मोतिहारी: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की कर्मभूमि बिहार में उन्हीं के वंशज को बदसलूकी का सामना करना पड़ा। उन्हें एक सभा में अपमान का घूंट पीना पड़ा। दरअसल, बापू के प्रपौत्र तुषार गांधी मोतिहारी के तुरकौलिया पंचायत भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में लोगों को संबोधित कर रहे थे। आरोप है कि वह देश में बढ़ते उन्माद, बिहार और सरकार के नीतियों के विरोध में अपना पक्ष रख रहे थे। इसी दौरान मुखिया विनय कुमार ने इसका विरोध किया। इस बात पर काफी हंगामा हो गया। कहासुनी के दौरान उन्हें कार्यक्रम छोड़कर वापस जाने को बोल दिया गया।
इस दौरान कई स्थानीय लोगों ने मुखिया को समझाने की कोशिश भी की, लेकिन विवाद नहीं रुका। चर्चा है कि तुषार गांधी के साथ चल रहे एक सहयोगी ने जैसे ही नीतीश सरकार बदलने की बात कही, मुखिया विनय साह भड़क गए और इसका विरोध करने लगे। इस पर तुषार गांधी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमें बदतमीज तक कहा गया और अपमानित किया गया है, लेकिन हम इससे डरने वाले नहीं हैं। बिहार में बदलाव के लिए हमारी यात्रा जारी रहेगी।
घटना का वीडियो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें देखा जा सकता है कि मुखिया विनय कुमार साह महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी को बोलते व निकालते नजर आ रहे है। वीडियो वायरल होते ही घटना के बाद इलाके में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गई है। यह मामला पूर्वी चम्पारण के तुरकौलिया प्रखंड स्थित पंचायत भवन कहा जहां एक कार्यक्रम तुषार गांधी 13 जुलाई को भितिहरवा आश्रम से पदयात्रा आयोजित किया गया था। इस दौरान एक टिप्पणी को लेकर स्थानीय मुखिया विनय कुमार साह ने तुषार गांधी को कार्यक्रम से बाहर जाने को कह दिया।
तुषार गांधी ने 13 जुलाई से पदयात्रा शुरू की है
तुषार गांधी 13 जुलाई को भितिहरवा आश्रम से पदयात्रा शुरू हुई है। यह यात्रा महात्मा गांधी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने और सामाजिक समरसता का संदेश देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इसी यात्रा के क्रम में वे रविवार को तुरकौलिया पहुंचे थे। वहां उन्होंने गांधी जी से जुड़े ऐतिहासिक नीम के पेड़ का भ्रमण किया। पंचायत भवन में आयोजित सभा के दौरान तुषार गांधी के एक सहयोगी ने नीतीश सरकार को लेकर तीखी टिप्पणी कर दी थी। इस पर मुखिया विनय साह भडक़ गए।
विनय साह ने गुस्से में तुषार गांधी पर तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें पंचायत भवन से बाहर निकलने को कह दिया। स्थानीय लोगों ने समझाने की कोशिश कि टिप्पणी तुषार गांधी ने नहीं, उनके सहयोगी ने की थी। लेकिन मुखिया अपनी बात पर अड़े रहे।
इस दौरान दोनों पक्षों में तीखी बहस भी हुई। स्थिति बिगड़ती देख तुषार ने कार्यक्रम बीच में ही छोड़ कर वहां से निकल गए। बापू की धरती पर उनके वंशज के साथ इस तरह का व्यवहार दुर्भाग्यपूर्ण है। जब वे मोतिहारी के नविवक पुस्तकालय में प्रेस वार्ता किया तो उन्होंने कहा कि जब अग्रेजों का शासन था तो गांधी जी को भी अग्रेजों ने रोका था। इसी तरह हमें भी रोक गया है।



