पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राज्य की सियासत में एक नया मोड़ आ गया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने तीसरे मोर्चे की औपचारिक घोषणा कर दी है। पार्टी ने इस बार 100 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान करते हुए साफ कर दिया है कि अब वह किसी गठबंधन का इंतजार नहीं करेगी। यह फैसला महागठबंधन (INDIA ब्लॉक) के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि बिहार की लगभग 17 प्रतिशत मुस्लिम आबादी AIMIM के लिए एक अहम वोट बैंक मानी जाती है।
अख्तरुल ईमान बोले- ‘अब इंतजार नहीं करेंगे‘
AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा है कि हम महागठबंधन के जवाब का अब इंतजार नहीं करेंगे। बिहार को एक नया राजनीतिक विकल्प देने का समय आ गया है। तीसरा मोर्चा बनाकर हम उन लोगों की आवाज बनेंगे, जिन्हें अब तक केवल वोट बैंक समझा गया। अख्तरुल ईमान ने महागठबंधन के नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि “धर्मनिरपेक्षता के नाम पर केवल कुर्सी की राजनीति की जा रही है।” उन्होंने दावा किया कि AIMIM इस बार हर समुदाय और वर्ग को साथ लेकर चुनाव मैदान में उतरेगी।
तीसरे मोर्चे में कौन-कौन शामिल हो सकता है?
AIMIM की इस पहल में राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP) के पशुपति कुमार पारस, आजाद समाज पार्टी (ASP) के चिराग पासवान समर्थक गुट और तेजप्रताप यादव की जनशक्ति जनता दल (JJD) को जोड़ने की कोशिशें तेज हैं। RLJP ने महागठबंधन को तीन सीटें ऑफर करने के बावजूद गठबंधन से दूरी बनाई है और अब AIMIM-BSP के साथ तालमेल की संभावना जताई जा रही है। तेजप्रताप यादव ने 13 अक्टूबर को अपनी पार्टी JJD की उम्मीदवार सूची जारी करने का ऐलान किया है। ASP के मेम्बर भी तीसरे मोर्चे में शामिल होने के संकेत दे रहे हैं।
2020 में AIMIM ने BSP और RLSP के साथ ‘ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट’ बनाया था, जिसमें से पांच सीटें सीमांचल से जीतीं। अब उसी मॉडल पर काम चल रहा है, लेकिन बड़े पैमाने पर। पार्टी ने 12 अक्टूबर को 32 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की, जिसमें किशनगंज, पूर्णिया, अररिया और दरभंगा जैसी सीटें शामिल हैं।
2020 के मुकाबले पांच गुना ज्यादा सीटों पर चुनाव
बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में AIMIM ने केवल 20 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें पार्टी को सीमांचल क्षेत्र की 5 सीटों पर जीत मिली थी। इस बार पार्टी ने दांव बड़ा लगाते हुए 100 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम AIMIM को सीमांचल से लेकर मगध और मिथिलांचल तक अपनी मौजूदगी बढ़ाने का अवसर देगा।
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AIMIM का बढ़ता प्रभाव और महागठबंधन की चिंता
बिहार की कुल मुस्लिम आबादी लगभग 17 प्रतिशत है, जो करीब 20 से अधिक विधानसभा सीटों पर निर्णायक प्रभाव रखती है। अब AIMIM के तीसरे मोर्चे में उतरने से महागठबंधन के पारंपरिक वोट बैंक में विभाजन की आशंका बढ़ गई है। विशेष रूप से राजद (RJD) और कांग्रेस के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि इन दोनों दलों को अब तक मुस्लिम समुदाय का बड़ा समर्थन मिलता रहा है।
BSP, जन सुराज और AAP भी मैदान में
इस बीच, मायावती की बहुजन समाज पार्टी (BSP) अकेले चुनाव लड़ने पर अड़ी है, जिससे दलित वोटबैंक प्रभावित हो सकता है। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी (JSP) ने सभी 243 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है और 11 अक्टूबर को रघोपुर से कैंपेन शुरू किया। आम आदमी पार्टी (AAP) भी पूरे दम पर उतरेगी।



