नई दिल्ली। दिल्ली के LG वी.के. सक्सेना ने दिल्ली फायर सर्विस के असिस्टेंट डिविजनल अफसर छुट्टन लाल मीणा के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उपराज्यपाल ने विजिलेंस विभाग को कहा है कि मीणा के खिलाफ सीसीएस (सीसीए) नियम, 1965 के नियम 14 के तहत मेजर पेनाल्टी की कार्यवाही हो। विजिलेंस विभाग ने इससे पहले नियम 16 के तहत माइनर पेनल्टी प्रस्तावित की थी, जिसे एलजी के तरफ से खारिज कर दिया गया।
जानिए पूरा मामला क्या है?
छुट्टन लाल मीणा ने 3 अगस्त 2022 और 25 अक्टूबर 2022 को आजादपुर में स्थित आकाश सिनेमा सह कमर्शियल काम्प्लेक्स का निरीक्षण किया। रिपोर्ट में उन्होंने कहा कि साइट पर 4 पैसेंजर लिफ्ट है। इस रिपोर्ट के आधार पर 1 नवंबर 2022 को दिल्ली फायर सर्विस ने फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी कर दिया। हालांकि बाद में पीएमओ, गृह मंत्रालय, केंद्रीय सतर्कता आयोग को कई शिकायतें मिली, जिसमें आरोप लगाया गया कि फर्जी और जाली फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी हुआ है। 24 जनवरी 2023 को श्रम विभाग की ओर से सहायक विद्युत् निरीक्षक ने निरीक्षण किया। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि साइट पर कोई पैसेंजर लिफ्ट नहीं है।
शुरू हो विभागीय कार्यवाही
जांच के बाद छुट्टन लाल मीणा पर नियम 16 के तहत मामूली दंड लगा। मीणा ने इसके खिलाफ एलजी के समक्ष अपील दयार की। अपील पर सुनवाई हुई, जिसमें यह पाया गया कि 25 अक्टूबर 2022 की निरीक्षण रिपोर्ट का उचित संज्ञान नहीं लिया गया था। मामला नागरिकों से जुड़ा होने के कारण एलजी ने विजिलेंस विभाग को निर्देश दिया कि नियम 16 के तहत नहीं बल्कि नियम 14 के तहत मेजर पेनाल्टी लगाकर विभागीय कार्यवाही शुरू हो।
निदेशक भी रडार पर
एलजी वी.के. सक्सेना की तरफ से यह भी कहा गया कि 1 नवंबर 2022 को फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट दिल्ली फायर सर्विस के तत्कालीन निदेशक अतुल गर्ग ने जारी किया था। 24 जनवरी 2023 की रिपोर्ट के बाद भी न तो प्रमाणपत्र की समीक्षा की गई और न ही उसका निरस्तीकरण किया गया। इसे लेकर एलजी सक्सेना ने विजिलेंस विभाग को निर्देश दिया है कि रिटायर निदेशक अतुल गर्ग की भूमिका और संभावित कदाचार की भी जांच की जाए। साथ ही आवश्यक होने पर सीसीएस (सीसीए) नियम, 1965 और सीसीएस (पेंशन) नियम, 2021 के तहत मेजर पेनल्टी की कार्यवाही पर विचार हो।



