नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में कम छात्र संख्या वाले सरकारी प्राइमरी स्कूलों के विलय (school merger) को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि न कोई स्कूल स्थायी रूप से बंद किया जा रहा है, न ही किसी शिक्षक या कर्मचारी की पोस्ट खत्म की जाएगी।यह बयान प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह ने लखनऊ के लोक भवन में 31 जुलाई को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया। उन्होंने कहा, “लगभग 10,000 स्कूलों की पहचान जोड़ी (pairing) के लिए की गई है, लेकिन कोई भी स्कूल स्थायी रूप से मर्ज नहीं किया गया है। अगर छात्रों की संख्या बढ़ती है या सीटें कम पड़ती हैं, तो पहले की तरह कक्षाएं उसी पुराने भवन में फिर से शुरू कर दी जाएंगी। साथ ही UDISE कोड भी पहले जैसा ही रहेगा।
क्या है स्कूल जोड़ीकरण की योजना?
उत्तर प्रदेश सरकार ने जुलाई 2025 की शुरुआत में यह योजना बनाई थी कि जिन प्राथमिक स्कूलों में 50 से कम छात्र नामांकित हैं, उन्हें पास के सरकारी स्कूलों में जोड़ा (merge) किया जाएगा, ताकि शैक्षिक संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके और बच्चों को अधिक गुणवत्ता वाली शिक्षा मिल सके।प्रेस कांफ्रेस में संदीप सिंह ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य बच्चों को बेहतर शैक्षिक वातावरण देना है, क्योंकि कम नामांकन वाले स्कूलों में अक्सर समूह गतिविधियां, खेल और सहपाठी इंटरैक्शन जैसी जरूरी चीजें नहीं हो पातीं।
क्यों हुआ था विरोध?
इस निर्णय के बाद सरकार को तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा, विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों के शिक्षक संगठनों, राजनीतिक दलों और अभिभावकों की ओर से। विरोध के मुख्य कारण थे:
- बच्चों को दूर के स्कूलों में भेजना, खासकर 1 किमी से अधिक दूरी होने पर।
- स्कूल बंद होने की आशंका से स्थानीय पहचान और सुविधा खत्म होने का डर।
- नौकरियों पर खतरे की आशंका, खासकर रसोइयों और सहायक स्टाफ की।
1 किलोमीटर से अधिक दूर नहीं होगा मर्ज स्कूल
मंत्री ने सभी सवालो पर पूर्णविराम लगते हुए कहा, जो स्कूल मर्ज किए गए हैं, उनकी दूरी छात्रों के घरों से 1 किलोमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। अगर किसी भी छात्र को असुविधा होती है या दूरी अधिक है, तो उस स्थिति में उस स्कूल को फिर से पहले जैसा किया जाएगा।उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत कुल 1,32,886 स्कूल हैं और सभी स्कूल पूरी तरह से चालू रहेंगे।
पोस्ट कटौती नहीं, नई भर्तियों का भी संकेत
नौकरी जाने की आशंकाओं पर उन्होंने जोर देते हुए कहा, किसी भी स्वीकृत पद को खत्म नहीं किया जा रहा है। प्रधानाध्यापक, शिक्षक और रसोइयों की सभी भूमिकाएं यथावत रहेंगी। यहां तक कि 50 छात्रों तक के स्कूलों में 3 शिक्षक अनिवार्य होंगे। आवश्यकता पड़ी तो नए शिक्षकों की नियुक्ति भी की जाएगी।
विपक्ष का हमला और सरकार की सफाई
इस मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर हमला करते हुए कहा कि यह फैसला विपक्ष के दबाव और जनता के विरोध के कारण वापस लेना पड़ा। उन्होंने ‘PDA पाठशाला आंदोलन’ की जीत बताते हुए इसे भाजपा की नैतिक हार करार दिया।
निष्कर्ष
स्कूल मर्जर पर जारी विवाद के बीच सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह निर्णय स्थायी नहीं है, और छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लचीलापन रखा जाएगा। मंत्री संदीप सिंह के अनुसार, यह योजना बच्चों को समृद्ध और समावेशी शिक्षा देने की दिशा में एक ठोस कदम है।हालांकि, विपक्ष इसे गरीबों के अधिकारों पर हमला बता रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जमीनी स्तर पर इसका क्रियान्वयन कैसे होता है।



