4,06,859 मीट्रिक टन और एनपीके 2,98,612 मीट्रिक टन है। उन्होंने बताया कि एक अगस्त से 24 अगस्त तक भारत सरकार द्वारा प्रदेश हेतु 268 यूरिया उर्वरक रैक डिस्पैच की गई, जिनमें से 223 रैक प्राप्त हो चुकी हैं तथा शेष 45 रैक रास्ते में हैं, जो अगले तीन से चार दिन में जनपदों को उपलब्ध हो जाएंगी।
कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों की दैनिक खपत के अनुरूप प्रतिदिन 10 से 12 रैक प्रदेश में भेजी जा रही हैं। 24 एवं 25 अगस्त को भारत सरकार द्वारा 20 यूरिया रैक प्रदेश के अयोध्या, जौनपुर, गोण्डा, प्रयागराज, बाराबंकी, रायबरेली, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, बलरामपुर, सन्तकबीरनगर, सुल्तानपुर, लखीमपुर खीरी, अमेठी, मिर्जापुर एवं वाराणसी सहित विभिन्न जनपदों के लिए डिस्पैच की गई हैं, जो आगामी दो से तीन दिनों में पहुँच जाएंगी।
कृषि मंत्री ने बताया कि उर्वरकों की जमाखोरी, कालाबाजारी, ओवर रेटिंग और टैगिंग रोकने के लिए प्रवर्तन कार्यवाही लगातार की जा रही है। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 12,653 छापे डाले गए, 3,385 नमूने लिये गये, 10471 विश्लेषित नमूने, 35 अमानक नमूने, 122 को निर्गत की गयी चेतावनी, 15 दुकानों की बिक्री प्रतिबंधित की गयी, 12 दुकानों की सील की गयी, 1196 लाइसेंस निरस्त किए गये, 571 लाइसेंस निलंबित किए गये और 111 प्राथमिकी दर्ज कर 11 व्यक्तियों को जेल भेजा गया।
प्रगतिशील किसान ने कहा, बार्डर पर ज्यादा परेशानी
उधर, गाजीपुर के प्रगतिशील किसान पंकज राय का कहना है कि खाद की दिक्कत काला बाजारी के कारण हो रही है। जो भी बार्डर के जिले हैं, वहां ज्यादा परेशानी है। गाजीपुर, बलिया, सोनभद्र से तो बिहार के किसान उठा ले जाते हैं। इसी तरह नेपाल बार्डर भी स्थिति रहती है।
स्टाक से ज्यादा चोरी रोकना जरूरी
वहीं, गोंडा के प्रगतिशील किसान अनिल श्रीवास्तव का कहना है कि कहीं भी ज्यादा स्टाक से जरूरी चोरी रोकना होता है, जिसके पास खेत नहीं, वह जुगाड़ से सौ बोरी लेकर ब्लैक कर रहा है। जो किसान हैं, वे लाइन लगाए खड़े हैं। इस कारण यह परेशानी बढ़ती जा रही है। हालांकि, सरकार के वर्तमान में की गयी कार्रवाइयों के कारण कुछ सुधार हुआ है।



