नई दिल्ली : भारतीय बैडमिंटन के उभरते सितारे आयुष शेट्टी ने शनिवार को बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप में इतिहास रच दिया। आयुष ने पुरुषों के एकल सेमीफाइनल में दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी और पेरिस 2024 ओलंपिक के रजत पदक विजेता कुनलवुत विटिडसर्न को हराकर सनसनी फैला दी।
निंगबो ओलंपिक स्पोर्ट्स सेंटर में खेले गए इस मुकाबले में आयुष ने एक गेम से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए शीर्ष वरीयता प्राप्त थाई शटलर को 10-21, 21-19, 21-17 से पराजित किया। यह मुकाबला एक घंटे और 15 मिनट तक चला।
पुराने इतिहास को दोहराने की दहलीज पर
आयुष शेट्टी इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने वाले दिनेश खन्ना के बाद पहले भारतीय पुरुष एकल खिलाड़ी बन गए हैं। दिनेश खन्ना एकमात्र भारतीय हैं जिन्होंने 1965 में इस महाद्वीपीय प्रतियोगिता में पुरुष एकल का स्वर्ण पदक जीता था। आयुष ने इस जीत के साथ कम से कम रजत पदक पक्का कर लिया है, जो 2018 में एचएस प्रणय के कांस्य पदक के बाद इस श्रेणी में भारत का पहला पदक है।
दिग्गजों को हराकर तय किया फाइनल का सफर
विश्व रैंकिंग में 25वें स्थान पर काबिज और मौजूदा यूएस ओपन सुपर 300 चैंपियन आयुष के लिए यह पूरा टूर्नामेंट किसी सपने जैसा रहा है। सेमीफाइनल से पहले उन्होंने शुक्रवार को दुनिया के नंबर 4 खिलाड़ी और इंडोनेशिया के स्टार जोनाथन क्रिस्टी को 23-21, 21-17 से हराकर बाहर किया था। आयुष ने अपने अभियान की शुरुआत चीन के पांचवीं वरीयता प्राप्त ली शी फेंग को हराकर की थी, जिसके बाद उन्होंने चीनी ताइपे के चिन यू जेन को भी सीधे गेमों में शिकस्त दी।
चुनौतियों को पार कर पाया मुकाम
आयुष और विटिडसर्न इससे पहले पिछले साल आर्कटिक ओपन में मिले थे, जहां थाई खिलाड़ी ने सीधे गेमों में जीत हासिल की थी। हालांकि, शनिवार को आयुष ने अपने धैर्य और आक्रामक खेल का परिचय देते हुए न केवल उस हार का बदला लिया, बल्कि भारतीय बैडमिंटन के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया। अब पूरे देश की निगाहें फाइनल मुकाबले पर टिकी हैं, जहां आयुष स्वर्ण पदक जीतकर 61 साल के सूखे को खत्म करना चाहेंगे।



