पटना। महागठबंधन समन्वय समिति के अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के दो सीटों से विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, उन्हें मधुबनी जिले की फुलपरास विधानसभा सीट से भी चुनाव लड़ने का प्रस्ताव मिला है। यह वही सीट है, जहां 1977 में तत्कालीन मुख्यमंत्री जननायक कर्पूरी ठाकुर ने जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था। तब उनके लिए देवेंद्र प्रसाद यादव ने सीट छोड़ी थी, जो बाद में विधान परिषद के सदस्य बने और झंझारपुर से कई बार लोकसभा सांसद रहे।
फुलपरास को समाजवादी विचारधारा के नेताओं के लिए सुरक्षित सीट माना जाता है। अब तक के 17 विधानसभा चुनावों में 10 बार यादव उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। कर्पूरी ठाकुर ने भी यहां से एक उपचुनाव में जीत दर्ज की थी। हालांकि, चार बार ही कांग्रेस को इस सीट पर सफलता मिली है।
आखिर फुलपरास ही क्यों?
पार्टी नेताओं का मानना है कि अगर तेजस्वी फुलपरास से चुनाव लड़ते हैं, तो इसका असर कोसी और सीमांचल की अन्य विधानसभा सीटों पर पड़ेगा। इससे महागठबंधन के कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ेगा। आपको बता दें, इस साल जनवरी में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने फुलपरास में कर्पूरी ठाकुर की जन्म जयंती पर एक बड़ा समारोह आयोजित किया था, जिसमें तेजस्वी शामिल हुए थे। उस दौरान स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनसे इस सीट से चुनाव लड़ने का आग्रह किया था। हालांकि, तेजस्वी ने अभी तक इस प्रस्ताव पर न तो सहमति दी है और न ही इंकार किया है।
पहले भी दो सीटों से लड़े हैं नेता
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव भी एक से अधिक विधानसभा और लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ चुके हैं। हाल ही में राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा का ठहराव भी फुलपरास में हुआ था, जिसने इस सीट की राजनीतिक अहमियत को और बढ़ा दिया। 2020 के विधानसभा चुनाव में यह सीट कांग्रेस के हिस्से में थी, जहां उसके उम्मीदवार कृपानाथ पाठक दूसरे स्थान पर रहे थे।
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दो सीटों से लड़ने पर भ्रम की आशंका
कुछ नेताओं का मानना है कि अगर तेजस्वी अपनी परंपरागत सीट राघोपुर के अलावा फुलपरास से भी चुनाव लड़ते हैं, तो इससे मतदाताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। महागठबंधन में अभी तक इस बात पर सहमति नहीं बन पाई है कि फुलपरास सीट किस दल के हिस्से जाएगी। कांग्रेस इस सीट पर अपना दावा ठोक रही है, जबकि राजद भी इसे लेने पर अड़ा हुआ है। यदि तेजस्वी यहां से चुनाव लड़ने को तैयार हो जाते हैं, तो यह सीट निर्विवाद रूप से राजद को मिल जाएगी।



