नई दिल्ली: Asia Cup 2025 में रविवार को होने वाला भारत-पाकिस्तान (India vs Pakistan) का मुकाबला हमेशा से हाई-वोल्टेज माना जाता रहा है। लेकिन इस बार हालात बदले हुए हैं। जहां दर्शकों और अधिकारियों में पहले जोश और उत्साह दिखता था, अब वह फीका पड़ता नजर आ रहा है।
BCCI का अदृश्य ‘बायकाट’
भारत में चल रही ‘बायकाट मुहिम’ का असर एशिया कप के इस बड़े मुकाबले पर भी दिखाई दे रहा है। मेजबान होने के बावजूद बीसीसीआई (BCCI Boycott) के बड़े अधिकारी अब तक दुबई नहीं पहुंचे हैं। इसे बीसीसीआई का ‘साइलेंट प्रोटेस्ट’ या अदृश्य बायकाट कहा जा रहा है। पिछली बार जब दुबई में चैंपियंस ट्रॉफी में भारत-पाकिस्तान भिड़े थे, तब तमाम बड़े पदाधिकारी वहां मौजूद थे।
विरोध और भावनात्मक माहौल
हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले (Pahalgam Attack Impact) और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत में पाकिस्तान के खिलाफ भावनाएं बेहद तीव्र हैं। ऐसे माहौल में बीसीसीआई के अधिकारी खुद को इस मैच से दूरी बनाकर सुरक्षित रखना चाह रहे हैं। उनका मानना है कि इस दौरान उनकी मौजूदगी गलत संदेश दे सकती है और विरोध की राजनीति का हिस्सा बन सकती है।
बड़े पदाधिकारी दूर
बीसीसीआई अध्यक्ष पद छोड़ चुके रोजर बिन्नी की मौजूदगी तय नहीं है। सचिव देवजीत सैकिया महिला विश्व कप की तैयारियों में व्यस्त बताए जा रहे हैं। आईपीएल चेयरमैन अरुण सिंह धूमल ने भी मैच में न जाने का निर्णय लिया है। कोषाध्यक्ष प्रभतेज भाटिया और संयुक्त सचिव रोहन देसाई के पहुंचने की संभावना भी कम है। उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला, जो एसीसी के कार्यकारी बोर्ड सदस्य हैं, संभवतः भारत की जीत के बाद ही कैमरे पर नजर आएंगे। वहीं, बीसीसीआई के पूर्व सचिव और आईसीसी चेयरमैन जय शाह ने दुबई के बजाय अमेरिका में बैठक में शामिल होने का विकल्प चुना है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका और सरकार की स्थिति
इस मैच को रोकने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court Petition) में याचिका भी दायर की गई थी। हालांकि, कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। भारत सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय सीरीज नहीं होगी, लेकिन बहुदेशीय टूर्नामेंट में खेलने की अनुमति है। यही कारण है कि यह मैच हो रहा है, लेकिन बीसीसीआई अधिकारी कैमरे से दूरी बनाए रखना चाहते हैं ताकि उन पर विरोधी माहौल न बने।
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कैमरे से दूरी की रणनीति
सूत्रों के अनुसार, अगर कोई अधिकारी मैच में दिखा भी, तो वह केवल भारत की जीत सुनिश्चित होने के बाद ही कैमरे पर आएगा। कुल मिलाकर इस बार का भारत-पाक मैच अपने जोश और भव्यता से काफी अलग नजर आ रहा है। न केवल दर्शकों का उत्साह फीका है, बल्कि बीसीसीआई अधिकारियों का भी रुझान इस बार ठंडा पड़ गया है।
भारत-पाकिस्तान मुकाबला क्रिकेट से ज्यादा भावनाओं और राजनीति से जुड़ा माना जाता है। लेकिन इस बार देश में विरोधी माहौल और बायकाट मुहिम के चलते बीसीसीआई के शीर्ष पदाधिकारी खुद को इससे दूर रख रहे हैं। एशिया कप के इस हाई-वोल्टेज मैच में अब सबकी निगाहें सिर्फ खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर होंगी।



