पटना: बिहार में लगभग 20 लाख बच्चों के पास आधार कार्ड नहीं होने और हजारों छात्रों के आधार में त्रुटियों के कारण अपार (APAR) कार्ड बनाने की प्रक्रिया में बड़ी बाधा आ रही है। शिक्षा मंत्रालय के यू-डायस (U-DISE) पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 59,616 विद्यार्थियों का अपार कार्ड रिक्वेस्ट फेल हो चुका है।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, अपार कार्ड एक 12 अंकों का डिजिटल पहचान पत्र है, जिसे शिक्षा मंत्रालय ने शुरू किया है। इसका उद्देश्य छात्रों के सभी शैक्षणिक रिकॉर्ड जैसे डिग्री, प्रमाणपत्र, और क्रेडिट स्कोर को एक ही जगह डिजिटल रूप से संग्रहीत करना है। अपार कार्ड बनाने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य है क्योंकि यह बच्चों के आधार कार्ड और डिजीलॉकर अकाउंट से लिंक होता है।
समस्या यह है कि हजारों छात्रों के आधार कार्ड में मौजूद जानकारी और स्कूल में दिए गए दस्तावेजों की जानकारी आपस में मेल नहीं खा रही। इसी वजह से इन बच्चों का अपार कार्ड रिक्वेस्ट रद्द कर दिया गया है। जिन छात्रों का अनुरोध विफल हुआ है, उन्हें पहले अपने आधार कार्ड में सुधार करवाना होगा, तभी वे दोबारा आवेदन कर सकते हैं।
किन छात्रों को हो रही समस्या
आंकड़ों के मुताबिक, जिन 59,616 छात्रों का अपार कार्ड बनाने का अनुरोध फेल हुआ है, उनमें से लगभग 48,000 बच्चे सरकारी स्कूलों के हैं, जबकि करीब 8,000 बच्चे निजी स्कूलों के हैं।
आधार कार्ड में सुधार कैसे करें
जिन छात्रों के आधार कार्ड में त्रुटियां हैं, वे इन तरीकों से सुधार करवा सकते हैं:
आधार सेवा केंद्र या कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाएं और आधार कार्ड सुधार फॉर्म भरें।
यह फॉर्म स्कूल में जमा किए गए दस्तावेजों के आधार पर ही भरें।
सेवा केंद्र पर दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा और सुधार की प्रक्रिया पूरी होगी।
अपार कार्ड क्यों है जरूरी
शिक्षा मंत्रालय ने सभी छात्रों के लिए अपार कार्ड अनिवार्य कर दिया है। यह कार्ड शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता लाने, फर्जीवाड़े को रोकने और दोहरे नामांकन की समस्या को खत्म करने में मदद करेगा। इसके अलावा, स्कूल बदलने, उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने या नौकरी के लिए आवेदन करने पर छात्रों को अपने सभी दस्तावेज एक जगह उपलब्ध होने से काफी सुविधा होगी।
शिक्षा मंत्रालय की डिजिटल पहल
केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय का लक्ष्य देश में शिक्षा के क्षेत्र को पूरी तरह से डिजिटल बनाना है। इसी उद्देश्य के लिए APAR कार्ड की शुरुआत की गई है। यह एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो किसी भी छात्र के पूरे शैक्षणिक जीवन का रिकॉर्ड, जैसे कि उसकी डिग्रियां, प्रमाणपत्र, और क्रेडिट स्कोर को एक ही जगह पर सुरक्षित रखता है। इस सिस्टम का अंतिम लक्ष्य छात्र के लिए एक ‘एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ बनाना है, जिससे वह कभी भी, कहीं से भी अपने दस्तावेजों को एक्सेस कर सके।
आधार कार्ड से लिंक करने की अनिवार्यता
APAR कार्ड को सफल बनाने के लिए यह ज़रूरी है कि इसे छात्र की एक स्थायी और सत्यापित पहचान से जोड़ा जाए। इसके लिए आधार कार्ड को चुना गया है। कार्ड बनाने की पूरी प्रक्रिया बच्चे के आधार कार्ड से लिंक होती है, और इससे एक डिजिलॉकर अकाउंट भी बनता है।
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बिहार में क्रियान्वयन की समस्या
आधार कार्ड की कमी: बिहार में लगभग 20 लाख बच्चों के पास आधार कार्ड ही नहीं है। इस वजह से वे इस डिजिटल पहचान पत्र को बनाने की पहली शर्त ही पूरी नहीं कर पा रहे हैं।
डेटा में गलतियां: जिन बच्चों के पास आधार है भी, उनमें से हजारों के आधार कार्ड में दर्ज जानकारी (जैसे नाम, जन्मतिथि) उनके स्कूल के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती। सॉफ्टवेयर इस डेटा बेमेल को स्वीकार नहीं करता, और इसी कारण 59,616 छात्रों का आवेदन रद्द हो गया।
यह खबर एक अच्छी नीति और उसे लागू करने के बीच की खाई को दिखाती है। यह बताता है कि कैसे तकनीकी पहल भी तब तक पूरी तरह सफल नहीं हो सकती, जब तक कि उससे जुड़ी बुनियादी जरूरतें (जैसे सभी बच्चों के पास आधार कार्ड होना और उसमें सही जानकारी होना) पूरी न हो जाएं।



