नई दिल्ली: DU के दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) चुनाव में सभी उम्मीदवारों के लिए अनिवार्य ₹1 लाख का बॉन्ड जमा करने के नियम के विरूद्ध ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की हैं। यह याचिका पिछले हफ्ते दायर की गई थी और इस पर आज यानी मंगलवार को सुनवाई होगी। मेना बाग में आयोजित हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में AISA नेताओं ने DU के इस नियम को “अलोकतांत्रिक, बहिष्करणकारी और भेदभावपूर्ण” बताया। उनका कहना है कि यह प्रावधान छात्र लोकतंत्र के खिलाफ है।
DU प्रशासन से छात्रों की नाराजगी
DU की छात्रा और AISA की कार्यकर्ता अंजलि ने कहा,इस सरकार में छात्र संगठनों पर हमला नया नहीं है। विश्विद्यालय पैसे और पावर पर नियंत्रण के नाम पर ऐसे अलोकतांत्रिक नियम लागू कर रही है, जो मध्यमवर्गीय और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को बाहर कर देता है। उन्होंने आगे कहा की मैं गया, बिहार के एक छोटे से गाँव से आती हूँ। अगर चुनाव लड़ने के लिए एक लाख का बॉन्ड चाहिए, तो हमारी जैसी आवाज़ें प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही खामोश हो जाती हैं।
हिंदू कॉलेज के छात्र अभिषेक कुमार ने भी इस विषय पर चिंता जताई। उन्होंने कहा मेरे पिता मजदूर थे और बाद में CRPF में भर्ती हुए। मैं समझता हूँ कि सामाजिक न्याय और सामान अवसर कितना ज़रूरी है। DUSU का असली उद्देश्य स्वतंत्र अभिव्यक्ति और सभी की भागीदारी है, न कि केवल पैसे वाले छात्रों को बढ़ावा देना।
DU द्वारा लिंगदोह समिति की सिफारिशों का उल्लंघन
AISA ने अपनी याचिका में कहा कि यूनिवर्सिटी द्वारा ₹1 लाख का बॉन्ड जमा करने का प्रावधान लिंगदोह समिति की सिफारिशों के खिलाफ है, जिसमें छात्र संघ चुनावों में कम खर्च और छात्रो की अधिकतम भागीदारी को प्राथमिकता देने की बात कही गई थी।
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निष्कर्ष
दिल्ली विश्विद्यालय के DUSU चुनावों में ₹1 लाख का बॉन्ड नियम छात्रों के बीच बड़ा विवाद बन चुका है। AISA का मानना है कि यह प्रावधान छात्र राजनीति में केवल आर्थिक रूप से सक्षम छात्रों को बढ़ावा देगा और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करेगा। अब सभी की नजरें दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो चुनाव में छात्रों के भविष्य की दिशा तय कर सकता है।



