नई दिल्ली: हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) की हसीन वादियां इन दिनों प्रकृति के गुस्से का शिकार बनी हुई हैं। पिछले दो दिनों में हुई मूसलाधार बारिश ने कुल्लू और मनाली जैसे इलाकों में तबाही मचा दी है। सड़कें जगह-जगह धंस गईं, पुल बह गए और लैंडस्लाइड ने सब कुछ उथल-पुथल कर दिया। राज्य में करीब 700 से ज्यादा सड़कें बंद हैं, जिसमें तीन प्रमुख हाईवे शामिल हैं। हजारों पर्यटक और स्थानीय लोग फंस गए हैं, जबकि किसानों की फसलें बर्बाद होने की कगार पर हैं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और बारिश की चेतावनी दी है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है।
कुल्लू-मनाली में सबसे ज्यादा नुकसान, हाईवे बुरी तरह क्षतिग्रस्त
कुल्लू और मनाली के बीच की सड़कें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। चंडीगढ़ से मनाली जाने वाला मुख्य फोरलेन हाईवे कई जगहों पर टूट चुका है, जहां लैंडस्लाइड ने बड़े-बड़े बोल्डर गिरा दिए हैं। मनाली की तरफ जाने वाली रोड पर ब्यास नदी का पानी सीधे सड़क पर बह रहा है, जिससे कई दुकानें और रेस्टोरेंट नदी में समा गए। बाहंग इलाके में तो पूरा का पूरा बाजार बह गया, जबकि सोलंग घाटी और अन्य नालों के पास टोल प्लाजा भी क्षतिग्रस्त हो गए। अधिकारियों के मुताबिक, मंडी जिले में अकेले 300 से ज्यादा सड़कें बंद हैं, और कुल्लू में 130 से अधिक रोड ट्रैफिक के लिए अनफिट हैं। इस आपदा का असर सिर्फ लोकल ट्रैफिक पर नहीं पड़ा, बल्कि लेह-लद्दाख जाने वाली लाइफलाइन रोड भी पूरी तरह बंद हो गई है। यह हाईवे सेना की सप्लाई के लिए बेहद अहम है, खासकर सर्दियों की तैयारियों के लिए। अगर यह लंबे समय तक बंद रहा तो उत्तर भारत की सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
फंसे हुए यात्री और किसानों की मुश्किलें बढ़ीं
बारिश के कारण 5 हजार से ज्यादा वाहन अलग-अलग जगहों पर अटके पड़े हैं। मंडी से कुल्लू का सफर, जो आमतौर पर एक घंटे में पूरा होता है, अब 20-24 घंटे लग रहे हैं। कई यात्री रातें खुले आसमान तले गुजार रहे हैं, जहां भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है। लोकल लोग मदद के लिए आगे आए हैं और लंगर चला रहे हैं, लेकिन ट्रक ड्राइवरों और कैब वालों की हालत सबसे खराब है। उनके पास न तो सामान छोड़कर जाने का रास्ता है और न ही कई दिनों तक रुकने के लिए राशन। किसान भी बुरी तरह प्रभावित हैं। लाहौल-स्पीति से आने वाली सब्जियां जैसे मटर और गोभी की खेप रोड पर फंसी हुई है। अगर जल्दी नहीं निकली तो सब कुछ सड़ जाएगा, जिससे लाखों का नुकसान होगा। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि मानवजनित समस्या है। सड़कों का निर्माण बिना सोचे-समझे किया जा रहा है, जहां ब्लास्टिंग और मशीनों से पहाड़ कमजोर हो रहे हैं। साथ ही, जंगलों की कटाई ने पर्यावरण का संतुलन बिगाड़ दिया है।
रिकॉर्ड तोड़ बारिश, मौसम विभाग की चेतावनी
इस साल हिमाचल में औसत से 29% ज्यादा बारिश हो चुकी है। जून से अगस्त तक कई जिलों में 1000 मिमी से ऊपर पानी बरसा है। मंडी में 1477 मिमी (62% अतिरिक्त), कुल्लू में 761 मिमी (77% अतिरिक्त) और कांगड़ा में 1508 मिमी (13% अतिरिक्त) दर्ज किया गया। पिछले हफ्ते तो कुल्लू में 330% ज्यादा बारिश हुई, जबकि चंबा और बिलासपुर में 300% से ऊपर। पिछले 24 घंटों में चंबा में 1779% और कुल्लू में 1624% अतिरिक्त वर्षा हुई। मौसम विभाग ने चंबा और कांगड़ा के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, जबकि मंडी और कुल्लू में ऑरेंज अलर्ट है। बाकी जिलों में येलो अलर्ट है, मतलब आने वाले दिनों में और भारी बारिश का खतरा है।
विधानसभा में हंगामा, सरकार पर सवाल
यह मुद्दा हिमाचल विधानसभा के मानसून सेशन में भी गूंजा। विपक्ष ने आपदाओं और क्लाइमेट चेंज पर चर्चा की मांग की, लेकिन जब सरकार ने तुरंत सहमति नहीं दिखाई तो विधायक नारेबाजी करते हुए वॉकआउट कर गए। बाद में सदन में बहस हुई, जहां विधायकों ने हाईवे प्रोजेक्ट्स में लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने सुझाव दिया कि राहत फंड का इस्तेमाल सिर्फ तुरंत मदद पर न हो, बल्कि वैज्ञानिक रिसर्च और लॉन्ग-टर्म प्लानिंग पर भी किया जाए। तभी ऐसी आपदाओं से निपटा जा सकेगा। अगर आप हिमाचल की यात्रा प्लान कर रहे हैं, तो फिलहाल कुल्लू, मनाली, धर्मशाला और मंडी जैसे इलाकों से दूर रहें। मौसम साफ होने तक इंतजार करें और लोकल न्यूज चेक करते रहें। यह आपदा हमें याद दिलाती है कि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन कितना जरूरी है।



