नई दिल्ली: भारतीय स्पिनर वरुण चक्रवर्ती (Varun Chakaravarthy) ने टेस्ट क्रिकेट को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि वह इस फॉर्मेट में कभी भारत का प्रतिनिधित्व नहीं कर पाएंगे। उनकी यह स्वीकारोक्ति उन फैंस के लिए झटका है, जो उन्हें सफेद जर्सी में देखना चाहते थे।
चक्रवर्ती का कहना है कि उनका गेंदबाजी एक्शन और फिजिकल स्टेमिना टेस्ट क्रिकेट की जरूरतों के अनुकूल नहीं है। एक पॉडकास्ट में बातचीत करते हुए उन्होंने साफ किया कि टेस्ट क्रिकेट में लगातार 20-30 ओवर फेंकना जरूरी होता है, लेकिन उनका शरीर इसकी इजाजत नहीं देता। उनका एक्शन मीडियम पेस की तरह है और वह आमतौर पर तेज गति से स्पिन डालते हैं, जिससे उनकी लिमिट 10-15 ओवर तक ही सीमित रह जाती है।
घुटने की चोट बनी टर्निंग पॉइंट
वरुण ने यह भी बताया कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत तेज गेंदबाज के रूप में की थी। लेकिन 2017 में घुटने की गंभीर चोट के बाद उन्हें अपनी गेंदबाजी शैली बदलनी पड़ी। इसके बाद उन्होंने स्पिन की ओर रुख किया, और यहीं से उनका करियर एक नई दिशा में आगे बढ़ा। उनका मानना है कि अगर वे तेज गेंदबाजी करते रहते, तो शायद आज क्रिकेट में उनका नाम भी न होता।
चैंपियंस ट्रॉफी में किया था धमाका
आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 (ICC Champions Trophy 2025) में वरुण चक्रवर्ती ने सीमित मौके मिलने के बावजूद शानदार प्रदर्शन किया। न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच में 5 विकेट झटककर उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित की। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया और फाइनल में एक बार फिर न्यूजीलैंड के खिलाफ अहम विकेट निकालकर टीम को खिताब दिलाने में मदद की।
अभी तक का करियर
वरुण अब तक भारत के लिए 4 वनडे और 18 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके हैं। टी-20 में उन्होंने 33 विकेट चटकाए हैं जबकि लिस्ट ए क्रिकेट में उनके नाम 79 विकेट हैं। आईपीएल में भी वह 100 विकेट पूरे कर चुके हैं। इसके बावजूद, टेस्ट क्रिकेट उनके लिए एक अधूरा सपना ही रह जाएगा।
वरुण चक्रवर्ती की ईमानदारी और आत्मविश्लेषण इस बात को दर्शाता है कि हर खिलाड़ी की एक सीमा होती है। उन्होंने सीमित ओवरों के क्रिकेट में खुद को साबित किया है और टीम इंडिया के लिए वो इस फॉर्मेट में एक अहम हथियार बने हुए हैं।



