तेजस्वी का “तेज” रोकना हो सकता है तेज का लक्ष्य

तेजस्वी का साथ देने के लिए बगावत का सुर रोहिणी ने भी शुरु कर दिया है। भले ही आगे चलकर वे तेज प्रताप का साथ न दें, लेकिन आमजन के बीच अपना एक तेजस्वी के विरोधी के रूप में छवि तो बना दी, जिसका असर राजद के कार्यकर्ताओं पर पड़ने की पूरी संभावना है। वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र राय की रिपोर्ट।

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पटना: मार्च 2012 उप्र की विधानसभा में समाजवादी पार्टी ने 224 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया था। इसके बाद मार्च के दूसरे सप्ताह में सपा विधायक दल की बैठक हुई, जिसमें सभी ने एक स्वर से मुलायम सिंह को सीएम की कुर्सी पर बैठाने की हामी भरी, लेकिन मुलायम सिंह ने अपने पुत्र अखिलेश यादव को सीएम की कुर्सी पर बैठाने के लिए कह दिया। फिर क्या था, बाहर से ज्यादा भीतर की ज्वाला धधकने लगी। जब अखिलेश ने 15 मार्च 2012 को सीएम के पद का शपथ लिया तो शिवपाल साथ तो थे, लेकिन उनका दिल ज्वाला में धधक रहा था। आखिर धधके भी क्यों न, जिस कुर्सी की चाहत मुलायम के बाद वे लगाकर बैठे थे, उस पर उनका भतीजा काबिज हो गया। आज कुछ ऐसा ही हो रहा है बिहार के राष्ट्रीय जनता दल में।
यदि यही स्थिति रही तो वैसे ही हालात बनेंगे, जैसे 2012 में पूर्ण बहुमत पाने वाली सपा घर के भीतर लगी आग में इतना झुलसी कि 224 सीट पाने वाली सपा 2017 में 47 पर आकर लटक गयी। इसके बाद लगातार नीचे की ओर ही लुढ़कती रही। पिछला लोकसभा चुनाव को छोड़ दिया जाय तो इससे पहले अखिलेश यादव के सभी प्रयोग फ्लाप सिद्ध हो रहे थे। इसके कई कारणों में एक प्रमुख कारण था, वे बाहर से ज्यादा भीतर की लड़ाई लड़ने में ही अपने समय को गवां देते थे।

सपा और राजद की मानसिकता एक, परिस्थिति भी है एक

उप्र की सपा और बिहार में राजद दोनों की मानसिकता, मतदाता और राजद का वर्तमान पारिवारिक विवाद एक सा है। इस कारण राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि स्थिति यही बनी रही तो इस बार राजद बाहर से नहीं, भीतर की लड़ाई में ही झुलस जाएगी। इसका कारण है कि तेजस्वी को हर कदम पर टिकट बंटवारे में भी यह तय करने में समय लगाना होगा कि पार्टी के भीतर भी बहन रोहिणी और भाई तेज प्रताप के लोगों को टिकट न मिले। भले ही कहीं वे जिताऊ हों, लेकिन उन्हें बैकफूट पर लाने का काम तेजस्वी करेंगे।

शिवपाल ने मुख्तार को पार्टी में किया था अखिलेश ने कर दिया था बाहर

उप्र में अखिलेश यादव ने भी यही किया था, जिसमें मुख्तार को एक दिन पहले शिवपाल यादव ने पार्टी में शामिल करने की घोषणा की तो दूसरे दिन ही अखिलेश यादव ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके बाद शिवपाल ने प्रचार कार्य से ही तौबा कर दिया था और 2017 के चुनाव में बहुत कम जगहों पर वे गये। खुद को प्रताड़ित महसूस करते रहे और अंदरूनी तोड़फोड़ की नीति में सक्रिय रहे।

कई माह से घर में उठ रहा था धुआं, अब आग बन गया

आज की स्थिति में बिहार के राजद में भी कुछ ऐसा ही चल रहा है। घर में यह धुआं छह माह पहले से उठ रहा था। शायद उम्र की ढलान के कारण लालू प्रसाद यादव इसे समझ नहीं पाये या सुलझाने में असमर्थ रहे। दो माह पहले ही तेज प्रताप ने तेजस्वी को आगाह करते हुए कहा था कि घर में विभीषण है, जो तेजस्वी को आगे नहीं बढ़ने देना चाहता। इसके कुछ दिन बाद ही तेज प्रताप का एक महिला के साथ फोटो वायरल हुआ और लालू ने अपने घर से निकाला कर दिया। इसके बाद भी तेजस्वी भीतर-भीतर ही राजनीति की गोटियां बिछाते रहे। समय-समय पर वक्तव्य देकर मीडिया में भी बने रहे और अंत में धीरे से नई राजनीतिक पार्टी की घोषणा कर दी।

तेज को तेजस्वी से लड़ना है चुनाव

उनके इस घोषणा और तेजस्वी के क्षेत्र में बढ़ी सक्रियता यह बताती है कि वे एनडीए से चुनाव लड़ने के लिए नहीं उतर रहे हैं। उनको तेजस्वी से चुनाव लड़ना है। भले ही उस चुनाव में वे कुछ न कर पायें, लेकिन यदि तेजस्वी को पीछे करने में वे कामयाब रहे तो आने वाले समय में उनकी राजनीतिक सफलता मानी जाएगी।

शिवपाल की पार्टी भी भले कुछ नहीं कर पायी, लेकिन सपा का तोड़ दिया था मनोबल

इसकी तुलना उप्र में सपा और शिवपाल की बगावत से करें तो शिवपाल ने सपा से बगावत कर अपनी पार्टी बनायी। उसमें सपा में शिवपाल के समर्थक भी शिवपाल के साथ नहीं आये। शिवपाल की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी उप्र में कुछ ज्यादा करने में असमर्थ रही, लेकिन वे अखिलेश का रास्ता रोकने में कामयाब रहे। आगे चलकर जैसे ही अखिलेश ने सुना कि शिवपाल भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं, वैसे ही शिवपाल के घर चले गये और उन्हें मनाने का काम किया।

बगावत में रोहिणी में शामिल

आज उसी तरह की स्थिति राजद में है। तेजस्वी का साथ देने के लिए बगावत का सुर रोहिणी ने भी शुरु कर दिया है। भले ही आगे चलकर वे तेज प्रताप का साथ न दें, लेकिन आमजन के बीच अपना एक तेजस्वी के विरोधी के रूप में छवि तो बना दी, जिसका असर राजद के कार्यकर्ताओं पर पड़ने की पूरी संभावना है

रोहिणी ने दे दी खुली चुनौती

अभी दो दिन पूर्व लालू प्रसाद के छोटे बेटे और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के समर्थकों के यह कहने पर कि बेटी रोहिणी आचार्य ने किडनी दान नहीं दी है, पर रोहिणी ने बड़ी चुनौती दे दी है। रोहिणी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, गंदी मानसिकता वाले लोगों और उनके संरक्षकों को खुली चुनौती है कि वे यह साबित कर दें कि मैंने किसी के लिए किसी से पक्षपात किया है और यह झूठ है कि मैंने पिता को किडनी दान नहीं की है तो मैं राजनीति और सार्वजनिक जीवन से संन्यास ले लूंगी।

तेज के पोस्टर से लालू व राबड़ी के फोटो भी हैं गायब

उधर तेज प्रताप यादव ने नई पार्टी का एलान कर दिया है। उन्होंने इसका एक पोस्टर भी जारी कर दिया है। सबसे बड़ी बात है कि इस पोस्टर से लालू यादव और राबड़ी देवी की तस्वीर गायब है। प्रदेश में सियासी सरगर्मी बढ़ाने वाली यह खबर सामने आते ही मीडिया की सुर्खी बन चुकी है। तेज प्रताप यादव ने अपनी नई पार्टी का पोस्टर जारी करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखी है।

राजनीतिक समीक्षकों ने कहा

इस संबंध में राजनीतिक समीक्षक राजीव रंजन सिंह का कहना है कि आजकल राजनीतिक भविष्यवाणियां सटिक नहीं हो रही। मतदाता भी चालाक है, लेकिन भूत को देखकर यही कहा जा सकता है कि तेजस्वी का पैर खिंचने के लिए तेज प्रताप काफी हैं। आने वाले चुनाव में तेजस्वी अंदरूनी कलह से जुझते नजर आएंगे। वहीं वरिष्ठ पत्रकार सुनील सिंह का कहना है कि निश्चय ही तेजस्वी को धक्का लगेगा और वे अंदरूनी कलह को निपटाने में ही आधा समय गवां देंगे, जो उनकी राजनीतिक धार को कमजोर करने का काम करेगी।

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

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