नालंदा/पटना: बिहार विधानसभा आम चुनाव 2025 के पहले चरण में होने वाले चुनाव के अंतिम दिन सियासी पार्टियों ने पूरी ताक़त झोंक दी है. इसी कड़ी में आज बिहारशरीफ के धनेश्वर घाट स्थित कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने आयोजित प्रेसवार्ता में केंद्र और राज्य सरकार पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि बिहार इस बार “करवट लेने” वाला राज्य है, जिसका असर देश पर भी पड़ेगा.
बिहार के लोग नाराज
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मुंह से जो कटुता और बदजुबानी सुनने को मिली, वह बिहार के मतदाताओं को नागवार गई है और इससे लोगों में नाराज़गी बढ़ रही है. खेड़ा ने प्रेसवार्ता में कहा कि केंद्र में एनडीए की सरकार 11 साल से है, और बिहार में भी एनडीए का शासन है, मगर दिखाने के लिए कुछ नहीं है और बताने के लिए कुछ नहीं है. इसलिए नेताओं की भाषा अक्सर तीखी हो जाती है. उन्होंने कहा कि राजनीति में वादे बहुत हो रहे हैं। कहीं 10-10 हजार खाते में आने की बातें हो रही हैं, तो कहीं CAG की रिपोर्ट जैसे बड़े सवाल अनसुलझा छोड़ दिए जा रहे हैं।
नफरत की बीज बो रहे
पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री के खिलाफ सीधे संवाद करते हुए कहा कि “कट्टा, कटुता, कड़वाहट” जैसी भाषा से बिहार में असंतोष फैलता है. उनके अनुसार, देश में नफरत के माहौल के बीच प्रेम और एकजुटता का पैगाम देना ज़रूरी है। और यही संदेश वह “भारत जोड़ो यात्रा” और उमेर भाई जैसे प्लेटफार्मों के जरिए देना चाहते हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि महागठबंधन में ऐसे उम्मीदवार हैं जो न केवल वादे करते हैं बल्कि उन वादों को पूरा करने का अनुभव और इच्छाशक्ति भी रखते हैं.
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महागठबंधन में सब ठीक
उन्होंने आगे यह भी कहा कि दिल्ली में 15 साल का राज़ आत्म-पर्याप्त नहीं रहा और उदाहरण के तौर पर दिल्ली का जिक्र करते हुए कहा कि 15 साल का अनुभव भी लोगों के सवाल कम नहीं कर पाता। इसलिए बिहार बदलाव की मांग कर रहा है.यदि विपक्ष के वादे देर से आते हैं तो सत्ताधारी पक्ष की घोषणाएं भी निश्चित रूप से जन-उम्मीदों पर खरी उतरी हैं या नहीं! पवन खेड़ा ने महागठबंधन की मजबूती का दावा करते हुए कहा कि उनमे “एक से बढ़कर एक उम्मीदवार” हैं और सीट बंटवारे या तालमेल को लेकर कोई अड़चन नहीं है.
नालंदा से महमूद आलम की रिपोर्ट



