नालंदा: बिहार के नालंदा जिले में चार साल पहले एक दिल दहला देने वाली घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया था। LIC अधिकारी प्रवीण कृष्ण, जो दिल्ली में अपनी ड्यूटी निभा रहे थे, अपनी पुश्तैनी जमीन पर आए एक विवाद की भेंट चढ़ गए। 20 फरवरी 2021 को बिहार शरीफ के झिंगनगर मोहल्ले में जमीन पर जबरन मंदिर निर्माण को लेकर शुरू हुआ विवाद उस समय खूनी संघर्ष में बदल गया, जब लोजपा नेता और पूर्व विधानसभा प्रत्याशी छोटेलाल यादव सहित अन्य आरोपियों ने प्रवीण पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया। प्रवीण को बचाने आए उनके भाइयों पर भी हमला हुआ, लेकिन प्रवीण इस बेरहम पिटाई को सहन न कर सके। इलाज के लिए बिहार शरीफ ले जाते समय रास्ते में ही उनकी सांसें थम गईं। इस घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया था। जिसे देखकर रूह कंपा जाती थी।
प्रवीण के परिवार के लिए यह नुकसान केवल एक बेटे, भाई या पिता का नहीं था, बल्कि उनके सपनों और मेहनत से बनी जिंदगी का अंत था। तीन भाई, जो जिले से बाहर रहकर मेहनत से अपने परिवार का भविष्य संवार रहे थे, उस दिन अपने ही गांव में बेबस हो गए। आरोपियों की नजर प्रवीण की निजी जमीन पर थी, और बिना इजाजत मंदिर निर्माण की उनकी जिद ने एक निर्दोष की जान ले ली थी।
चार साल तक चले लंबे कानूनी संघर्ष के बाद, आखिरकार प्रवीण के परिवार को इंसाफ मिला। बिहारशरीफ की स्थानीय व्यवहार न्यायालय में जिला एवं सत्र न्यायाधीश-प्रथम संजीव कुमार सिंह ने छोटेलाल यादव, भूषण यादव, लाला यादव, वीरमणि यादव, पप्पू कुमार और मनोज कुमार को हत्या समेत अन्य धाराओं में उम्रकैद की सजा सुनाई। प्रत्येक दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया, जिसे न चुकाने पर छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इसके अलावा, अन्य धाराओं में पांच साल और दो साल की कठोर कारावास की सजा भी दी गई। सभी आरोपित बिहार थाना क्षेत्र के झींगनगर मोहल्ला निवासी हैं।
प्रवीण की हत्या के इस मामले में आठ गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे। उनके बयान और सीसीटीवी फुटेज ने सच्चाई को उजागर करने में अहम भूमिका निभाई। एपीपी एसएम असलम ने बताया कि यह मामला सिर्फ एक हत्या का नहीं, बल्कि लालच और दबंगई का भी था। प्रवीण का परिवार आज भी उस दर्द को भूल नहीं पाया, जब उनके अपने को सिर्फ इसलिए खो दिया, क्योंकि उन्होंने अपनी जमीन पर हक जताया।
यह फैसला प्रवीण के परिवार के लिए राहत की सांस तो लाया, लेकिन उनके दिल में बेटे की कमी का दर्द कभी कम नहीं होगा। प्रवीण की यादें, उनकी मेहनत और सपने आज भी उनके परिवार के साथ जीवित हैं। यह सजा उन सभी के लिए एक सबक है, जो कानून को ताक पर रखकर निर्दोषों की जिंदगी छीन लेते हैं। प्रवीण को इंसाफ मिला, लेकिन उनकी हंसी, उनका साथ, और उनकी मौजूदगी को कोई लौटा नहीं सकता।



