पटना: पटना हाईकोर्ट ने बुधवार को बिहार कांग्रेस द्वारा पोस्ट किए गए AI-जनरेटेड वीडियो को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने का निर्देश दिया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत माँ हीराबेन मोदी दिखाई दे रही हैं। अदालत ने मध्यस्थों को निर्देश दिया कि यदि वीडियो अभी भी प्रसारित हो रहा है तो उसे “केएस पुट्टस्वामी”, “नालसा फाउंडेशन”, “सुब्रमण्यम स्वामी” आदि जैसे सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों के आलोक में प्रसारित होने से रोकें, जिनमें कहा गया कि निजता और सम्मान का अधिकार व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हिस्सा हैं। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश पीबी बजंथरी और जस्टिस आलोक कुमार सिन्हा की खंडपीठ ने विवेकानंद सिंह नामक व्यक्ति द्वारा दायर जनहित याचिका पर यह आदेश पारित किया, जिसमें वीडियो हटाने की मांग की गई।
कोर्ट ने राहुल गांधी, चुनाव आयोग, मेटा, गूगल, एक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश पीबी बाज़ंथ्री की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता विवेकानंद सिंह की लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त आदेश परित किया है।
याचिकाकर्ता की दलील है कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म और ऑनलाइन पोर्टलों के जरिए पीएम मोदी और उनकी माता के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित की जा रही है। याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता संतोष कुमार, संजय अग्रवाल और प्रवीण कुमार ने अदालत ने अनुरोध किया साथ ही संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया है कि सभी पोर्टलों से ऐसी सामग्रियों का प्रसार तत्काल रोका जाए और उन्हें हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
याचिकाकर्ता के वरीय अधिवक्ता संतोष कुमार ने दलील दी कि सुनियोजित तरीके से प्रधानमंत्री और उनकी माता को निशाना बनाकर फर्जी व अपमानजनक टिप्पणियां ऑनलाइन फैलाई जा रही हैं। कोर्ट ने इस पर गंभीर रुख अपनाते हुए केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है।



