अमोल मजूमदार का सपना साकार, महिला टीम ने रचा इतिहास

कभी भारतीय टीम में जगह न पा सके अमोल मजूमदार ने अब बतौर कोच महिला टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई, जिससे उनका अधूरा सपना आखिरकार पूरा हो गया।

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नई दिल्ली: कभी अपने करियर में “क्या होता अगर…” जैसे सवालों से जूझते रहे अमोल मजूमदार (Amol Muzumdar) की कहानी अब पूरी हो गई है। भारतीय महिला क्रिकेट टीम (India Women Cricket) के मुख्य कोच के रूप में उन्होंने जो हासिल किया है, वह न सिर्फ उनके लिए बल्कि पूरे भारतीय क्रिकेट के लिए गर्व का क्षण बन गया है।

1990 के दशक में घरेलू क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में शुमार मजूमदार को उस दौर में टेस्ट टीम में जगह नहीं मिल सकी, जब भारतीय क्रिकेट के मध्यक्रम में राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण जैसे दिग्गज खिलाड़ी मौजूद थे। यह उनकी किस्मत की सबसे बड़ी विडंबना थी।

सचिन-विनोद की साझेदारी और अधूरा सपना

अमोल मजूमदार का क्रिकेट सफर बचपन से ही संघर्षों से भरा रहा। एक समय स्कूल क्रिकेट में वे पैड बांधकर बैठे रह गए थे, जब सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली ने शारदाश्रम विद्यालय के लिए 664 रनों की ऐतिहासिक साझेदारी की थी। तब से लेकर अब तक, उन्हें हमेशा अपने मौके का इंतजार रहा।

लेकिन जब फाइनल में हरमनप्रीत कौर (Harmanpreet Kaur) ने नादिन डी क्लार्क का निर्णायक कैच पकड़ा, तो मजूमदार की आंखों में वर्षों की अधूरी उम्मीदें पूरी हो गईं।

भावनाओं से भरा ऐतिहासिक पल

जीत के बाद भावुक मजूमदार ने कहा, “उस पल के बाद मुझे समझ नहीं आया कि क्या हुआ। अगले पांच मिनट जैसे धुंधले थे। मैं बस ऊपर देख रहा था — शायद यकीन नहीं हो रहा था। अभी तक यह एहसास पूरी तरह से बैठा नहीं है, लेकिन यह वाकई अविश्वसनीय है।” मजूमदार अब गैरी कर्स्टन और राहुल द्रविड़ जैसे दिग्गज कोचों की उस खास सूची में शामिल हो गए हैं जिन्होंने भारत को विश्व कप (ICC Women’s World Cup) दिलाया है।

टीम की एकजुटता बनी सफलता की कुंजी

उन्होंने इस सफलता का श्रेय खिलाड़ियों की एकता और जज्बे को दिया। “पिछले दो साल इस टीम के साथ शानदार रहे। हर खिलाड़ी एक-दूसरे का साथ देता है। ऐसे समूह के साथ काम करना गर्व की बात है,” उन्होंने कहा।

पुराने ‘खडूस मुंबईकर’ अंदाज के लिए मशहूर मजूमदार ने बताया कि अनुशासन और मानसिक दृढ़ता उनकी कोचिंग शैली का अहम हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि तीन हार के बाद भी उन्होंने टीम से कहा था — “हम हारे नहीं हैं, बस फिनिशिंग लाइन पार नहीं कर पाए।” टीम ने इसके बाद जिस जोश और आत्मविश्वास से वापसी की, उसने इतिहास रच दिया।

भारतीय क्रिकेट का नया सवेरा

सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया और फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराकर भारत ने जो खिताब जीता, उसे मजूमदार ने भारतीय महिला क्रिकेट का “नया सवेरा” बताया। “यह जीत सिर्फ महिला क्रिकेट की नहीं, बल्कि पूरे भारतीय क्रिकेट की है। जैसे 1983 की जीत ने एक पीढ़ी को प्रेरित किया था, वैसे ही यह जीत नई पीढ़ी के सपनों को उड़ान देगी,” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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