नई दिल्ली: बिहार की जोकीहाट विधानसभा सीट पर इस वक्त सबकी नजरें हैं। वैसे तो पूरे राज्य में यानी 243 सीटों पर ही इस बार कांटे की लड़ाई है लेकिन जोकीहाट की टक्कर सबसे अलग है। यहां दो सगे भाई आमने-सामने हैं। इसके साथ ही तीन पूर्व मंत्री यहां चुनावी ताल ठोक रहे हैं। साथ में पिछली बार इस सीट को जीतने वाली AIMIM भी बड़े दावेदार के रूप में चुनावी मैदान में है। इस बीच चलिए आपको बताते हैं कि जोकीहाट के इस चतुष्कोणीय मुकाबले में कौन आगे रह सकता है… जोकीहाट का किंग कौन बनेगा?
इन उम्मीदवारों पर भरोसा
सबसे पहले उम्मीदवारों के बारे में जान लेते हैं… जोकीहाट सीट पर राजद ने वर्तमान विधायक शाहनवाज आलम को टिकट दिया है। शाहनवाज पिछली बार AIMIM के टिकट पर इस सीट से जीते थे, हालांकि बाद में उन्होंने RJD ज्वाइन कर ली थी। शाहनवाज के सामने उनके बड़े भाई सरफराज आलम हैं, उन्हें जन सुराज ने अपना उम्मीदवार बनाया है। सरफराज चार बार जोकीहाट से विधायक रह चुके हैं। दो बार आरजेडी के टिकट से और दो बार जेडीयू के टिकट पर। इसके साथ ही सरफराज लोकसभा के सांसद भी रह चुके हैं।
जदयू ने पुराने नेता को उतारा
सत्ताधारी पार्टी जेडीयू ने जोकीहाट से अपने पुराने नेता मंजर आलम को उतारा है। मंजर 2005 में इस सीट पर जीत हासिल कर चुके हैं। वो नीतीश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। इसके अलावा असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने मुर्शीद आलम को जोकीहाट से अपना कैंडिडेट बनाया है। मुर्शीद कई बार मुखिया रह चुके हैं। उनकी पत्नी भी मुखिया हैं।
क्या कहता है पिछ्ला चुनाव
इन चारों उम्मीदवारों ने जोकीहाट की लड़ाई को बहुत ही दिलचस्प बना दिया है। पिछली चुनाव की बात करें तो उसमें AIMIM के उम्मीदवार शाहनवाज आलम ने 7 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की थी। शाहनवाज को जहां 59 हजार 500 वोट मिले थे, वहीं उनके प्रतिद्वंदी सरफराज आलम, जो उनके बड़े भाई भी है, उन्हें 52 हजार के करीब वोट मिले थे। सरफराज आरजेडी के टिकट पर चुनावी मैदान में थे। 2020 के चुनाव में ये सीट एनडीए के सीट बंटवारे में बीजेपी के खाते में गई थी। भाजपा ने यहां से रंजीत यादव को मैदान में उतारा था, उन्हें 48 हजार से ज्यादा वोट मिले थे।
जोकीहाट में टफ फाइट
कुल मिलाकर पिछली बार मुकाबला त्रिकोणीय था, आरजेडी, AIMIM और बीजेपी के बीच में। वहीं इस बार जनसुराज भी टक्कर में मानी जा रही है। सियासी विश्लेषकों की मानें तो जोकीहाट में शाहनवाज और सरफराज की लड़ाई में AIMIM के लिए संभावना बन सकती है। क्योंकि दोनों भाईयों को पारिवारिक जनाधार वाले वोट बंट सकते हैं। इसके अलावा मंजर आलम के लिए भी संभावना बन सकती है, ऐसा कुछ लोगों का कहना है। मोटा-माटी बात करें तो इस बार जोकीहाट में हार-जीत का अंतर 5 हजार से कम रह सकता है। चारों प्रमुख उम्मीदवार ठीक-ठाक जनाधार वाले हैं। ऐसे में ये सीट किसी के भी खाते में जा सकती है।



