कांग्रेस का चल रहा ‘दलित सटाओ अभियान’!, महिलाओं पर भी ध्यान

बिहार में यादव और मुस्लिम पहले से राजद के साथ जुड़े हैं। कुर्मी और अन्य पिछड़े नीतीश के सहारे हैं, जबकि सवर्ण भाजपा की ओर देखते हैं। ऐसे में दलित की कई जातियों से कांग्रेस को आस है। इसी कारण कांग्रेस हर बात में दलितों की चर्चा कर रही है।

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पटना: पहले 17 अगस्त से एक सितम्बर तक राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा, उसमें वोटर अधिकार के नाम पर हर भाषण में गरीब और दलितों में भय पैदा करना। उन्हें यह एहसास कराना कि वोट का अधिकार नहीं तो फिर किसी भी अनुदान को पाने का अधिकार खो देना पड़ेगा। फिर 84 साल बाद बिहार में सीडब्ल्यूसी की बैठक, उसमें भी गरीब, दलित पर निशाना। बैठक में कहा गया कि निजीकरण के माध्यम से आरक्षण को खत्म करने का काम भाजपा कर रही है। इसके बाद महिलाओं को लुभाने पहुंची प्रियंका गांधी ने भी महिला के साथ ही गरीबों के प्रति अपने प्रेम को दर्शाया।

दलितों वोटर्स को लुभाने की कोशिश

इसको हम कांग्रेस की “दलित सटाओ अभियान” कह सकते हैं। प्रियंका गांधी ने भी बिहार की अपनी पहली चुनावी यात्रा में ही महिलाओं को भाजपा की नीतियों के खिलाफ जमकर भड़काने का काम किया। उन्होंने कहा कि भाजपा चुनाव के समय महिलाओं को दस हजार रुपये घूस देने का काम कर रही है। यह काम पांच साल क्यों नहीं किया गया। भाजपा महिलाओं से वोट चाहिए, उनके अधिकार को दिलाने का काम भाजपा नहीं कर सकती। इसके साथ ही उन्होंने अपनी सरकार बनने पर भूमिहीनों को पांच विस्वा जमीन देने की पेशकश कर उन्हें अपने पाले में लाने की कोशिश की।

कांग्रेस को दलितों में दिख रही आस

दरअसल, बिहार में सवर्णों का झुकाव भाजपा की तरफ, यादव पहले से ही राजद की तरफ हैं और कुर्मी व अन्य पिछड़ों का समर्थन लगभग नीतीश को रहता है। दलित वोट बैंक हम और पासवान के पास है, लेकिन दलित वर्ग की गोसाईं सहित कई ऐसी जातियां हैं, जो स्थाई रूप से किसी पार्टी के साथ नहीं जुड़ी हैं। उन्हें विशेष लालच देकर अन्यत्र सिफ्ट किया जा सकता है। ऐसे में कांग्रेस को जोर इस बार शुरू से है। यही कारण है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने भी दलित वर्ग के साथ कांग्रेस प्रेम को जोड़ा।

महिलाओं का एक बड़ा वर्ग नीतीश के साथ

महिलाओं का एक बड़ा वर्ग आज भी नीतीश का समर्थन करती है। इसका कारण शराब बंदी नहीं, नौकरियों में आरक्षण का विस्तार है। इससे बिहार में निश्चय ही महिलाएं समाज के उत्थान में काफी आगे आयी हैं। नीतिश काल से पूर्व बिहार की नौकरियों में महिलाओं की स्थिति नगण्य थी और वे चूल्हा-चौका तक ही सीमित थीं।

प्रियंका के सहारे महिलाओं को तोड़ने की कोशिश

अब कांग्रेस प्रियंका के सहारे इस कोशिश में है कि यदि महिलाओं का कुछ हिस्सा और दलित वर्ग को तोड़ लेते हैं तो इस बार बिहार में अपनी सीटें दोगुनी तक करने में सहुलियत हो जाएगी। अब यह कितना होगा, यह तो परिणाम आने के बाद ही बताया जा सकता है, लेकिन अभी फिलहाल कांग्रेस अपनी सीटों के बढ़ने की उम्मीद लगा के बैठी है।

राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक ने कहा

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा में राजनीति विज्ञान के सहायक प्राध्यापक डा. आलोक रंजन का कहना है कि कहीं भी आज जाति को राजनीति से अलग करना असंभव है। हालांकि, नेता का व्यवहार भी बहुत कुछ मायने रखता है। ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां नेता की जाति नहीं है और वे चुनाव हमेशा जीतते हैं, लेकिन राजनीतिक पार्टियां आजकल जाति से इतर सोच ही नहीं पाती हैं। इस कारण उनका जोर जाति आधारित है। उसमें भी एक पार्टी ऐसी है, जिसकी सोच धर्म आधारित है।

Sandeep Kumar

sandeepx4a@gmail.com

संदीप कुमार एक अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें समाचार जगत में 14 साल से ज्यादा काम किया है। इन्हें गहन शोध, सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए जाना जाता है। उन्होंने ETV Bharat, Hyderabad में साढ़े पाँच वर्षों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और राष्ट्रीय से लेकर क्षेत्रीय स्तर तक कई अहम खबरों को प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत किया। इसके साथ ही उन्होंने Network 10, TOTAL News, MH1 समेत कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी अपनी पत्रकारिता का कौशल साबित किया। राजनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, समाज और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर पकड़ मजबूत है। इस समय newG india में कार्यरत हैं।

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