बिहार चुनाव: बड़े भाई की भूमिका में भाजपा, कई विधायक होंगे आउट

बिहार चुनाव में भाजपा इस बार जेडीयू से कम सीटों पर समझौता नहीं करेगी। सिर्फ उसे नीतीश का चेहरा चाहिए, सीटें उससे अधिक लेगी। वहीं तीस प्रतिशत से अधिक अपने विधायकों का भी टिकट काटने जा रही है।

Share This Article:

पटना: बिहार में नीतीश कुमार भले ही गठबंधन का चेहरा बने रहेंगे, लेकिन भाजपा इस बार छोटे भाई की भूमिका में नहीं रहने वाली है। वह सीएम फेस नीतीश को बनाते हुए कुर्सी की चाभी अपने हाथ में रखेगी। सीटों के बंटवारे में भी भाजपा नीतीश से कम सीटें नहीं लेगी। इसका कारण है पिछले चुनाव में जीत का स्ट्राइक रेट। इसके लिए जेडीयू बहुत ज्यादा हंगामा भी नहीं करने वाली है, क्योंकि उसके पास भी अब बहुत ज्यादा आप्शन नहीं बचा है।इसके साथ ही भाजपा लगभग तीस प्रतिशत अपने सिटिंग विधायकों का टिकट काटने जा रही है।
जहां तक स्ट्राइक रेट का सवाल है पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 110 सीटों पर चुनाव लड़कर 74 सीटें जीती थीं। वहीं जेडीयू 115 सीटों पर लड़ने के बावजूद मात्र 43 सीट ही जीत पायी थी। भाजपा के जीत का स्ट्राइक रेट 67 प्रतिशत था, वहीं जेडीयू का स्ट्राइक रेट मात्र 37 प्रतिशत रहा। वहीं वीआईपी ने 11 सीटों पर चुनाव लड़कर चार सीटें जीती थी। इसका स्ट्राइक रेट 36 प्रतिशत था, जबकि हम ने सात सीटों पर ही चुनाव लड़कर चार सीटें जीत ली थीं। इसका स्ट्राइक रेट 57 प्रतिशत था।:

कई विधायकों ने दिल्ली में डेरा डाला

टिकट लेकर बिहार भाजपा में अंदरूनी जोड़-तोड़ भी शुरु हो गया है। कई विधायकों की दिल की धड़कने बढ़ी हुई हैं तो कई विधायक दिल्ली में डेरा डाल दिये हैं। वहीं कुछ विधायक पटना में पार्टी के प्रमुख लोगों के आगे-पीछे करते हुए देखे जा सकते हैं।

विधायकों का टिकट काटना भाजपा के लिए रहता फायदेमंद

पिछले चुनावों को भी देखे तो पार्टी ने अपने सिटिंग विधायकों का टिकट काटकर जन आक्रोश को कम करने का काम करती रही है। जिनका टिकट कटा उनमें अधिकांश जगहों पर भाजपा को जीत मिली। इसका सिस्टम को पार्टी आगे भी बनाये रखने में कोई गुरेज नहीं रखना चाहती। अब हर विधानसभा से सूची भी ऊपर पहुंच चुकी है। सर्वे का काम भी खत्म हो चुका है।

सूची पहुंच चुकी है ऊपर, अब हर विधानसभा से दो-दो नामों की हो रही छटनी

अब प्रदेश में अपने क्षेत्रों में सिर्फ दो-दो नामों तक सीमित करने का काम चल रहा है। ये दो नाम पार्टी अंतिम समय तक रखेगी और विपक्ष के उम्मीदवार के हिसाब से अपने उम्मीदवार के नाम का चयन करेगी। केंन्द्र सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान को प्रभारी और दो अन्य सह प्रभारी भी बना दिया है, जो अंदरूनी स्थिति का जायजा लेंगे।

जिन सीटों पर नहीं है संशय उनके नाम पहले हो जाएंगे तय

ये प्रभारी अंतिम समय तक पार्टी हाइकमान को संभावित उम्मीदवारों के प्रति स्थानीय कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया भेजने का भी काम करेंगे, जिससे पार्टी की यथावत स्थिति का जायजा अंत समय तक लगाया जा सके। इसमें भी कुछ सीटें ऐसी भी हैं, जिसे भाजपा अपना मानकर चल रही है। उस पर पहले ही नाम तय हो जाएंगे।

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

https://x.com/DjSanjayrai

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.