नई दिल्ली: दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल के सामने रिंग रोड पर बना कचरा ढेर अब खत्म होने वाला है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने सख्ती दिखाते हुए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को आदेश दिया है कि इस ढलाव को छह महीने के अंदर पूरी तरह बंद कर दें। यह फैसला एम्स के गेट नंबर 6 के पास 70 मीटर दूर बने इस कचरा स्टोर पर लिया गया, जो मेडिकल और घरेलू कचरे से प्रदूषण फैला रहा था। एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और स्पेशल मेंबर डॉ. ए. सेंथिल वेल ने साउथ एक्सटेंशन के रहने वाले सुदेश प्रकाश सब्बरवाल की शिकायत पर यह सुनवाई की।
यह ढलाव एम्स जैसे बड़े हॉस्पिटल के ठीक सामने था, जहां रोजाना मरीजों की भारी भीड़ लगती है। कचरे के ढेर से बदबू, मक्खियां और हवा में जहर फैल रहा था। दिल्ली प्रदूषण कंट्रोल कमिटी (डीपीसीसी) और सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) ने भी जांच में पाया कि यहां कचरा प्रबंधन के नियम टूटे हुए थे। दोनों ने ही इसे बंद करने की सलाह दी थी। एनजीटी ने कहा कि यह न सिर्फ हवा को गंदा कर रहा है, बल्कि आसपास के इलाकों में बीमारियां भी फैला सकता है। अदालत ने एमसीडी को साफ निर्देश दिए हैं। पहले तो छह महीने में यह ढलाव हटा दें और कचरा इकट्ठा करने व ले जाने के लिए नई जगह ढूंढें, जो लोगों को परेशान न करे। तब तक एमसीडी को सीपीसीबी के नियमों का सख्ती से पालन करना पड़ेगा। इनमें कचरे को ढकना, बदबू रोकना, गंदा पानी साफ करना, आग से बचाव और आसपास पेड़ लगाना जैसे कदम शामिल हैं। डीपीसीसी को हर हफ्ते चेक करना होगा और अगर नियम न माने जाएं, तो तुरंत कार्रवाई करनी होगी, चाहे सुधार हो या जुर्माना।
कैसे शुरू हुई यह लड़ाई?
यह मामला कुछ महीने पुराना है। सुदेश सब्बरवाल ने एनजीटी में शिकायत की थी कि एम्स के गेट 6 के सामने 30 मीटर के इलाके में कचरा फेंका जा रहा है। इससे हवा खराब हो रही है और एम्स के मरीजों व स्टाफ को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। एनजीटी ने तब केंद्र सरकार और एमसीडी को नोटिस भेजा था। सुनवाई में पाया गया कि खुले में कचरा डालना प्रदूषण कानूनों का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह ढेर एम्स के आसपास के इलाके को जहर की तरह बदल रहा है, जहां बच्चे, बूढ़े और मरीज रहते हैं।
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फैसला दिल्ली के लिए एक बड़ा संदेश
एनजीटी का यह फैसला दिल्ली के लिए एक बड़ा संदेश है। शहर में कचरा प्रबंधन की समस्या सालों से जूझ रही है। एमसीडी पर दबाव बढ़ा है कि अब साफ-सफाई को प्राथमिकता दें। अगर एमसीडी ने समय पर अमल न किया, तो कोर्ट और सजा दे सकता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे ढलाव बंद करने से न सिर्फ हवा साफ होगी, बल्कि इलाके की सेहत भी सुधरेगी। सुदेश सब्बरवाल जैसे आम नागरिकों की आवाज ने साबित कर दिया कि शिकायत से बदलाव आ सकता है। अब सवाल यह है कि एमसीडी कितनी जल्दी नई व्यवस्था कर पाएगी? क्या यह कदम दिल्ली के दूसरे इलाकों में भी कचरा समस्या हल करेगा? फिलहाल, एम्स के आसपास के लोग राहत की सांस ले रहे हैं। लेकिन साफ-सफाई के लिए सबको मिलकर काम करना होगा, निगम हो या नागरिक।



