नई दिल्ली। ब्राजील के बाजारों में बिकने वाले रंग-बिरंगे प्लास्टिक खिलौनों के पीछे एक गंभीर खतरा छिपा है, जो बच्चों के भविष्य को प्रभावित कर सकता है। साओ पाउलो यूनिवर्सिटी (USP) और अल्फेनेस फेडरल यूनिवर्सिटी (UNIFAL) के विशेषज्ञों ने 70 ऐसे खिलौनों की गहन जांच की, जिसमें स्थानीय निर्मित और विदेशी आयात वाले दोनों शामिल थे। यह ब्राजील में बच्चों के सामान में रसायनों के जोखिमों पर अब तक का सबसे विस्तृत सर्वे माना जा रहा है। शोध का केंद्र बिंदु था। क्या इन खिलौनों में विषैले तत्व हैं, और उनकी मात्रा सुरक्षा मानकों को पार कर रही है या नहीं। जांच में इन तत्वों की मौजूदगी और उनके स्तर का सटीक आकलन किया गया।
शोध के चौंकाने वाले आंकड़े: विषैले तत्वों की भरमार
‘एक्सपोजर एंड हेल्थ’ जर्नल में छपी इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि करीब 44 प्रतिशत खिलौनों में बेरियम (Ba) का स्तर तय सीमा से कहीं ऊपर था कुछ मामलों में 15 गुना तक। बेरियम का लंबा संपर्क बच्चों के दिल की धड़कन बिगाड़ सकता है या नसों को कमजोर कर पक्षाघात जैसी परेशानियां पैदा कर सकता है। इसी तरह, 33 प्रतिशत खिलौनों में सीसा (Pb) की मात्रा चिंताजनक थी, जो अधिकतम चार गुना तक अतिरिक्त पाई गई। सीसा बच्चों की दिमागी क्षमता को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकता है, जिसमें याददाश्त कमजोर होना और आईक्यू लेवल गिरना शामिल है।
क्रोमियम का असुरक्षित स्तर
20 प्रतिशत मामलों में क्रोमियम (Cr) का असुरक्षित स्तर मिला, जो कैंसर का खतरा बढ़ाता है। वहीं, 24 प्रतिशत खिलौनों में एंटिमनी (Sb) ज्यादा था, जो पेट दर्द और डाइजेस्टिव दिक्कतों का सबब बन सकता है। इसके अलावा, 21 अन्य घातक तत्व भी पकड़े गए, जैसे चांदी (Ag), एल्यूमिनियम (Al), आर्सेनिक (As), बेरिलियम (Be), कैडमियम (Cd), सेरियम (Ce), कोबाल्ट (Co), तांबा (Cu), पारा (Hg), लैंथेनम (La), मैंगनीज (Mn), निकल (Ni), रुबिडियम (Rb), सेलेनियम (Se), थैलियम (Tl), यूरेनियम (U) और जिंक (Zn)। ये तत्व खासकर तब खतरनाक साबित होते हैं, जब बच्चे इन्हें चबाते या मुंह में डालते हैं।
लार और एसिड से टेस्ट
शोधकर्ताओं ने अत्याधुनिक इंडक्टिवली कपल्ड प्लाज्मा मास स्पेक्ट्रोमेट्री (ICP-MS) मशीन का सहारा लिया, जो सूक्ष्म स्तर पर धातुओं का पता लगा सकती है। साथ ही, माइक्रोवेव आधारित एसिड ब्रेकडाउन विधि से यह जांचा गया कि बच्चों की लार या पेट के एसिड से कितना जहर रिस सकता है। नतीजे बताते हैं कि कुल तत्वों का महज 0.11 से 7.33 प्रतिशत ही शरीर में घुस सकता है। लेकिन चूंकि मूल मात्रा ही इतनी ज्यादा है, इसलिए खतरा कम नहीं आंका जा सकता।
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कहां से आ रहा खतरा?
विशेषज्ञों ने दिलचस्प लिंक भी ढूंढे। निकल, कोबाल्ट और मैंगनीज जैसे तत्वों में समानता मिली, जो एक ही स्रोत से बने खिलौनों की ओर इशारा करती है। इसके अलावा, बेज या हल्के रंग वाले खिलौनों में धातुओं की सांद्रता ज्यादा पाई गई। शायद पेंट सप्लायर्स की वजह से। ये निष्कर्ष न सिर्फ जोखिम बताते हैं, बल्कि फैक्टरियों और आयातकों पर सख्ती के लिए क्लू भी देते हैं। पिछले अध्ययनों में भी हार्मोन बिगाड़ने वाले केमिकल्स जैसे बिसफेनॉल, पैराबेंस और फ्थैलेट्स की मौजूदगी सामने आई थी, जो साबित करता है कि समस्या गहरी है।
क्या करें बचाव के लिए?
- ये रसायन बच्चों के नर्वस सिस्टम, हार्ट और गट को निशाना बना सकते हैं। शोधकर्ताओं की सलाह है:
- खिलौनों की नियमित लैब चेकिंग अनिवार्य हो।
- हर उत्पाद पर ट्रैकिंग कोड लगे, ताकि स्रोत पता चले।
- आयात वाले सामान के लिए सख्त सर्टिफिकेट सिस्टम लागू हो।



