नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेटर जेमिमा रोड्रिग्स ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में शानदार शतक जड़ते हुए भारत को महिला वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचा दिया और वो रातो रात भारत की स्टार बन गई। लेकिन एक साल पहले जेमिमा रोड्रिग्स का सफर आसान नहीं था। उनके पिता को लेकर हुए धार्मिक विवाद ने उन्हें विवादों के घेरे में ला दिया था। लेकिन अब वही जेमिमा भारतीय क्रिकेट की नई राष्ट्रीय हीरोइन बन चुकी हैं।
सेमीफाइनल में खेली तूफानी पारी
गुरुवार को खेले गए महिला वनडे विश्व कप के सेमीफाइनल में जेमिमा ने ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ शानदार शतक लगाकर भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई। उनकी नाबाद 127 रनों की पारी ने भारत को रिकॉर्ड चेज़ के साथ फाइनल में जगह दिला दी।
धार्मिक विवाद से झटका
अक्टूबर 2024 में मुंबई के खार जिमखाना क्लब की वार्षिक बैठक के दौरान विवाद खड़ा हुआ था। जेमिमा के पिता इवान रोड्रिग्स पर आरोप लगा कि उन्होंने 18 महीनों में 35 बार क्लब परिसर में ‘ब्रदर मैनुअल मिनिस्ट्रीज’ से जुड़ी धार्मिक सभाएँ आयोजित की थीं। यह क्लब के नियमों के खिलाफ था, जिसमें किसी भी राजनीतिक या धार्मिक आयोजन की अनुमति नहीं होती। क्लब समिति सदस्य शिव मल्होत्रा ने बताया, “ये देखकर हैरानी हुई कि ऐसे कार्यक्रम क्लब में हो रहे थे। यह नियमों का उल्लंघन था।”
इसके बाद क्लब प्रबंधन ने वोटिंग के ज़रिए जेमिमा की ऑनरेरी सदस्यता रद्द करने का फैसला लिया। क्लब के अध्यक्ष विवेक देवनानी ने बताया कि ‘2023 में जेमिमा को तीन साल की मानद सदस्यता दी गई थी, लेकिन हालात को देखते हुए इसे रद्द किया गया।’
- इसको भी पढ़ें: T20 World Cup की तैयारी शुरू, नई टीम इंडिया का गठन
मानसिक संघर्ष और वापसी की कहानी
इस विवाद के बाद जेमिमा का करियर और मानसिक स्थिति दोनों ही चुनौती में थे। लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और क्रिकेट के मैदान में वापसी की। सेमीफाइनल में 14 चौकों से सजी उनकी नाबाद पारी ने उन्हें फिर सुर्खियों में ला दिया। मैच के बाद जेमिमा ने भावुक होकर कहा, ‘इस टूर के दौरान मैं लगभग रोज़ रोई हूँ। मानसिक रूप से अच्छा महसूस नहीं कर रही थी, लेकिन भगवान ने सब संभाल लिया’।आज जेमिमा न सिर्फ भारत की जीत की वजह बनीं, बल्कि उन्होंने यह साबित कर दिया कि असली जीत वही है जो मुश्किलों के बाद हासिल की जाए।



