नई दिल्ली: बिहार की सियासी बिसात पर 2025 का चुनावी खेल शुरू हो चुका है, और टिकट की चाह ने नेताओं को परेशान कर दिया है। कोई पटना में समर्थकों का जुलूस लेकर “हमारा टिकट पक्का” का नारा बुलंद कर रहा है, तो कोई दिल्ली में आलाकमान की कोठी और भाजपा मुख्यालय का चक्कर लगा रहा है। 6 और 11 नवंबर को होने वाले मतदान से पहले बेटिकट होने का डर विधायकों को रातों की नींद हराम किए हुए है।
नेता को टिकट कटने का डर सता रहा
एनडीए हो या महागठबंधन, हर विधायक के दिल में एक ही सवाल “टिकट मिलेगा कि सियासत का सपना टूटेगा?” भाजपा ने दर्जनों सीटों पर सर्वे कराया, जिसमें 15-20 विधायकों की कुर्सी पर खतरे की घंटी बज रही है। जेडीयू भी कम नहीं, उनके 10-12 विधायकों के “पार्टी सर्वे” ने रातों की नींद उड़ा दी है। इस बीच गठबंधनों में सीट बंटवारे को लेकर सियासी संग्राम मचा हुआ है। जेडीयू को 102-104, भाजपा को 100-102, चिराग पासवान की एलजेपी (पी) को 20-25, जीतन राम मांझी की एचएएम को 5-7, और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम को 3-5 सीटें मिलने की चर्चा है। लेकिन बेगूसराय, सीवान, और मधुबनी जैसी सीटों पर खींचतान ने माहौल को “बिग बॉस के घर” सा बना दिया है!
उम्मीदवार मुख्यालय और आलाकमान की कोठी का लगा रहे चक्कर
पटना में एक विधायक अपने 100 समर्थकों के साथ जेडीयू दफ्तर के बाहर “हमारा नेता कैसा हो, टिकट वाला वैसा हो” का नारा लगाते देखे गए। वहीं कई नेता दिल्ली में आलाकमान के दफ्तर और पार्टी मुख्यालय में हाजिरी दे रहे हैं। कोई पुरानी दोस्ती का वास्ता दे रहा है, तो कोई ‘2020 में मेरी मेहनत’ का ढोल पीट रहा है।” एक विधायक ने तो हद कर दी। उन्होंने अपने क्षेत्र की सड़क और नाली की तस्वीरें व्हाट्सएप पर साझा कहा “ये देखिए, मेरी मेहनत! टिकट तो बनता है!” लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बार शीर्ष नेतृत्व का “युवा चेहरों” और “महिलाओं ” को ज्यादा मौका देने की रणनीति बनाई है। जिसने पुराने नेताओं की टेंशन बढ़ा दी है।
सीट बंटवारे को लेकर फंसा है पेंच
महागठबंधन में भी सियासी उठापठक चल रही है। आरजेडी और कांग्रेस के विधायक अपने आलाकमान को मनाने के लिए दिल्ली-पटना को एक किए हुए हैं। एक कांग्रेसी नेता ने दिल्ली में मुख्यालय का इतना चक्कर काटे कि ऑफिस कर्मचारियों ने मजाक में तंज कहा कि नेता जी आप तो अब हमारे मोहल्ले के लगने लगे हैं। इस बीच जन सुराज के सभी 243 सीटों पर चुलाव लड़ने के ऐलान ने माहौल को और दिलचस्प बना दिया है। एक विधायक ने तंज कसते हुए कहा, “टिकट मिले न मिले, ये जन सुराज वाले हमारा वोट जरूर काट लेंगे। फिर जनता बोलेगी ‘नेता जी, घर जाओ!
टिकट नहीं मिला तो निर्दल ताल ठोकेंगे
सूत्रों का कहना है कि इस बार दोनों गठबंधन में करीब 10 से 15 विधायकों को टिकट कटने का डर सता रहा है। कुछ नेता तो बागी बनने की धमकी दे रहे हैं, कह रहे हैं, टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय चुनाव मैदान में ताल ठोकेंगे। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि ये नेता लोग टिकट के लिए इतना ड्रामा कर रहे हैं, अगर इतनी मेहनत क्षेत्र में की होती, तो आज ये नौबत नहीं आती।
14 नवंबर को नतीजे आएंगे, लेकिन तब तक बिहार की जनता इस सियासी “कॉमेडी सर्कस” का मजा ले रही है। कोई टिकट पक्का करने के लिए ठेकुआ भेज रहा है, तो कोई समर्थकों का जुलूस निकाल रहा है। सवाल ये हैं क्या ये सियासी सूरमा अपनी कुर्सी बचा पाएंगे, या बिहार की जनता फिर से “नए चेहरों” को मौका देगी?



