नई दिल्ली: दिल्ली की जहरीली हवा अब देश की ऐतिहासिक धरोहरों को भी अपनी चपेट में ले रही है। लाल किला, जो मुगल सम्राट शाहजहां द्वारा 17वीं सदी में निर्मित एक शानदार स्मारक है, प्रदूषण (Pollution) के कारण धीरे-धीरे अपनी चमक और संरचना खो रहा है। हाल ही में किए गए एक शोध में खुलासा हुआ है कि किले की दीवारों पर जमा हो रही काली परतें इसके लाल बलुआ पत्थर को नुकसान पहुंचा रही हैं। यह अध्ययन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की, आईआईटी कानपुर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और इटली के का फॉस्करी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
काली परतों का खतरा
शोध में पाया गया कि लाल किले की दीवारों पर काली परतें जमा हो रही हैं, जो पत्थर की सतह को खराब कर रही हैं। ये परतें विशेष रूप से उन क्षेत्रों में अधिक दिखाई देती हैं, जहां वाहनों का आवागमन ज्यादा है। वैज्ञानिकों ने किले के विभिन्न हिस्सों, जैसे जफर महल, से लिए गए नमूनों का विश्लेषण किया। परिणामों से पता चला कि इन परतों में जिप्सम, बेसानाइट और भारी धातुएं जैसे सीसा, जस्ता और तांबा मौजूद हैं। ये तत्व वाहनों के धुएं, औद्योगिक उत्सर्जन और निर्माण गतिविधियों से उत्पन्न होते हैं। इन परतों की मोटाई 0.05 मिमी से 0.5 मिमी तक है, जो किले की नाजुक नक्काशियों को मिटाने और संरचना को कमजोर करने में सक्षम है।
दिल्ली की हवा और धरोहर पर असर
अध्ययन के आंकड़ों के अनुसार, 2021 से 2023 तक दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक रहा। हवा में मौजूद पीएम2.5 और पीएम10 कण राष्ट्रीय मानकों से क्रमशः ढाई और तीन गुना अधिक पाए गए। नाइट्रोजन डाइऑक्साइड की मात्रा भी चिंताजनक स्तर पर थी, हालांकि सल्फर डाइऑक्साइड और अमोनिया की मात्रा नियंत्रण में रही। यह प्रदूषण लाल किले की दीवारों को नष्ट कर रहा है और इसकी ऐतिहासिक सुंदरता को खतरे में डाल रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल अपूरणीय क्षति का शिकार हो सकता है।
समाधान के लिए सुझाव
शोधकर्ताओं ने लाल किले को बचाने के लिए कई उपाय सुझाए हैं। इनमें नियमित सफाई, पत्थरों पर सुरक्षात्मक कोटिंग लगाना और प्रदूषण नियंत्रण के लिए कड़े नियम लागू करना शामिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली में वाहनों और औद्योगिक उत्सर्जन को कम करने के लिए ठोस नीतियां बनाना जरूरी है। साथ ही, किले की संरचना को और नुकसान से बचाने के लिए समय-समय पर वैज्ञानिक निगरानी और रखरखाव की आवश्यकता है।
लाल किले का गौरवशाली इतिहास
लाल किला मुगल सम्राट शाहजहां ने 1638 में दिल्ली को अपनी राजधानी बनाने के बाद बनवाया था। इसका निर्माण 1639 में शुरू हुआ और 1648 में पूरा हुआ। यह किला अपनी भव्य वास्तुकला के लिए जाना जाता है, जिसमें फारसी, तैमूरी और भारतीय शैलियों का अनूठा संगम देखने को मिलता है। 2007 में यूनेस्को द्वारा इसे विश्व धरोहर घोषित किया गया। हालांकि, आज यह किला दिल्ली की व्यस्त सड़कों और प्रदूषित हवा के बीच घिरा हुआ है। पहले यमुना नदी के किनारे बने इस किले को अब वाहनों के धुएं और शहरीकरण का सामना करना पड़ रहा है।
भविष्य के लिए चेतावनी
लाल किला न केवल भारत की ऐतिहासिक धरोहर है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक है। यदि प्रदूषण के खिलाफ प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियां इस अनमोल धरोहर को खो सकती हैं। यह समय है कि सरकार, पुरातत्व विभाग और नागरिक मिलकर इस स्मारक को बचाने के लिए ठोस कदम उठाएं।



