बीजेपी से बराबरी का समझौता, नीतीश का राजनीतिक वर्चस्व कम होने का प्रतीक!

न्यूजी इंडिया ने पहले ही बता दिया था कि इस बार भाजपा छोटे भाई की भूमिका में नहीं रहेगी। आइए समझते हैं कैसे नीतीश ने नरेंद्र मोदी के आते ही तोड़े थे संबंध, गिरी थी इनकी साख। अब आ गये बराबर की भूमिका में। पढ़िए वरिष्ठ पत्रकार उपेन्द्र नाथ राय की यह रिपोर्ट

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पटना: न्यूजी इंडिया ने 27 सितंबर को ही बता दिया था कि इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा छोटे भाई की भूमिका में नहीं रहेगी। रविवार को इस खबर पर मुहर लग गई। इसका कारण है, पिछले चुनाव में बीजेपी का जीत प्रतिशत 67 रहा, जबकि जदयू का केवल 43 प्रतिशत। चार चुनावों के बाद पहली बार भाजपा ने बराबरी का समझौता किया है। इससे पहले जदयू ही हमेशा बड़े भाई की भूमिका में रही थी। दरअसल, यह मौका नीतीश कुमार ने तब ही भाजपा को दे दिया था जब उन्होंने 2015 में राजद के साथ बराबरी पर समझौता किया था। जो कमी बची थी, वह पिछले चुनाव में भाजपा के बेहतर प्रदर्शन ने पूरी कर दी।

मार्च 2000: जब जदयू नहीं, समता पार्टी थी

बात मार्च 2000 के विधानसभा चुनाव की है, जब जदयू नहीं बल्कि समता पार्टी हुआ करती थी। उस समय झारखंड भी बिहार का हिस्सा था और यह संयुक्त बिहार का अंतिम विधानसभा चुनाव था। समता पार्टी ने भाजपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था। कुल 324 सीटों में भाजपा ने 168 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 67 सीटें जीतीं। वहीं समता पार्टी ने 120 सीटों पर चुनाव लड़ा और 34 सीटें जीतीं।

1999: भाजपा को समर्थन देने से टूटा जनता दल

जनता दल (यूनाइटेड) के गठन की शुरुआत 1999 के आम चुनाव में भाजपा को समर्थन देने से हुई थी। कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री जेएच पटेल के नेतृत्व में जनता दल के एक गुट ने एनडीए को समर्थन दिया, जिसके बाद जनता दल दो हिस्सों में बंट गया। पहला धड़ा एचडी देवगौड़ा के नेतृत्व में जनता दल (सेक्युलर) और दूसरा धड़ा शरद यादव के नेतृत्व में। बाद में शरद यादव का गुट, लोकशक्ति पार्टी और समता पार्टी पास आए और 30 अक्टूबर 2003 को आपस में विलय कर जनता दल (यूनाइटेड) का गठन किया गया। इस नई पार्टी का चुनाव-चिह्न तीर और झंडा हरे-सफेद रंग का पंजीकृत हुआ।

2005: जदयू बनी बड़े भाई की पार्टी

2005 के विधानसभा चुनाव से ही नीतीश कुमार के नेतृत्व में जदयू ने बड़े भाई की भूमिका निभाई। उस चुनाव में जदयू ने 139 सीटों पर चुनाव लड़ा और 88 पर जीत हासिल की। भाजपा को 102 सीटें मिलीं, जिनमें से उसने 55 सीटें जीतीं। भाजपा को जहां 15.65 प्रतिशत मत मिले, वहीं जदयू को 20.46 प्रतिशत वोट मिले। यह चुनाव नीतीश कुमार की ‘सुशासन बाबू’ की छवि पर लड़ा गया और यहीं से उनकी लोकप्रियता और राजनीतिक कद दोनों बढ़ गए। यह झारखंड के अलग होने के बाद बिहार का पहला विधानसभा चुनाव था, जिसमें कुल 243 सीटें रहीं।

2010: एनडीए का स्वर्ण काल

2010 का चुनाव एनडीए के लिए स्वर्ण काल साबित हुआ। नीतीश कुमार की लोकप्रियता और विकास के एजेंडे पर गठबंधन को भारी बहुमत मिला। जदयू ने 141 सीटों पर चुनाव लड़ा और 22.58 प्रतिशत मतों के साथ 115 सीटें जीतीं। भाजपा ने 102 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 91 सीटों पर जीत हासिल की, उसे 16.49 प्रतिशत वोट मिले। यह गठबंधन नीतीश कुमार की मजबूत छवि और भाजपा की रणनीतिक साझेदारी के कारण सर्वाधिक सफल रहा।

मोदी के राजनीति में आने से टूटा 17 साल पुराना रिश्ता

2015 के विधानसभा चुनाव से पहले मोदी युग की शुरुआत हो चुकी थी। नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय राजनीति में आने के बाद जदयू ने भाजपा के साथ अपने 17 साल पुराने गठबंधन को तोड़ दिया। नीतीश कुमार ने कहा था कि ‘हमारा गठबंधन धर्मनिरपेक्ष छवि वाले अटल बिहारी वाजपेयी के साथ था, मोदी के साथ नहीं।’ इसके बाद शरद यादव ने एनडीए के संयोजक पद से इस्तीफा दे दिया। लोकसभा चुनाव में जदयू ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के साथ गठबंधन किया, लेकिन बिहार की 40 सीटों में से केवल 2 पर ही जीत पाई। भाजपा और उसके सहयोगी दल 32 सीटों पर विजयी रहे।

करारी हार के बाद मांझी बने मुख्यमंत्री

इस करारी हार के बाद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया। भाजपा ने सदन में बहुमत सिद्ध करने की मांग की, लेकिन राजद ने जदयू का समर्थन कर सरकार को गिरने से बचा लिया।

नीतीश और मोदी के रिश्तों में पुरानी खटास

नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी के बीच खटास 2010 से ही शुरू हो गई थी। जून 2010 में एक विज्ञापन में दोनों को साथ दिखाए जाने पर नीतीश नाराज हुए और गुजरात सरकार द्वारा दी गई कोसी बाढ़ सहायता की ₹5 करोड़ की राशि वापस कर दी।
17 मार्च 2013 को नीतीश कुमार ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर दिल्ली में अपनी पहली बड़ी रैली की, जिसे शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा गया। 13 जून, 2013 तक उन्होंने एनडीए से अलग होने के संकेत दे दिए थे।

2015: राजद से बराबरी पर समझौता

2015 में नीतीश कुमार ने राजद के साथ बराबरी पर सीट समझौता कर भविष्य में भाजपा के लिए रास्ता खोल दिया।
उस चुनाव में राजद और जदयू को 101-101 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस को 42 सीटें दी गईं। राजद ने 18.4% वोट के साथ 80 सीटें जीतीं, जदयू को 16.8% वोट के साथ 71 सीटें मिलीं और कांग्रेस ने 27 सीटें जीतीं। भाजपा ने 24.4% वोट शेयर के साथ 53 सीटें जीतीं। हालांकि यह महागठबंधन ज्यादा दिन नहीं चला और 2017 में नीतीश फिर एनडीए में लौट आए।

2020: भाजपा आगे, जदयू पीछे

2020 के विधानसभा चुनाव में समीकरण पूरी तरह बदल गए। भाजपा ने 110 सीटों पर और जदयू ने 115 सीटों पर चुनाव लड़ा। विकासशील इंसान पार्टी ने 11 सीटों पर और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा ने 7 सीटों पर चुनाव लड़ा। परिणामों में भाजपा ने 74 सीटें जीतीं जबकि जदयू सिर्फ 43 पर सिमट गई। पहली बार विधानसभा में भाजपा की सीटें जदयू से अधिक रहीं, फिर भी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया गया। यह स्थिति भाजपा की रणनीतिक ताकत और नीतीश की घटती राजनीतिक पकड़ का संकेत थी।

बराबरी का समझौता: नीतीश के घटते कद की मिसाल

अब 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और जदयू को बराबर-बराबर 101-101 सीटें दी गई हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 29, रालोसपा और हम को 6-6 सीटें दी गई हैं। कभी ‘प्रधानमंत्री फेस’ माने जाने वाले नीतीश कुमार अब भाजपा की शर्तों पर गठबंधन में हैं। यह बराबरी का बंटवारा न केवल नीतीश कुमार के घटते राजनीतिक वर्चस्व का प्रतीक है, बल्कि यह दिखाता है कि बिहार में भाजपा अब स्वतंत्र और सशक्त राजनीतिक शक्ति बन चुकी है, जो गठबंधन की बागडोर अपने हाथों में ले चुकी है।

Sandeep Kumar

sandeepx4a@gmail.com

संदीप कुमार एक अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें समाचार जगत में 14 साल से ज्यादा काम किया है। इन्हें गहन शोध, सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए जाना जाता है। उन्होंने ETV Bharat, Hyderabad में साढ़े पाँच वर्षों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और राष्ट्रीय से लेकर क्षेत्रीय स्तर तक कई अहम खबरों को प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत किया। इसके साथ ही उन्होंने Network 10, TOTAL News, MH1 समेत कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी अपनी पत्रकारिता का कौशल साबित किया। राजनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, समाज और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर पकड़ मजबूत है। इस समय newG india में कार्यरत हैं।

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