ग्रीनहाउस गैसों ने तोड़े सभी रिकॉर्ड, मीथेन में 166% की खतरनाक बढ़ोतरी

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में ग्रीनहाउस गैसों का स्तर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है।

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नई दिल्ली: दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन की चेतावनियों के बीच अब एक और चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में ग्रीनहाउस गैसों का स्तर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इसमें सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और मीथेन (CH₄) जैसे प्रमुख ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा में ऐतिहासिक रूप से तेज वृद्धि दर्ज की गई है।

CO₂ में रिकॉर्ड तोड़ उछाल: 423.9 PPM पर पहुंचा स्तर

2024 में वातावरण में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड का औसत स्तर 423.9 भाग प्रति मिलियन (PPM) दर्ज किया गया, जो 2023 में 420 PPM था। ये वृद्धि केवल एक साल में 3.5 PPM की रही, जो कि 1957 से अब तक सबसे तेज वार्षिक वृद्धि है। विशेषज्ञों के मुताबिक, 1960 के दशक की तुलना में अब CO₂ की वृद्धि दर तीन गुना हो चुकी है। साल 2004 में जब WMO ने पहली बार यह रिपोर्ट प्रकाशित की थी, तब CO₂ का स्तर 377.1 PPM था। यानि बीते दो दशकों में इसमें 12.4% की खतरनाक वृद्धि हुई है।

मीथेन में 166% की बढ़ोतरी

CO₂ के साथ-साथ मीथेन की मात्रा भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, मीथेन का औसत वैश्विक स्तर 2024 में 1942 भाग प्रति बिलियन (PPB) तक पहुंच गया, जो औद्योगिक युग से पहले की तुलना में 166% अधिक है। मीथेन की यह वृद्धि बहुत चिंताजनक है क्योंकि यह गैस वातावरण में लगभग 9 साल तक बनी रहती है और इसकी तापमान बढ़ाने की क्षमता CO₂ से कई गुना अधिक है।

उत्सर्जन के लिए इंसानी गतिविधियां जिम्मेदार

रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि इस बढ़ते उत्सर्जन के पीछे मानव गतिविधियां ही प्रमुख कारण हैं। औद्योगीकरण, जीवाश्म ईंधनों का इस्तेमाल, जंगलों की कटाई और जलती हुई जंगलों की आग ने वातावरण में CO₂ और CH₄ की मात्रा को खतरनाक हद तक बढ़ा दिया है। जंगलों में लगी आग और लंबे सूखे ने पृथ्वी के प्राकृतिक कार्बन सिंक्स (जैसे- पेड़ और महासागर) की क्षमता को कमज़ोर कर दिया है। ये सिंक्स सामान्यतः वातावरण से CO₂ को अवशोषित करते हैं, लेकिन अब ये उतने प्रभावी नहीं रह गए हैं।

महासागर और धरती भी थकने लगे हैं

वैज्ञानिकों का कहना है कि जैसे-जैसे धरती गर्म होती जा रही है, महासागर CO₂ को कम अवशोषित कर पा रहे हैं, क्योंकि गर्म पानी में गैसें घुलने की क्षमता घट जाती है। वहीं, लंबे समय तक सूखे और गर्म हवाओं ने ज़मीन पर मौजूद कार्बन सिंक्स को भी कमजोर कर दिया है। WMO की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ऑक्साना तारासोवा के मुताबिक, यदि कार्बन सिंक्स कमजोर होते रहे, तो वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा और तेजी से बढ़ेगी, जिससे जलवायु संकट और भी विकराल रूप ले सकता है।

अल नीनो की भूमिका और 2024 की गर्मी

2024 को अब तक का सबसे गर्म वर्ष माना गया है। इसमें अल नीनो जैसी जलवायु घटनाओं की भी भूमिका रही, जिसने सूखा, जंगलों में आग और फसल क्षति जैसी स्थितियों को बढ़ावा दिया। इससे प्राकृतिक तरीके से CO₂ को सोखने वाली प्रक्रियाएं और अधिक बाधित हो गईं।

क्या कहती है डब्ल्यूएमओ

WMO की उप महासचिव को बैरेट ने चेतावनी दी कि हमारी जलवायु पहले से कहीं अधिक तेज़ी से बदल रही है। अब अगर उत्सर्जन को नहीं रोका गया, तो इसकी कीमत हमें अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और समाजिक स्थिरता से चुकानी पड़ेगी।

Usha Mehta

ushamehta0013@gmail.com

NewG India का सबसे युवा चेहरा, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद IGNOU और ABP न्यूज़ नेटवर्क जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। सोशल और कॉमर्स विषयों की गहरी समझ हैं कलम के साथ आवाज में भी धार हैं। NewG India में बतौर कंटेंट डेवलपर व एंकर अपनी जिम्मेदारी उषा मेहता बखूबी निभा रही हैं ।

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