पटना मेट्रो पर बढ़ा बोझ, बिजली बिल अब रेलवे जैसा

पटना मेट्रो को 132 केवी ट्रैक्शन के लिए रेलवे की तरह बिजली शुल्क देना होगा। आयोग ने मेट्रो की खुद को रेलवे से अलग बताने वाली दलीलों को खारिज कर दिया।

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पटना: बिहार विद्युत विनियामक आयोग (Berc) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने पटना मेट्रो की उस दलील को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें मेट्रो ने खुद को रेलवे से अलग बताया था। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मेट्रो में भी 132 केवी पर ट्रैक्शन बिछाया जाता है, और इसी कारण इसे भी रेलवे की तरह ही बिजली शुल्क देना होगा।
आयोग के अध्यक्ष आमिर सुबहानी, सदस्य अरुण कुमार सिन्हा और पीएस यादव की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि पटना मेट्रो में भी रेलवे की तरह ही 132 केवी पर ट्रैक्शन बिछाया जाता है। इसके अलावा, मेट्रो का किराया भी रेलवे से काफी अधिक होता है। इन सभी तथ्यों को देखते हुए आयोग ने फैसला किया है कि पटना मेट्रो को भी ‘रेलवे ट्रैक्शन सर्विस’ श्रेणी में ही रखा जाएगा।

बिजली टैरिफ और फिक्स्ड चार्ज

आयोग के फैसले के मुताबिक, पटना मेट्रो को अब रेलवे के समान ही बिजली शुल्क का भुगतान करना होगा। इसके तहत…
फिक्स्ड चार्ज: ₹540 प्रति केवीए
विद्युत शुल्क: ₹8.16 प्रति यूनिट
आयोग ने फिलहाल पटना मेट्रो को एक आंशिक राहत भी दी है, क्योंकि अभी इसका परिचालन कुछ ही हिस्सों में शुरू हो रहा है। आमतौर पर, 132 केवी के कनेक्शन के लिए 7.5 एमवीए का कनेक्शन अनिवार्य होता है, लेकिन आयोग ने पटना मेट्रो को अभी 2 एमवीए का कनेक्शन लेने की मंजूरी दी है। इसके साथ ही, मेट्रो पर टीओडी (टाइम ऑफ डे) टैरिफ भी लागू होगा, जिससे व्यस्त समय के दौरान बिजली की दरों में बदलाव होगा।

क्यों शुरू हुआ यह विवाद

पटना मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने बिहार विद्युत विनियामक आयोग (Berc) से यह अनुरोध किया था कि उसे बिजली के बिल का भुगतान रेलवे से अलग श्रेणी में करने की अनुमति दी जाए। मेट्रो का तर्क था कि वह रेलवे की तरह पूरे दिन नहीं चलती, बल्कि उसका परिचालन सीमित समय के लिए होता है, और उसकी सेवाएं रेलवे से अलग हैं। इसलिए, उस पर रेलवे के मुकाबले कम दर वाला बिजली शुल्क लगाया जाना चाहिए।

Berc का फैसला क्यों महत्वपूर्ण

Berc ने इस मामले में मेट्रो की दलीलों को खारिज कर दिया। आयोग ने अपनी सुनवाई के दौरान यह पाया कि तकनीकी रूप से, पटना मेट्रो में भी रेलवे की तरह ही 132 केवी पर ट्रैक्शन सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह एक उच्च-वोल्टेज वाली बिजली लाइन होती है, जो ट्रैक्शन (रेल को चलाने) के लिए जरूरी है।
इसके अलावा, आयोग ने यह भी ध्यान में रखा कि मेट्रो का किराया भी आम रेलवे सेवाओं से काफी अधिक होता है। इन सभी बिंदुओं को देखते हुए, आयोग ने यह फैसला किया कि पटना मेट्रो को “रेलवे ट्रैक्शन सर्विस” श्रेणी में ही रखा जाएगा।

इस फैसले का असर क्या होगा

इस फैसले के बाद, पटना मेट्रो को बिजली के लिए ₹540 प्रति केवीए फिक्स्ड चार्ज और ₹8.16 प्रति यूनिट विद्युत शुल्क का भुगतान करना होगा। यह दर मेट्रो के लिए एक बड़ा खर्च साबित हो सकती है, जिससे उसके परिचालन की लागत बढ़ जाएगी। हालाँकि, आयोग ने अभी मेट्रो को शुरुआत में 2 एमवीए का कनेक्शन लेने की अनुमति दी है, जबकि आमतौर पर 132 केवी के लिए 7.5 एमवीए का कनेक्शन जरूरी होता है। यह एक अस्थायी राहत है।
यह फैसला पटना मेट्रो के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि इससे उसके परिचालन लागत पर सीधा असर पड़ेगा।

Usha Mehta

ushamehta0013@gmail.com

NewG India का सबसे युवा चेहरा, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद IGNOU और ABP न्यूज़ नेटवर्क जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। सोशल और कॉमर्स विषयों की गहरी समझ हैं कलम के साथ आवाज में भी धार हैं। NewG India में बतौर कंटेंट डेवलपर व एंकर अपनी जिम्मेदारी उषा मेहता बखूबी निभा रही हैं ।

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