पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों का ऐलान हो चुका है, लेकिन NDA में सीट बंटवारे को लेकर अभी भी सहमति नहीं बन पाई है। इसी बीच, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HUM) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने अपनी पार्टी के लिए कम से कम 15 सीटों की मांग को दोहराते हुए कहा है कि अगर मांग पूरी नहीं हुई, तो उनकी पार्टी एक भी सीट पर चुनाव नहीं लड़ेगी। हालांकि, मांझी ने जोर देकर कहा कि वे NDA में बने रहेंगे और गठबंधन का समर्थन करते रहेंगे।
मांझी की मांग ने मचाई खलबली!
8 अक्टूबर यानी बुधवार को मांझी ने कहा कि हम बस इतनी ही मांग कर रहे हैं कि हमारी पार्टी को मान्यता मिले। अगर हमारी मांग पूरी नहीं होती तो हम एक भी सीट पर चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन NDA में ही बने रहेंगे। मांझी ने मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री पद की मांग को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पार्टी का मुख्य मुद्दा विधानसभा में अपनी पहचान सुनिश्चित करना है।
15 सीटों पर समझौते के मूड में मांझी
सूत्रों के मुताबिक मांझी 20 सीटों की मांग पर अड़े हैं, लेकिन अब कम से कम 15 सीटों पर समझौते के मूड में हैं। हालांकि, अभी चर्चा है कि उन्हें मात्र 7 सीटें मिलने की संभावना है, जो BJP और JDU द्वारा तय की जा रही है। मांझी का यह बयान NDA में खलबली मचा रहा है, वो भी तब चिराग पासवान भी 40 सीटों की मांग कर रहे हैं।
दिनकर की कविता से जाहिर किए भाव
मांझी ने अपनी मांग को भावुक अंदाज में व्यक्त करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध कविता ‘रश्मिरथी’ के पंक्तियों को शेयर किया। मूल कविता में पांडवों के लिए 5 गांवों की मांग का जिक्र है, लेकिन मांझी ने इसे 15 पर बदल दिया:-
“हो न्याय अगर तो आधा दो,
यदि उसमें भी कोई बाधा हो,
तो दे दो केवल 15 ग्राम,
रखो अपनी धरती तमाम,
हम वही खुशी से खाएंगे,
परिजन पे आसी ना उठाएंगे।”
यह पोस्ट तुरंत वायरल हो गया और NDA के बड़े नेताओं को संदेश दे गई कि मांझी ‘दुर्योधन’ जैसी भूमिका में नहीं हैं, बल्कि न्याय की मांग कर रहे हैं। मांझी ने BJP को महाभारत के संदर्भ से जोड़ते हुए अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बनाया।
सूत्रों का कहना है कि BJP प्रमुख जेपी नड्डा ने मांझी से बात की है ताकि तनाव कम हो। अगर छोटे दलों को कम सीटें मिलीं, तो उन्हें राज्यसभा या विधान परिषद की सीटों से मनाया जा सकता है। मांझी ने असम यात्रा पर होने के बावजूद कहा कि वे NDA का समर्थन करेंगे, लेकिन ‘अपमान’ महसूस कर रहे हैं क्योंकि उनकी पार्टी को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है।
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मांझी का बयान NDA के लिए चुनौती है, लेकिन गठबंधन टूटने की संभावना कम है। आने वाले दिनों में दिल्ली स्तर पर बैठकें हो सकती हैं, जहां अंतिम फैसला होगा। बिहार चुनाव 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में होंगे, जबकि 14 नवंबर को मतगणना। कल से 121 सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो रही है, इसलिए NDA को जल्द सीट बंटवारा अंतिम रूप देना होगा। विपक्षी महागठबंधन में भी सीट विवाद चल रहा है, लेकिन NDA की यह खलबली गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे दलों की भूमिका दलित और पिछड़े वोट बैंक में निर्णायक होगी।



