पटना: भागलपुर की बेटी माधवी मधुकर अद्भुत प्रतिभा की धनी हैं। आदि शंकराचार्य रचित संस्कृत भाषा में स्तोत्रों को गाकर देश-दुनिया को रोमांचित किया है। माधवी मधुकर की गायन शैली न केवल भीड़ से अलग है बल्कि इंसान को ईश्वर और संस्कृति से साक्षात्कार भी करवाती हैं। साथ ही संस्कृत गायन से ये विश्व भर में परचम लहरा रही हैं। देश की प्रसिद्ध संस्कृत या यूं कहें कि इनकी देववाणी की गायकी हैं। इन्हें भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ओर से कई कार्यक्रम में प्रस्तुति का भी अवसर मिला है।
संस्कृत में बचपने से ही दिलचस्पी
बचपन से ही माधवी को संगीत में रूचि थी। भागलपुर में रहते हुए दादा- दादी, माता-पिता और परिवार के सदस्यों के साथ सावन महीने में और नवरात्रि के दौरान रामायण, महाभारत, दुर्गा चालीसा गाती थीं। घर से ही गायन सीखा है। सुर को संवारने के लिए गुरू कौशलेश पाठक से भारतीय क्लासिकल संगीत में शिक्षा ली है। उसके बाद मैंथली, अंगिका में गाने लगीं। कंठ में साक्षात सरस्वती का वास होने के कारण उसकी गाई गाने को लोग बड़े चाव से सुनने लगे। इससे माधवी की हिम्मत बढ़ती गई और आज किसी पहचान की वह माेहताज नहीं रही है।
वह बताती हैं कि संस्कृत में गाना सुनने से श्रोता अपने आप को सकारात्मक ऊर्जा से भर लेते हैं, संस्कृत में जितने भी गाना हैं। सभी में प्रभु की छाप है, जिस वजह से लोग जब भी सुनते हैं तो भक्ति भाव से सुनते हैं। यही वजह है कि लोग एनर्जेटिक फील करने लगते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। संस्कृत में गाना सुनने से कभी नकारात्मकता आपके अंदर नहीं आती है।
भाषा प्राचीन, अशुद्धियां होने का भी रहता डर
माधवी ने कहा कि संस्कृत दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा है। यह देववाणी भी है। फिर भी, यह भाषा विलुप्ति के कगार पर है। संस्कृत के गाने को नया आयाम देने के लिए ही मैं संस्कृत भाषा में गाना शुरू किया। संस्कृत गानों में भी भविष्य है। इस भाषा में कम लोग गाते हैं। यहां चुनौती कम है। माधवी कहती हैं कि दक्षिण भारत में सबसे अधिक लोग संस्कृति भाषा को पसंद करते हैं, लेकिन उत्तर भारत में कम लोग सुनते हैं। वह बताती हैं कि हिंदी, मैथिली, भोजपुरी गाने को श्रोता आसानी से समझ जाते हैं लेकिन संस्कृत को नहीं समझ सकते हैं। इसलिए कम लोग सुनते हैं, लेकिन हम अपने संस्कृत के गाने में सब टाइटल हिंदी और इंग्लिश दोनों में डालते हैं, जिससे की लोगों को समझ में आए। सभी श्लोक का सार भी हम लिखते हैं।
संस्कृत बहुत ही प्राचीन भाषा है, इसमें अशुद्धियां होने का डर भी है। वह इसलिए कि संस्कृत भाषा के जो शब्द हैं, वह काफी टफ है और मैं जब गाती हूं तो मुझे भी डर लगता रहता है कि मुझसे भी कोई अशुद्धियां ना हो जाएं, लेकिन बचपन से ही जो हमने परिवार के माहौल में रहकर सीखा है वो मुझे काम आ जाता है। बचपन से ही संस्कृत में पली और बढ़ी हूं, पढ़ाई में मुझे संस्कृत में 100 में से 75 से 80 प्रतिशत नंबर मिलता था।
रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में किया परफाॅर्म
राम लला की प्राण प्रतिष्ठा में माधवी ने संस्कृत बैंड मधुरम वृंद के साथ गायन कला की प्रस्तुति दी। इस दौरान दर्शक दीर्घा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल के साथ कई विशिष्ट मेहमान उपस्थित थे। माधवी मधुकर के मुताबिक, संस्कृत और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए संस्कृत बैंड मधुरम वृंद की स्थापना 2019 में की और अब तो करोड़ों लोग सुन रहे हैं। विश्व में स्तोत्र सीख रहे और गा भी रहे हैं।
वह कहती हैं कि देश की प्रसिद्ध लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने माधवी मधुकर के संस्कृत भजनों की खूब सराहना की। उन्होंने कहा कि माधवी को स्वरों की अच्छी जानकारी है। आज के समय में संस्कृत भजन, मंत्र व स्तोत्र का सरस्वर गाने वाले गायक-गायिका काफी कम हैं। माधवी ने अपनी संस्कृति की रक्षा की है। मालिनी ने माधवी को कहा कि अपने गौरवशाली अतीत की रक्षा करना।
मध्य प्रदेश में संस्कृत गायन की देतीं शिक्षा
माधवी बताती हैं कि मध्य प्रदेश में वे निशुल्क संस्कृत गायन की विद्या सिखाती हैं। मध्य प्रदेश में सबसे अधिक बार हुए लाइव शो कर चुकी हैं। उन्होंने दुख जाते हुए बताया कि बिहार-झारखंड मेरा घर है, लेकिन वे दूसरी बार ही लाईव शो करने जा रही हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में पर्यटन विभाग पहली बार सोनपुर मेला में मौका मिला और दूसरी बार श्रावणी ने मिला के दौरान सुलतानागंज उत्तर वाहिनी गंगा तट स्थित अजगैबीनाथ धाम में मौका मिला है। उन्होंने कहा कि मुझे पहली बार अपने लोगों के बीच गाने का मौका मिला है। मैं काफी गौरवान्वित महसूस कर रही हूं और उत्साहित हूं।
माधवी ने आगे बताया कि अब तक उन्हें बॉलीवुड से कोई ऑफर नहीं मिला है, लेकिन वह बॉलीवुड की ओर जाना भी नहीं चाहती है। आगे माधवी ने कहा कि सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ धाम पर गाना गाने जा रही हैं, जिसको लेकर अपने टीम के सदस्यों के साथ बातचीत कर रही है जल्द ही हुए उसे गाने को लॉन्च करेंगी।
मायका भागलपुर के सबौर व ससुराल डांडे गांव में
माधवी मधुकर झा गोड्डा शास्त्री नगर के रहने वाले सुभाषचंद्र झा की पुत्र बधु हैं। सुभाषचंद्र झा पोड़ैयाहाट के डांड़े गांव के रहने वाले हैं। माधवी अपने इंजीनियर पति पीयूष झा के साथ नोएडा में रहती हैं। उनका मायका भागलपुर के सबौर में है। सबौर के उमेश्वर नगर के रहने वाले किशोर झा और मां संयुक्ता झा की पुत्री है। माधवी की शिक्षा भागलपुर में हुई है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा माउंट एसएससी से हुई और एसएम कॉलेज से साइंस में ग्रेजुएशन की है। एक भाई- बहन में माधवी बड़ी हैं।
वह गोवर्धन मठ शंकराचार्य पूरी स्वामी निश्चलानंद सरस्वती और पद्मविभूषण रामभद्राचार्य की शिष्या हैं। दूरदर्शन और आकाशवाणी पर माधवी के स्तोत्र प्रसारित होते रहा है। अभी हाल में काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट ने मंदिर परिसर में माधवी मधुकर की प्रस्तुति हुई थी।
यूट्यूब पर भी धूम
संस्कृत भाषा में रचित स्तोत्रों को स्वरबद्ध करके जनजन तक पहुंचाई है। उत्तर एवं पूर्व भारत की प्रथम विशिष्ट स्तोत्र गायिका, जिन्होंने विगत 8 वर्षों से भारतीय परंपरा, भक्ति और वैदिक चेतना को संगीत के माध्यम से जाग्रत की है।
6 वर्ष पूर्व इन्होंने अपना YouTube चैनल प्रारंभ किया, इसके चैनल पर अब तक लगभग 50 करोड़ से अधिक बार स्तोत्र सुने जा चुके हैं। अब तक 150 अधिक संस्कृत हिंदी मैथिली में गाना गा चुकी है। हर महीने करीब 1.4 करोड़ श्रोता उनके स्तोत्रों के माध्यम से आत्मिक शांति एवं आध्यात्मिक जागृति का अनुभव करते हैं। इसमें सबसे ज्यादा श्रोता भारत व नेपाल के बाद अमेरिका तीसरे नंबर पर है।
कोरोना के समय कृष्णाष्टकम् और रोग नाशक मंत्र काफी वायरल हुआ था। सोशल साइट पर इसके गीत की लोकप्रियता को देखते हुए यू ट्यूब मई 2021 में सिल्वर बटन प्रदान करने वाली है। इधर शौमिक सेन के निर्देशन में बनी फिल्म गुलाबी गैंग में भी माधवी ने प्ले बैक सिंगर के रूप में काम की है। वे आगे बताती है कि पंचायत वेब सीरीज 3 में मेरी मैथिली में गाये हुए गाने को लिया गया है। उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में संस्कृत भाषा का प्रचार प्रसार करने की जरूरत है, जो मैं कर रही हूं।
इस वक्त वह मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग तथा एकात्मधाम के सहयोग से विद्यार्थियों, शंकरदूतों, साधकों को स्तोत्र गायन एवं उसके भावार्थ का प्रशिक्षण प्रदान कर रही हैं। कुछ विद्यालयों में भी यह शिक्षण नियमित रूप से संचालित हो रहा है।
- विशेष बातचीत: संजीत कुमार



