नई दिल्ली: पश्चिमी राजस्थान (Rajasthan) की जीवन रेखा कहे जाने वाले जवाई बांध नहर के किनारे अब परंपरागत डिग्गियों का निर्माण होगा, ताकि बारिश के मौसम में नहर से बहने वाले लाखों लीटर पानी को व्यर्थ होने से बचाया जा सके। राजस्थान सरकार ने इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए डिग्गी निर्माण के लिए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का निर्णय लिया है। यह पहल न केवल जल संकट से जूझ रहे इस क्षेत्र के लिए वरदान साबित होगी, बल्कि स्थानीय समुदायों को पेयजल और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने में भी मददगार होगी।
पश्चिमी राजस्थान में असामान्य बारिश का दौर
पिछले कुछ वर्षों से पश्चिमी राजस्थान में सामान्य से कहीं अधिक बारिश दर्ज की जा रही है। इस साल 9 सितंबर 2025 तक, जहां सामान्य रूप से 265.6 मिलीमीटर बारिश होती है, वहां 474.4 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है, जो सामान्य से 79% अधिक है। बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर, जालोर, चूरू, हनुमानगढ़, नागौर, पाली और श्रीगंगानगर जैसे जिलों में यह बारिश जल संचय के लिए सुनहरा अवसर प्रदान करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जवाई बांध से जोधपुर तक 140 किलोमीटर लंबी नहर के किनारे डिग्गी निर्माण से पाली और जोधपुर के सैकड़ों गांवों को लाभ मिलेगा।
डिग्गी निर्माण से पानी की बर्बादी पर लगाम
जवाई बांध नहर सुमेरपुर से जोधपुर तक पानी पहुंचाती है, लेकिन मानसून के दौरान यह नहर अक्सर अतिप्रवाह (ओवरफ्लो) की स्थिति में आ जाती है, जिससे लाखों लीटर पानी बेकार चला जाता है। इस पानी को संचय करने के लिए सरकार ने नहर के किनारे परंपरागत डिग्गियों के निर्माण की योजना बनाई है। इन डिग्गियों में 1,000 मिलियन क्यूबिक फीट (एमसीएफटी) पानी संचय करने का लक्ष्य है, जो पाली जिले की 20 लाख से अधिक आबादी की चार महीने की पेयजल आवश्यकता को पूरा कर सकता है। इसके अतिरिक्त, गांवों के तालाबों और छोटे बांधों को भी इस पानी से भरा जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर पेयजल और सिंचाई की जरूरतें पूरी हो सकेंगी।
भूजल स्तर में सुधार की उम्मीद
डिग्गी निर्माण का एक बड़ा लाभ यह होगा कि इसके आसपास के कुएं और जलाशय रिचार्ज होंगे, जिससे भूजल स्तर में सुधार होगा। पाली जिले के सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता रामनारायण चौधरी ने बताया, “हम जवाई नहर के लिए डीपीआर तैयार कर रहे हैं। यह परियोजना न केवल पानी की बर्बादी रोकेगी, बल्कि स्थानीय जलाशयों और कुओं को रिचार्ज करने में भी मदद करेगी।” सरकार ने इस परियोजना के लिए प्रारंभिक तौर पर 90 लाख रुपये की मंजूरी दी है।
परंपरागत जल संचय की वापसी
पश्चिमी राजस्थान में जल संचय की परंपरागत विधियां जैसे डिग्गी, तालाब और बावड़ी सदियों से उपयोग में रही हैं। साल 2023 में, बिना किसी सरकारी सहायता के, दस जिलों के सैकड़ों ग्रामीणों ने इन विधियों के माध्यम से चार महीने से लेकर डेढ़ साल तक के लिए पेयजल और खेती के लिए पानी संचय किया था। बाड़मेर में जल संचय पर लंबे समय से काम कर रहे विशेषज्ञ धरम सिंह कहते हैं, राज्य सरकार का यह कदम स्वागतयोग्य है। यदि परंपरागत जल संचय प्रणालियों को बढ़ावा दिया जाए, तो यह रेगिस्तानी क्षेत्र पानी की कमी से निजात पा सकता है।
भविष्य की उम्मीद
जवाई बांध नहर के किनारे डिग्गी निर्माण की यह पहल न केवल पानी की बर्बादी को रोकेगी, बल्कि पश्चिमी राजस्थान के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में जल उपलब्धता को बढ़ाएगी। यह परियोजना स्थानीय समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने और भूजल स्तर को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही, यह परंपरागत जल संचय विधियों को पुनर्जनन देगी, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विरासत का हिस्सा हैं। यह कदम न केवल आज की जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी जल सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।



