नई दिल्ली: गाजा पट्टी में इजरायल और हमास (Israel Gaza Conflict) के बीच संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है। शुक्रवार को हुए सैन्य अभियानों में 50 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इजरायली सेना ने गाजा सिटी (Gaza City Attack) पर हमले और गोलीबारी और तेज कर दी है। वहीं, लाखों लोग अब भी अपने घर छोड़ने और निर्दिष्ट सुरक्षित स्थानों पर जाने से इनकार कर रहे हैं।
इजरायली हमले में 50 लोगों की मौत
इजरायली नागरिक (Israeli Military Operation) सुरक्षा एजेंसी के मुताबिक, शुक्रवार को गाजा में हुई सैन्य कार्रवाई में कम से कम 50 लोगों ने अपनी जान गंवाई। गाजा पट्टी के सबसे बड़े और सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्र गाजा सिटी को हमास का गढ़ माना जाता है। यहां इजरायली सेना की ओर से लगातार गोलाबारी और हवाई हमले हो रहे हैं।
भोजन और आपूर्ति पर रोक
हमलों के साथ-साथ गाजा सिटी में खाद्य सामग्री और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी ठप हो गई है। इसका असर लाखों आम नागरिकों (Humanitarian Crisis) पर पड़ रहा है। इजरायली सेना का दावा है कि हमास आमजनों को ढाल बनाकर अपनी सुरक्षा कर रहा है। यही वजह है कि बमबारी के दौरान बड़ी संख्या में नागरिक हताहत हो रहे हैं।
गाजा सिटी पर कब्जे की घोषणा
इजरायल सरकार ने गाजा सिटी पर कब्जा करने और वहां की स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने का ऐलान किया है। इजरायल को संदेह है कि इस शहर में ही उसके कई बंधक मौजूद हो सकते हैं। हमास ने यहां मजबूत पकड़ बना रखी है और इसी कारण इजरायल को लंबे समय से इसे पूरी तरह अपने नियंत्रण में लेने में कठिनाई हो रही है।
23 महीने बाद भी नहीं मिला पूर्ण नियंत्रण
करीब 23 महीने से लगातार सैन्य हमलों के बावजूद इजरायली सेना अब तक गाजा सिटी पर पूरी तरह कब्जा नहीं कर पाई है। हालांकि, इसके आसपास के उपनगरों को सेना ने खाली करा लिया है। लेकिन घनी आबादी और हमास की रणनीति के चलते जमीनी कार्रवाई में इजरायल को बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
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वैश्विक आलोचना की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि हमास जानबूझकर नागरिकों को ढाल बनाकर रखता है ताकि इजरायली हमलों में भारी संख्या में होने वाली मौतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायल की आलोचना का कारण बनें। यही वजह है कि अब तक यह संघर्ष और जटिल हो गया है।
गाजा सिटी में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। जहां एक ओर इजरायल इसे अपने नियंत्रण में लेने के लिए बड़े स्तर पर सैन्य अभियान चला रहा है, वहीं आम नागरिकों का जीवन संकट में है। मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है और मानवीय आपूर्ति रुकने से हालात और गंभीर हो गए हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब इस पर टिकी हैं कि क्या कोई कूटनीतिक रास्ता निकलेगा या संघर्ष और लंबा खिंचेगा।



