नई दिल्ली | इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में रिलायंस जियो ने भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वाकांक्षी खाका पेश किया है। कंपनी ने अपने ‘जियो एआई स्टैक’ की घोषणा करते हुए इसे एक ‘सॉवरेन’ यानी संप्रभु एआई इकोसिस्टम के रूप में पेश किया है। इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी निर्भरता को कम करना और भारत की विशाल डेटा क्षमता का लाभ उठाना है।
ग्रीन एनर्जी और विशाल कंप्यूटिंग क्षमता
जियो एआई स्टैक की सबसे बड़ी विशेषता इसके गीगावॉट स्तर के ग्रीन डेटा सेंटर हैं। कंपनी के अनुसार, ये डेटा सेंटर पूरी तरह से 100 प्रतिशत वीकरणीय ऊर्जा से संचालित होंगे। यह न केवल भारत की एआई क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि पर्यावरण के प्रति स्थिरता को भी सुनिश्चित करेगा।
भाषाई बाधाओं को तोड़ेगा ‘जियो एआई’
कंपनी ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि भारत की विविधता को देखते हुए एआई केवल अंग्रेजी तक सीमित नहीं रह सकता। जियो एआई स्टैक के तहत:
- बहुभाषी इंटेलिजेंस लेयर: भारतीय भाषाओं पर आधारित डेटा फाउंडेशन तैयार किया जा रहा है।
- वॉयस एआई और एजेंटिक प्लेटफॉर्म: उपयोगकर्ता अपनी स्थानीय भाषा में सहजता से एआई के साथ बातचीत कर सकेंगे।
- स्थानीय समाधान: स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और छोटे व्यवसायों के लिए कस्टमाइज्ड एआई एप्लिकेशन विकसित किए जा रहे हैं।
हर भारतीय के लिए सुलभ और किफायती एआई
जियो इंटेलिजेंस द्वारा विकसित किया जा रहा यह स्टैक केवल बड़े कॉर्पोरेट के लिए नहीं, बल्कि आम जनता और सरकारी संगठनों के लिए भी किफायती बनाया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा संप्रभुता और ऊर्जा दक्षता पर जियो का यह फोकस आने वाले समय में भारत के आर्थिक विकास में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।



