भागलपुर/पीरपैंती/कहलगांव: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए की तीसरी लिस्ट जारी होने के बाद भागलपुर जिले का राजनीतिक समीकरण बदल गया है। पीरपैंती और कहलगांव सीटों पर सिटिंग विधायकों का टिकट कटने से बीजेपी में विद्रोह के स्वर तेज हो गए हैं। पूरे जिले में एनडीए ने तीन सिटिंग विधायकों का टिकट काटा है, जिसके बाद बागी तेवर देखने को मिल रहे हैं।
पीरपैंती: ललन पासवान का टिकट कटा, पार्टी से इस्तीफा
पीरपैंती (सुरक्षित) सीट पर बीजेपी ने अपने वर्तमान विधायक ललन पासवान का टिकट काट दिया है। उनके स्थान पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ता मुरारी पासवान पर भरोसा जताया गया है। टिकट कटने से नाराज ललन पासवान ने तुरंत पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने त्याग पत्र में तल्ख टिप्पणी करते हुए लिखा कि पार्टी को दलितों की जरूरत खत्म हो गई है।
आपको बता दें कि ललन पासवान 2020 में विधायक बने थे, लेकिन उसी वर्ष जीत के तुरंत बाद लालू यादव से बातचीत का कथित वायरल ऑडियो सामने आने के बाद वह चर्चा में आए थे। खुद को पार्टी का सच्चा सिपाही बताने वाले ललन पासवान ने अब बागी तेवर अपना लिया है।
कहलगांव से बीजेपी को झटका
कहलगांव सीट पर एनडीए ने बड़ा बदलाव करते हुए इसे बीजेपी के पाले से निकालकर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) को दे दिया है। बीजेपी के सिटिंग विधायक पवन यादव का टिकट कट गया है। जदयू ने इस सीट से शुभानंद मुकेश को उम्मीदवार बनाया है, जो कांग्रेस के दिग्गज और 9 बार विधायक रहे दिवंगत सदानंद सिंह के बेटे हैं।
शुभानंद मुकेश ने 2020 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन तब उन्हें बीजेपी के पवन यादव ने लगभग 41,000 मतों के बड़े अंतर से हराया था। हार के बाद शुभानंद मुकेश जदयू में शामिल हो गए थे। हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहलगांव में सदानंद सिंह के गांव में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया था, जिसके बाद ही शुभानंद मुकेश का टिकट फाइनल होने के कयास लगाए जा रहे थे।
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शुभानंद मुकेश कुर्मी जाति से आते हैं और कुर्मी, कुशवाहा, मंडल वोटरों में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। टिकट कटने से नाराज बीजेपी विधायक पवन यादव ने भी निर्दलीय चुनाव लड़ने का मूड बना लिया है और इसके लिए एनआर (नो ड्यूज) रसीद भी कटा ली है।
भागलपुर में बीजेपी में ‘भगदड़’
भागलपुर विधानसभा से बीजेपी ने पिछली बार के उम्मीदवार रोहित पांडे पर फिर से भरोसा जताया है, जो 2020 में कांग्रेस के अजीत शर्मा से मात्र 946 वोटों से हार गए थे। हालांकि, टिकट के दावेदार रहे प्रीति शेखर और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के पुत्र अर्जित शाश्वत समेत कई कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर भड़ास निकाली है और निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए एनआर रसीद कटा ली है।
पीरपैंती और कहलगांव में भी सिटिंग विधायकों का टिकट कटने से विद्रोह शुरू हो गया है। ललन पासवान ने इस्तीफा दिया है, वहीं पवन यादव भी निर्दलीय ताल ठोकने को तैयार हैं।



