भोजपुर, आरा: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) ने गुरुवार को अपने जिला कार्यालय श्रीटोला, आरा में एक अहम प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की। इस प्रेस वार्ता में पार्टी के केंद्रीय कमेटी सदस्य एवं सांसद सुदामा प्रसाद, अगियांव विधायक शिवप्रकाश रंजन और राज्य कमेटी सदस्य क्यामुद्दीन अंसारी शामिल हुए। इस दौरान सांसद सुदामा प्रसाद ने बिहार सरकार द्वारा महिलाओं को दी जा रही 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता योजना पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा-
“हमें जानकारी मिल रही है कि सरकार जिन महिलाओं को 10,000 रुपये की सहायता राशि दे रही है, उनसे बाद में यह राशि सूद समेत वापस मांगी जा सकती है। यदि महिलाएं यह राशि वापस नहीं करेंगी, तो उनके बैंक का सिविल स्कोर खराब कर दिया जाएगा, जिससे उन्हें भविष्य में किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा। यहां तक कि कुर्की-जब्ती की कार्रवाई की भी संभावना है।”
गरीब महिलाओं के साथ विश्वासघात
सांसद ने इस कदम को गरीब महिलाओं के साथ विश्वासघात बताते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि-
“इस तरह की धमकी भरी कार्रवाई महिलाओं के आत्मसम्मान और सामाजिक सुरक्षा के खिलाफ है। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह सहायता है या ऋण।”यह भी पढ़ेंः मांझी की मांग ने NDA में मचाई ‘खलबली’!, मांगें नहीं मानी तो…
अपनी विफलताओं से घबराई सरकार
भाकपा-माले नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा और उसके सहयोगी दल बिहार में अपनी विफलताओं से घबराए हुए हैं। सुदामा प्रसाद ने कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा जानती है कि भागते भूत की लंगोटी भली- उनका जाना अब तय है।
पार्टी ने राज्य सरकार से चार प्रमुख मांगें भी रखीं, हालांकि प्रेस कांफ्रेंस में उन बिंदुओं का औपचारिक विवरण नहीं दिया गया। भाकपा-माले ने यह भी संकेत दिया कि यदि सरकार ने महिलाओं को दी गई राशि को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की, तो इसके खिलाफ व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।



