सागर। सागर जिले से चिकित्सा व्यवस्था को लेकर एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि बंडा सिविल अस्पताल में कथित मेडिकल लापरवाही के कारण 19 महीने के एक मासूम बच्चे की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
बंडा सिविल अस्पताल में हुआ कथित घटनाक्रम
जानकारी के अनुसार, भूसा कमलपुर गांव निवासी इंद्रज विश्वकर्मा अपने 19 महीने के बेटे को सर्दी, खांसी और आंखों में हल्की लाली की शिकायत होने पर बंडा सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे थे। वहां ड्यूटी पर मौजूद शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. हिमांशु वर्मा ने बच्चे की जांच कर आई ड्रॉप, पैरासीटामोल और अन्य दवाएं लिखीं।
परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान अस्पताल के स्टाफ ने बच्चे की आंखों में निर्धारित आई ड्रॉप की जगह बलगम साफ करने वाली दवा डाल दी। इसके तुरंत बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ने लगी। पहले उसे सागर जिला अस्पताल और बाद में भोपाल एम्स रेफर किया गया। परिजनों का दावा है कि वहां डॉक्टरों ने बताया कि गलत दवा के गंभीर रिएक्शन के कारण बच्चे की आंखों की रोशनी चली गई।
अब तक की कार्रवाई
पीड़ित पिता ने बंडा पुलिस थाने में ड्यूटी डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है। वहीं, सागर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है और सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग अपने-अपने स्तर पर मामले की जांच कर रहे हैं।
पहले भी हुई है लापरवाही
सागर जिले के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में हाल के दिनों में कथित चिकित्सीय लापरवाही के अन्य मामले भी सामने आए हैं। कुछ समय पहले बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में एक मरीज की मौत के मामले में भी जांच के आदेश दिए गए थे। ताजा घटना के बाद जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, इस मामले में अंतिम फैसला जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।



