पटना। बिहार में गठबंधन की अनिश्चितता ने महागठबंधन की चिंता को बढ़ा दिया है। स्थिति यह है कि प्रदेश के 12 सीटों पर महागठबंधन के उम्मीदवारों को एनडीए के उम्मीदवार के साथ-साथ अपने गठबंधन के उम्मीदवार से भी लड़ना पड़ेगा। इससे बड़े नेताओं के उन सीटों पर दौरा करने और अपने उम्मीदवार का प्रचार में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में गठबंधन की राजनीति में एनडीए महागठबंधन की अपेक्षा बढ़त बनाते हुए दिख रहा है। इनमें छह सीटों पर आरजेडी और कांग्रेस के उम्मीदवारों ने पर्चा भरा है। वहीं, चार सीटों पर सीपीआई बनाम कांग्रेस की लड़ाई देखने को मिलेगी। दो सीटों पर वीआईपी बनाम आरजेडी की घमासान होगा।
इन सीटों पर कांग्रेस और राजद आमने-सामने
वैशाली में राजद प्रत्याशी अजय कुशवाहा और कांग्रेस के संजीव कुमार आमने-सामने हैं। सिंकदरा में कांग्रेस प्रत्याशी विनोद चौधरी और राजद के उदय नारायण चौधरी ने नामांकन किया है। कहगांव से कांग्रेस प्रत्याशी प्रवीण कुशवाहा और राजद प्रत्याशी रजनीश आनंद, सुलतानगंज से कांग्रेस के ललन यादव और राजद के चंदन सिंहा, नरकटियागंज सीट से कांग्रेस प्रत्याशी शाश्वत केदार पांडे और राजद प्रत्याशी दीपक यादव और वारसलीगंज सीट से कांग्रेस प्रत्याशी मंटन सिंह और राजद प्रत्याशी अनीता देवी आमने-सामने होंगी।
सीपीआई और कांग्रेस के बीच लड़ाई
बंछवारा सीट से सीपीआई प्रत्याशी अवधेश कुमार राय और कांग्रेस के शिव प्रकाश गरीबदास आमने-सामने होंगे। राजापाकर से सीपीआई प्रत्याशी मोहित पासवान और कांग्रेस के प्रतिमा दास आमने सामने होंगे। बिहार शरीफ सीट से सीपीआई प्रत्याशी शिव कुमार यादव और कांग्रेस के उमेर खान, करगहर सीट से सीपीआई प्रत्याशी महेंद्र गुप्ता और कांग्रेस प्रत्याशी संतोष मिश्रा के बीच लड़ाई है।
VIP और राजद के बीच घमासान
इसके अलावा विकासशील इंसान पार्टी और राजद के बीच भी दो सीटों पर सीधा मुकाबला है। चैनपुर से वीआईपी प्रत्याशी बाल गोविंद बिंद और राजद प्रत्याशी बृजकिशोर बिना आमने-सामने हैं। बाबूबरही सीट से वीआईपी के बिंदु गुलाब यादव और राजद प्रत्याशी अरूण कुशवाहा के बीच टक्कर होगी।
यह भी पढ़ें: मुजफ्फरपुर: मंच से गरजे CM नीतीश, पहले था ‘जंगलराज’, अब है ‘कानूनराज’
बिहार के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पहली दफा में तो एनडीए इस तरह से महागठबंधन पर हावी हो गया है, जहां एक-एक सीट के लिए मारामारी है, वहां 12 सीटों पर आपस में ही महागठबंधन के उम्मीदवार लड़ रहे हैं। ऐसे में महागठबंधन के नेताओं को अपनी साझा रणनीति बनाने में भी हर कदम पर दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।



